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Damoh: वन कर्मियों का फर्जीवाड़ा, जेसीबी, हार्वेस्टर के मालिक को नवीन तालाब निर्माण में बना दिया मजदूर
Sat, 23 Dec 2023 12:57 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 23 Dec 2023 12:57 PM IST
सार
Damoh: दमोह जिले के वन परिक्षेत्र तेंदूखेड़ा की तिपनी वीट में मनरेगा से हो रहे नवीन तालाब निर्माण में वनकर्मियों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां अधिकारियों ने कागजों में उन लोगों को मजदूर बना दिया, जिन लोगों के पास लाखों रुपये की कीमत के जेसीबी और हाइवा, हार्वेस्टर वाहन है। कुछ लोग 30 एकड़ के किसान भी हैं।
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वन कर्मियों का फर्जीवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अधिकारियों ने इतने बड़े स्तर पर इस तालाब निर्माण में हेराफेरी कर डाली कि वे यह भी भूल गए उनकी यह हेराफेरी कभी भी पकड़ी जाएगी। पूरे मामले की जानकारी ली तो पता चला की जिन लोगों को वन विभाग ने कागजों पर मजदूर बना दिया है, हकीकत में वह कभी उस जगह पर गये ही नहीं और न उनको तालाब निर्माण की जगह का पता है। सबसे बड़ी बात उनको ये भी पता नहीं कि वह मजदूर कैसे बन गये, जबकि स्थानीय ग्रामीण रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं।
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इनको बनाया मजदूर
तिपनी के नवीन तालाब निर्माण में जिन लोगों को मजदूर दर्शाया गया है, वह हकीकत में मालगुजार और बड़े जमींदार हैं। जब मामले की छानबीन की गई तो यहां काम पर लगे मजदूरों में कोई 20 से 30 एकड़ जमीन का मालिक निकला, तो कोई जेसीबी, हार्वेस्टर का मालिक है तो कोई मोबाइल की दुकान का संचालन कर रहा है।
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इतना ही नहीं किसी के पास टायर, ट्यूब की दुकान है तो कुछ किसान साथ ही अन्य जो मजदूर हैं वह अपने गांव में रहते हैं जो कभी तिपनी में काम करने भी नहीं गये। उसके बाद भी उनको कागजों में मजदूर बनाया गया है। कुछ ऐसे भी मजदूर है जो कुछ महीनों से दूसरी जगह निवास कर रहे हैं और नियमित वह कार्य कर रहे हैं उनके नाम पर भी तिपनी के नवीन तालाब निर्माण में मजदूरी करना बताया गया है।
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ये बोले कागजी मजदूर
नवीन तालाब निर्माण में सहजपुर निवासी सानू तिवारी को मजदूर बनाया गया है जबकि सानू तिवारी को इसकी जानकारी ही नहीं है। उनसे तिपनी के आरएफ 187 में निर्माण होने वाले तालाब में कार्य करने को लेकर बात की तो उन्होंने बताया कि उनको आज पता चला है कि वह मजदूर बने हैं, लेकिन हकीकत में न मैं कभी तिपनी गया न मैने कभी मजदूरी की है। इसी तरह पांजी गांव के कई महिला, पुरुष युवकों को मजदूर बनाया गया है। जब उनसे बात की तो उन्होंने बताया वह कभी मजदूरी पर नहीं गये हैं। उनके घर में खुद कई लोग कार्य करते हैं, क्योंकि जेसीबी, हाइवा, हार्वेस्टर सहित कई ट्रैक्टर उनके घर पर हैं वह कैसे मजदूर बन गये इसकी उनको कोई जानकारी नहीं है।
ऐसे करते हैं वनकर्मी खेल
मनरेगा से वन विभाग के कर्मचारी जिले से निर्माण कार्य तो मंजूर करा लेते हैं, मगर उनके पास मजदूर नहीं होते। इसलिये जिन लोगों को ग्राम पंचायत से किसी योजना का लाभ मिलता है तो उस योजना के बाद उस परिवार का जॉबकार्ड बन जाता है और उसका फायदा वनकर्मी उठा लेते हैं। कार्य मशीनों से कराने के बाद उनके जॉबकार्ड लेकर उनकी डिमांड डालकर उनको कागजों में मजदूर बना लेते हैं और बाद में सांठगांठ करके उसके खातों से राशि निकाल लेते हैं। कहीं-कहीं तो मजदूरों को पता भी नही चलता और आई हुई राशि निकल जाती है। इसमें उसका पूरा सहयोग क्योंस्क बैंक संचालक करते हैं और यही खेल वनकर्मियों ने तिपनी गांव में खेला है।
रेंजर करती हैं आईडी से वेरीफाई
मनरेगा योजना से यदि कोई निर्माण कार्य ग्राम पंचायत में होता है और उस पर लापरवाही होती है तो उसके भुगतान पर जनपद सीईओ रोक लगा सकते हैं। क्योंकि भुगतान करता सीईओ है, लेकिन वन विभाग की अलग आईडी होने के कारण उसके भुगतान उपवनमंडल अधिकारी की अनुसंसा मिलने के बाद रेंजर की आईडी से वेरीफाई किये जाते हैं। इसलिये पंचायतों की अपेक्षा वन विभाग कागजों पर लगे मजदूरों के मस्टर डाल लेते हैं क्योंकि इनका मूल्यांकन रेंजर द्वारा किया जाता है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने मजदूरों की जगह जेसीबी से निर्माण होने वाले नवीन तालाब की शिकायत के बाद वन विभाग से रिकार्ड मांगने पत्र भेजा है, लेकिन वनकर्मियों ने रिकार्ड नहीं भेजा है इसकी पुष्टि जनपद सीईओ मनीष बागरी द्वारा की गई है।
हम मंगवाते हैं रिकार्ड
वहीं इस मामले में सागर सीसीएफ एके सिंह को जब इस लापरवाही से अवगत कराया तो उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है, वह इस निर्माण कार्य का रिकार्ड दिखवाते हैं और जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
