{"_id":"643fe989e673594c6c0ef415","slug":"four-hundred-crores-were-spent-in-ten-years-yet-rivers-could-not-become-drains-then-preparations-to-spend-fi-2023-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore News: 10 साल में 350 करोड़ खर्च, नाले नहीं बन सके नदी, फिर 500 करोड़ खर्च करने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore News: 10 साल में 350 करोड़ खर्च, नाले नहीं बन सके नदी, फिर 500 करोड़ खर्च करने की तैयारी
Wed, 19 Apr 2023 06:46 PM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Wed, 19 Apr 2023 06:46 PM IST
सार
नाला टेपिंग के लिए जो लाइन शहर में बिछाई गई। उनमें से पिछले साल कुछ जगहों पर पाइप फोड़कर नालों में पानी बहाया गया था। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि वे जगह पहले से चिनि्हत है और वहां सुधार किया जा रहा है।
विज्ञापन
इस तरह रहती है नालों में गंदगी।
- फोटो : amar ujala digital
विस्तार
इंदौर की नाला बन चुकी नदियों को सीवरेज से मुक्त कराने के लिए बीते 10 सालों में 350 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन नाले नदियों में नहीं बदल सके। अब फिर 500 करोड़ रुपये इंदौर नगर निगम खर्च करने की तैयारी कर रहा है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए जो 511 करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है। उससे तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे।
विज्ञापन
इंदौर की बसाहट सैकड़ों वर्ष पहले कान्ह नदी के आसपास हुई थी। उसके आसपास बस्तियां बसीं और बाद में नदी गंदगी ढोते-ढोते नाला बन गई। कान्ह नदी में गंदा पानी न बहे, इसलिए जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत 12 साल पहले 200 करोड़ रुपये में शहर में सीवरेज लाइन बिछाई गई। इसके बाद सिंंहस्थ के पहले सरकार ने 150 करोड़ रुपये कान्ह नदी के किनारों पर नाला टैपिंग की लाइन बिछाने के लिए मंजूर किए। पिछले साल नाला टैपिंग के बाद शहर को वाटर प्लस में सेवन स्टार रेटिंग भी मिल गई, लेकिन अभी भी नदी में गंदा पानी मिल रहा है।
विज्ञापन
बारिश में तोड़ना पड़े थे पाइप
नाला टैपिंग के लिए जो लाइन शहर में बिछाई गई, उनमें से पिछले साल कुछ जगहों पर पाइप फोड़कर नालों में पानी बहाया गया था। अब मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि वे जगह पहले से चिन्हित हैं और वहां सुधार किया जा रहा है। 25 करोड़ की लागत से चाणक्यपुरी से राजमोहल्ला तक सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा 511 करोड़ रुपये की लागत से कबीटखेड़ी, कनाडिया और लक्ष्मीबाई प्रतिमा के समीप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे, ताकि कान्ह नदी में सीवरेज न मिले।
विज्ञापन
कान्ह नदी मिलती है शिप्रा में
दो माह पहले नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत करीब 1200 करोड रुपये की विभिन्न परियोजनाएं देशभर में स्वीकृत हुई हैं। इसमें से सर्वाधिक राशि इंदौर को मिली है। इंदौर के बीच से कान्ह एवं सरस्वती नदियां बहती हैं। ये शिप्रा की सहायक नदी है। शिप्रा नदी चंबल में मिलती है। चंबल नदी गंगा की सहायक नदी है। शिप्रा सबसे ज्यादा कान्ह नदी के कारण प्रदूषित होती है, इसलिए उसके शुदि्धकरण के लिए 511 करोड़ रुपये इंदौर को मिले हैं।
