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Indore News: नशे की लत पर 'महामंथन', इंदौर में जुटेंगे WHO और AIIMS के दिग्गज
Mon, 03 Nov 2025 08:15 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 03 Nov 2025 08:15 PM IST
सार
Indore News: इंदौर 5 से 7 नवम्बर तक 'ऐडिकॉन 2025' की मेजबानी कर रहा है, जो भारतीय मनोचिकित्सा सोसाइटी द्वारा नशे और व्यसन पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। इसमें WHO, AIIMS और NIMHANS के विशेषज्ञ आएंगे।
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पत्रकारों से चर्चा करते डॉ रामगुलाम राजदान (दाएं)
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
भारत में नशे और व्यसन की बढ़ती चुनौती पर अब चिकित्सा जगत गंभीर मंथन करने जा रहा है। इसी कड़ी में, भारतीय मनोचिकित्सा सोसाइटी ने आज ‘ऐडिकॉन 2025’ की घोषणा की है। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 5 से 7 नवम्बर 2025 तक प्राइड होटल एंड कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में आयोजित होगा। इस वर्ष की थीम है- वर्तमान में रणनीतियों, नीतियों और दृष्टिकोण के माध्यम से नशे की बढ़ती समस्या से निपटना। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य नशे और लत जैसी बढ़ती समस्याओं पर गहराई से चर्चा करते हुए, उनके इलाज, रोकथाम और नीतिगत समाधान के नए रास्ते तलाशना है। इस बार का विषय है “नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए क्लिनिकल रणनीतियों, नीतियों और आधुनिक दृष्टिकोण में सुधार।” इस दौरान देश और विदेश के प्रमुख डॉक्टर, मनोचिकित्सक, शोधकर्ता और नीति-निर्माता एक साथ मिलकर नशे से जुड़ी चुनौतियों, उसके इलाज और रोकथाम के बेहतर रास्तों पर चर्चा करेंगे।
नशे के उपचार और रोकथाम पर नया दृष्टिकोण लाना जरूरी
आयोजन समिति के सदस्य अध्यक्ष डॉ रामगुलाम राजदान (अध्यक्ष) सोपान सरदेसाई (सचिव) हरमन सिंह भाटिया (उप सचिव) गर्व जानी (कोषाध्यष), राजवर्धन सिंह भवर (साइंटिफिक कमेटी) ने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि ‘ऐडिकॉन 2025’ का उद्देश्य नशे की समस्या को केवल इलाज तक सीमित न रखकर, समाज, नीति और जागरूकता तीनों स्तरों पर समझना और समाधान खोजना है। आयोजक समिति के डॉ. राम गुलाम राजदान ने कहा, “नशा केवल मेडिकल ट्रीटमेंट का मामला नहीं है, यह सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी का विषय भी है। हमें विज्ञान और संवेदना दोनों के साथ आगे बढ़ना होगा। ‘ऐडिकॉन 2025’ इसी दिशा में एक कदम है, जहां विशेषज्ञ मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान पर विचार करेंगे।”
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देश-विदेश के जाने-माने डॉक्टर होंगे शामिल
अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश के कई प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ बच्चों और किशोरों में नशे की प्रवृत्ति, मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर, और नशे से जुड़ी नीतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। इनमें प्रमुख हैं -
डॉ. सविता मल्होत्रा, (अध्यक्ष – इंडियन साइकाइट्रिक सोसाइटी और पूर्व डीन, पीजीआई चंडीगढ़)
प्रो. जॉन बी. सॉन्डर्स, (विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के नशा उपचार विशेषज्ञ) ऑस्ट्रेलिया
प्रो. अतुल अंबेकर, (मनोचिकित्सा विभाग, एम्स नई दिल्ली)
प्रो. पी.के. दलाल, (पूर्व विभागाध्यक्ष, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ
प्रो. टी.एस.एस. राव, प्रमुख, जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर)
और डॉ. श्याम सुंदर, (एनआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु)
नशे की समस्या का पर्यावरण से गहरा जुड़ाव
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन का आरंभ पंजीकरण और उद्घाटन समारोह के साथ होगा। इसके पश्चात् डॉ. सविता मल्होत्रा “बच्चों और किशोरों में नशे की समस्या एवं पर्यावरणीय प्रभाव” विषय पर उद्घाटन व्याख्यान देंगी। उनके उपरांत प्रो. जॉन बी. सॉन्डर्स, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 50 वर्षों के अनुभव – नशे और एडिक्शन से जुड़ी चुनौतियां” विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।
ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध कितना सही
“प्साइकेडेलिक ड्रग्स: इलाज का साधन या नशे का नया रूप” पर होगा, जिसमें एनआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु के विशेषज्ञ अपने शोध प्रस्तुत करेंगे। दोपहर सत्र में “क्या भारत ने ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाकर सही कदम लिया?” विषय पर एक विचार-विमर्श (बहस) आयोजित होगा। साथ ही विभिन्न संगोष्ठियों में नशे के पर्यावरणीय कारणों, नशामुक्ति नर्सिंग देखभाल, और उपचार में उभरती नई तकनीकों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। पहले दिन का समापन एम्स दिल्ली के डॉ. अश्विनी मिश्रा और डॉ. सिद्धार्थ सरकार द्वारा “रिसर्च पेपर कैसे लिखें” पर आयोजित वर्कशॉप से होगा।
