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Indore News: इंदौर का आखिरी जंगल खतरे में, नागरिकों ने बोला हमें फ्लैट नहीं ऑक्सीजन चाहिए
Sun, 17 Aug 2025 06:40 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 17 Aug 2025 06:40 PM IST
सार
Indore News: हुकुमचंद मिल सिटी फॉरेस्ट को बचाने के लिए राजबाड़ा पर हुआ विरोध प्रदर्शन, सभी एक सुर में बोले शहर की सांसें मत रोकिए
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राजबाड़ा पर हुए विरोध प्रदर्शन में जुटे लोग।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के दिल में बसे हुकुमचंद मिल के प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ आज एक बार फिर नागरिकों की आवाज गूंजी। हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस हरित धरोहर को काटकर निर्माण कार्य किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में, शहर के पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने शाम 5 बजे से 6 बजे तक राजबाड़ा चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर संदेश दिया "पेड़ बचेंगे तो इंदौर बचेगा"।
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यह सिटी फॉरेस्ट केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों पक्षियों, जीव-जंतुओं का घर और शहर की आबोहवा का रक्षक है। नागरिकों का कहना था कि यदि यह वन क्षेत्र नष्ट हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को केवल प्रदूषण और कंक्रीट का जंगल मिलेगा।
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क्या बनेगा यहां
इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर यहां पर फ्लैट बनाकर बेचे जाएंगे। यह जमीन मप्र सरकार के हाउसिंग बोर्ड के पास है। अगले 6 महीने में यहां पर इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर फ्लैटों का निर्माण शुरू करने की योजना प्रस्तावित है।
यह प्रमख लोग पहुंचे
मानव श्रृंखला में ओपी जोशी, शिवाजी मोहिते, रामेश्वर गुप्ता, दिलीप वाघेला, अजय लागू, अभय जैन, अरविंद पोरवाल, विश्वनाथ कदम, शैला शिंत्रे, संदीप खानवलकर, प्रकाश पाठक, रामस्वरूप मंत्री, प्रणीता दीक्षित, स्वप्निल व्यास, मनीष काले, प्रमोद नामदेव, डॉ सम्यक जैन, शबाना पारेख, चन्द्रशेखर गवली, प्रकाश सोनी, जावेद आलम, आराध्य दीक्षित, आशीष राय, डॉ सृष्टी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। सभी ने प्रशासन से मांग की कि इस प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट को स्थायी रूप से संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए। नागरिकों का स्पष्ट संदेश था "हमें फ्लैट नहीं, हमें ऑक्सीजन चाहिए।"
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यह सिटी फॉरेस्ट केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों पक्षियों, जीव-जंतुओं का घर और शहर की आबोहवा का रक्षक है। नागरिकों का कहना था कि यदि यह वन क्षेत्र नष्ट हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को केवल प्रदूषण और कंक्रीट का जंगल मिलेगा।
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क्या बनेगा यहां
इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर यहां पर फ्लैट बनाकर बेचे जाएंगे। यह जमीन मप्र सरकार के हाउसिंग बोर्ड के पास है। अगले 6 महीने में यहां पर इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर फ्लैटों का निर्माण शुरू करने की योजना प्रस्तावित है।
यह प्रमख लोग पहुंचे
मानव श्रृंखला में ओपी जोशी, शिवाजी मोहिते, रामेश्वर गुप्ता, दिलीप वाघेला, अजय लागू, अभय जैन, अरविंद पोरवाल, विश्वनाथ कदम, शैला शिंत्रे, संदीप खानवलकर, प्रकाश पाठक, रामस्वरूप मंत्री, प्रणीता दीक्षित, स्वप्निल व्यास, मनीष काले, प्रमोद नामदेव, डॉ सम्यक जैन, शबाना पारेख, चन्द्रशेखर गवली, प्रकाश सोनी, जावेद आलम, आराध्य दीक्षित, आशीष राय, डॉ सृष्टी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। सभी ने प्रशासन से मांग की कि इस प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट को स्थायी रूप से संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए। नागरिकों का स्पष्ट संदेश था "हमें फ्लैट नहीं, हमें ऑक्सीजन चाहिए।"
