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Indore News: एमवाय में एमआरआई और सीटी स्कैन बंद, प्राइवेट अस्पतालों में जांच के लिए भटक रहे मरीज
Sun, 09 Feb 2025 11:08 AM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 09 Feb 2025 11:08 AM IST
सार
Indore News: एमवाय अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन जांच ठप होने से मरीजों को निजी लैब्स पर महंगे दामों में जांच करवानी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जल्द ही नई मशीनें लाई जाएंगी, लेकिन तब तक मरीजों की परेशानी बनी रहेगी।
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- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
एमवाय अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन जांच की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। पहले मरीजों की जांच कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर पर होती थी, लेकिन अनुबंध समाप्त होने के बाद मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को निःशुल्क इलाज मिल रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि मरीजों को जांच के लिए निजी सेंटर पर जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें 3 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीन सिर्फ एमवायएच ही नहीं, बल्कि सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में भी सीटी स्कैन जांच पूरी तरह ठप हो चुकी है।
लैब से खत्म हुआ अनुबंध
मरीजों को अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन उनकी जरूरी जांच दूसरी जगह करवाई जा रही है। एमवायएच में पहले पीपीपी मॉडल के तहत कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर से अनुबंध किया गया था, लेकिन अनुबंध खत्म होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में जांच करवाने की सलाह दी थी। वहां छह माह पहले ही सीएसआर एक्टिविटी के तहत करोड़ों रुपये की नई मशीन लगाई गई थी, जिससे रोजाना 70 मरीजों के सीटी स्कैन किए जा रहे थे। लेकिन 7 दिन पहले यह मशीन खराब हो गई, जिससे मरीजों को मजबूरी में निजी लैब्स पर जाकर जांच करवानी पड़ रही है।
पीसी सेठी में करवाएंगे जांच
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा कि चार दिन पहले इस समस्या की जानकारी मिली थी और अब व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल सीटी स्कैन के लिए पीसी सेठी अस्पताल से बातचीत की गई है, जहां जांच करवाई जाएगी। वहीं, एमआरआई जांच के लिए शॉर्ट टेंडर निकाले जा रहे हैं। इमरजेंसी की स्थिति में दो मरीजों की एमआरआई जांच सुयश हॉस्पिटल में करवाई गई थी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. वीपी पांडेय ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद नई मशीन खरीदने का आदेश दे दिया गया है और जब तक नई मशीन नहीं आती, तब तक शॉर्ट टेंडर के जरिए मरीजों की जांच की व्यवस्था की जा रही है।
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जनसहयोग से लगी थी मशीन
सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला ने बताया कि मशीन के एसी यूपीएस के किसी पार्ट में खराबी आ गई है। मशीन वारंटी पीरियड में है, इसलिए इसकी सूचना कंपनी को दे दी गई है। यह मशीन कुछ महीने पहले ही सीएसआर के तहत लगाई गई थी और 24 घंटे चल रही थी, जिससे इसमें तकनीकी खराबी आ गई। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को पत्र लिख दिया है और जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा। लेकिन तब तक मरीजों को जांच के लिए निजी लैब पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
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लैब से खत्म हुआ अनुबंध
मरीजों को अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन उनकी जरूरी जांच दूसरी जगह करवाई जा रही है। एमवायएच में पहले पीपीपी मॉडल के तहत कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर से अनुबंध किया गया था, लेकिन अनुबंध खत्म होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में जांच करवाने की सलाह दी थी। वहां छह माह पहले ही सीएसआर एक्टिविटी के तहत करोड़ों रुपये की नई मशीन लगाई गई थी, जिससे रोजाना 70 मरीजों के सीटी स्कैन किए जा रहे थे। लेकिन 7 दिन पहले यह मशीन खराब हो गई, जिससे मरीजों को मजबूरी में निजी लैब्स पर जाकर जांच करवानी पड़ रही है।
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पीसी सेठी में करवाएंगे जांच
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा कि चार दिन पहले इस समस्या की जानकारी मिली थी और अब व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल सीटी स्कैन के लिए पीसी सेठी अस्पताल से बातचीत की गई है, जहां जांच करवाई जाएगी। वहीं, एमआरआई जांच के लिए शॉर्ट टेंडर निकाले जा रहे हैं। इमरजेंसी की स्थिति में दो मरीजों की एमआरआई जांच सुयश हॉस्पिटल में करवाई गई थी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. वीपी पांडेय ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद नई मशीन खरीदने का आदेश दे दिया गया है और जब तक नई मशीन नहीं आती, तब तक शॉर्ट टेंडर के जरिए मरीजों की जांच की व्यवस्था की जा रही है।
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जनसहयोग से लगी थी मशीन
सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला ने बताया कि मशीन के एसी यूपीएस के किसी पार्ट में खराबी आ गई है। मशीन वारंटी पीरियड में है, इसलिए इसकी सूचना कंपनी को दे दी गई है। यह मशीन कुछ महीने पहले ही सीएसआर के तहत लगाई गई थी और 24 घंटे चल रही थी, जिससे इसमें तकनीकी खराबी आ गई। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को पत्र लिख दिया है और जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा। लेकिन तब तक मरीजों को जांच के लिए निजी लैब पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
