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डिंडौरी: 300 की आबादी भगवान भरोसे, पुल के इंतजार में कलंगी टोला,गर्भवती को चादर की डोली में लादकर पार कराई नदी

Mon, 26 Oct 2026 01:10 PM IST
डिंडोरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिंडौरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिंडौरी Published by: डिंडोरी ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2026 01:10 PM IST
सार

जिले के कलंगी टोला में सिलगी नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। हाल ही में प्रसव के लिए अस्पताल जा रही गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने चादर की डोली में बैठाकर करीब 100 मीटर चौड़ी नदी पार कराई।

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Dindori: No Bridge Over River; Villagers Carry Pregnant Woman Across in a Cloth Palanquin
चादर की डोली बनाकर गर्भवती को पार कराई नदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विकास के तमाम दावों के बीच डिंडौरी जिले के एक गांव की तस्वीर आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर रही है। शहपुरा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाकर बघर्रा के कलंगी टोला में सिलगी नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आज भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। हालात ऐसे हैं कि किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना हो या किसी बीमार व्यक्ति को उपचार के लिए ले जाना हो, ग्रामीणों को कंधों पर उठाकर नदी पार कराने का सहारा लेना पड़ता है।

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हाल ही में एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने की नौबत आई तो ग्रामीणों ने चादर की डोली बनाई और उसे कंधों पर उठाकर करीब 100 मीटर चौड़ी सिलगी नदी पार कराई। नदी पार कराने के बाद महिला को शहपुरा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका सुरक्षित प्रसव हुआ। राहत की बात यह रही कि महिला और उसके परिवार को अस्पताल तक पहुंचाने में ग्रामीण सफल रहे लेकिन इस घटना ने गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
कलंगी टोला की आबादी करीब 300 बताई जाती है। गांव के लोगों के लिए सिलगी नदी पार करना रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौती बन गया है। खासकर बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन और मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में अस्पताल पहुंचना, जरूरी सामान लाना और अन्य कामों के लिए गांव से बाहर निकलना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा साबित होता है।
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सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और बुजुर्गों को होती है। आपात स्थिति में समय पर वाहन या एंबुलेंस की सुविधा तक पहुंचना भी कठिन हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों को मरीज को कंधों पर उठाकर नदी पार कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंचने से जुड़ा गंभीर मामला भी है।


लंबे समय से पुल की मांग
ग्रामीणों के अनुसार सिलगी नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। पुल बनने से कलंगी टोला के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान हो सकेगा। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

करीब 300 लोगों की आबादी वाले गांव के लिए नदी पर पुल महज एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन और जरूरी सुविधाओं तक पहुंच का रास्ता है। गर्भवती महिला को चादर की डोली में बैठाकर नदी पार कराने की घटना बताती है कि दुर्गम परिस्थितियों में ग्रामीणों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और प्रशासन गांव की समस्या का गंभीरता से आकलन करें तथा पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल करें। 

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