नशे एक सामाजिक और मानसिक समस्या
नशे और व्यसन की समस्या केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रही। यह एक सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में यह सम्मेलन न सिर्फ डॉक्टरों और विशेषज्ञों के बीच संवाद का मंच बनेगा, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ राम गुलाम राजदान ने कहा “हम चाहते हैं कि नशे से जुड़ी बातों को छुपाया न जाए, बल्कि खुले तौर पर इस पर चर्चा हो। इलाज, सहानुभूति और समझ – यही नशे से निपटने का असली रास्ता है।”
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नशे के उपचार और रोकथाम पर नया दृष्टिकोण लाना जरूरी
आयोजन समिति के सदस्य अध्यक्ष डॉ रामगुलाम राजदान (अध्यक्ष) सोपान सरदेसाई (सचिव) हरमन सिंह भाटिया (उप सचिव) गर्व जानी (कोषाध्यष), राजवर्धन सिंह भवर (साइंटिफिक कमेटी) ने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि ‘ऐडिकॉन 2025’ का उद्देश्य नशे की समस्या को केवल इलाज तक सीमित न रखकर, समाज, नीति और जागरूकता तीनों स्तरों पर समझना और समाधान खोजना है। आयोजक समिति के डॉ. राम गुलाम राजदान ने कहा, “नशा केवल मेडिकल ट्रीटमेंट का मामला नहीं है, यह सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी का विषय भी है। हमें विज्ञान और संवेदना दोनों के साथ आगे बढ़ना होगा। ‘ऐडिकॉन 2025’ इसी दिशा में एक कदम है, जहां विशेषज्ञ मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान पर विचार करेंगे।”
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देश-विदेश के जाने-माने डॉक्टर होंगे शामिल
अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश के कई प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ बच्चों और किशोरों में नशे की प्रवृत्ति, मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर, और नशे से जुड़ी नीतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। इनमें प्रमुख हैं -
डॉ. सविता मल्होत्रा, (अध्यक्ष – इंडियन साइकाइट्रिक सोसाइटी और पूर्व डीन, पीजीआई चंडीगढ़)
प्रो. जॉन बी. सॉन्डर्स, (विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के नशा उपचार विशेषज्ञ) ऑस्ट्रेलिया
प्रो. अतुल अंबेकर, (मनोचिकित्सा विभाग, एम्स नई दिल्ली)
प्रो. पी.के. दलाल, (पूर्व विभागाध्यक्ष, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ
प्रो. टी.एस.एस. राव, प्रमुख, जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर)
और डॉ. श्याम सुंदर, (एनआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु)
नशे की समस्या का पर्यावरण से गहरा जुड़ाव
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन का आरंभ पंजीकरण और उद्घाटन समारोह के साथ होगा। इसके पश्चात् डॉ. सविता मल्होत्रा “बच्चों और किशोरों में नशे की समस्या एवं पर्यावरणीय प्रभाव” विषय पर उद्घाटन व्याख्यान देंगी। उनके उपरांत प्रो. जॉन बी. सॉन्डर्स, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 50 वर्षों के अनुभव – नशे और एडिक्शन से जुड़ी चुनौतियां” विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।
ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध कितना सही
“प्साइकेडेलिक ड्रग्स: इलाज का साधन या नशे का नया रूप” पर होगा, जिसमें एनआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु के विशेषज्ञ अपने शोध प्रस्तुत करेंगे। दोपहर सत्र में “क्या भारत ने ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाकर सही कदम लिया?” विषय पर एक विचार-विमर्श (बहस) आयोजित होगा। साथ ही विभिन्न संगोष्ठियों में नशे के पर्यावरणीय कारणों, नशामुक्ति नर्सिंग देखभाल, और उपचार में उभरती नई तकनीकों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। पहले दिन का समापन एम्स दिल्ली के डॉ. अश्विनी मिश्रा और डॉ. सिद्धार्थ सरकार द्वारा “रिसर्च पेपर कैसे लिखें” पर आयोजित वर्कशॉप से होगा।
नशे एक सामाजिक और मानसिक समस्या
नशे और व्यसन की समस्या केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रही। यह एक सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में यह सम्मेलन न सिर्फ डॉक्टरों और विशेषज्ञों के बीच संवाद का मंच बनेगा, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ राम गुलाम राजदान ने कहा “हम चाहते हैं कि नशे से जुड़ी बातों को छुपाया न जाए, बल्कि खुले तौर पर इस पर चर्चा हो। इलाज, सहानुभूति और समझ – यही नशे से निपटने का असली रास्ता है।”
