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MPPCS: किराना दुकानदार की बेटी सहायक संचालक, स्टेशनरी दुकानदार की बेटी भी बनीं अफसर; दमोह में हर तरफ चर्चा
Mon, 20 Jan 2025 03:15 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jan 2025 03:15 PM IST
सार
Damoh: एमपीपीएससी परीक्षा में दमोह की बेटियों ने बाजी मारी है। अपने पिता के साथ उनके कारोबार में हाथ बटाने वाली बेटियों ने अधिकारी बनकर परिवार के साथ जिले का नाम रोशन किया है। इन बेटियों का कहना है कि लगातार अभ्यास, कड़ी मेहनत व धैर्य से सफलता जरूर मिलती है।
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सफल उम्मीदवार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एमपीपीएससी परीक्षा में दमोह की बेटियों ने बाजी मारी है। अपने पिता के साथ उनके कारोबार में हाथ बटाने वाली बेटियों ने इस परीक्षा में सफल होकर अधिकारी बनकर परिवार के साथ जिले का नाम रोशन किया है। इन बेटियों का कहना है कि लगातार अभ्यास, कड़ी मेहनत व धैर्य से सफलता जरूर मिलती है। दोनों बेटियों ने जो लक्ष्य बनाया था, उसे चौथे प्रयास में पूरा किया है। हालांकि दोनों का लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना है। जिसके लिए वह नौकरी के साथ-साथ आगे भी अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पढ़ाई जारी रखेंगी। शनिवार की देर शाम जब एमपीपीएसी परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ तो इन बेटियों से ज्यादा खुशी उनके परिजनों व पड़ोसियों को हुई।
किराना दुकानदार की बेटी बनेगी सहायक संचालक
शहर से सटे चौपराखुर्द जबलपुर नाका निवासी स्वाति दुबे का चयन सहायक संचालक शिक्षा में हुआ है। उनके पिता धर्मेंद्र दुबे किराना की दुकान चलाते हैं। मां रिचा गृहिणी हैं। स्वाति ने 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से बीएएसी की, जिसमें गोल्ड मेडल मिला। इसके बाद घर पर रहकर ही पीएससी की तैयारी की। स्वाति ने बताया कि उन्हें यह सफलता चौथे प्रयास में मिली है।
लगातार तीन बार से प्री-एक्जाम में नाम नहीं आ रहा था, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और पहले जो कमियां थीं, उसे दूर किया। इसके बाद चौथे प्रयास में प्री, मेंस और इंटरव्यू में पास हुई। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनने का है। इसलिए नौकरी के साथ-साथ डिप्टी कलेक्टर के लिए भी तैयारी जारी रखेंगीं। अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बड़े पिता डॉ. राघवेंद्र दुबे, चाचा जितेंद्र, नीरज को दिया है।
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स्टेशनरी दुकानदार की बेटी बनी आबकारी निरीक्षक
तीर्थ नगरी बांदकपुर निवासी काजल नेमा का चयन आबकारी उप निरीक्षक के पद पर हुआ है। उनके पिता रामप्रकाश नेमा स्टेशनरी दुकान चलाते हैं। मां संध्या गृहिणी हैं। काजल ने आठवीं तक की पढ़ाई बांदकपुर में की। इसके बाद अपनी नानी के घर नरसिंहपुर में उत्कृष्ट विद्यालय में 12वीं की। काजल ने बताया कि वह पिछले तीन बार से प्री व मेन्स तो निकाल रहीं हैं, लेकिन हर बार इंटरव्यू में नहीं निकल पा रही थीं, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं छोड़ा। माता-पिता और सहपाठियों ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जिसके चलते वह लगातार मेहनत करती रहीं। उन्होंने बताया कि वह आगे जाकर डिप्टी कलेक्टर बनना चाहती हैं। तैयारी कर रहे प्रतिभागियों से कहना चाहती हूं जो लक्ष्य तय किया है, उसके प्रति पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत करें और धैर्य बनाए रखें, एक दिन सफलता निश्चित ही मिलती है।
शुभम वर्मा का सहायक आयुक्त में चयन
शहर के सिविल वार्ड 6 विवेकानंद नगर निवासी शुभम वर्मा का चयन सहायक आयुक्त स्कूल शिक्षा विभाग में हुआ है। शुभम पूर्व शासकीय अधिवक्ता केके वर्मा के भतीजे हैं। शिवम ने बताया कि कड़ी मेहनत व लगन से सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों को दिया है।
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किराना दुकानदार की बेटी बनेगी सहायक संचालक
शहर से सटे चौपराखुर्द जबलपुर नाका निवासी स्वाति दुबे का चयन सहायक संचालक शिक्षा में हुआ है। उनके पिता धर्मेंद्र दुबे किराना की दुकान चलाते हैं। मां रिचा गृहिणी हैं। स्वाति ने 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से बीएएसी की, जिसमें गोल्ड मेडल मिला। इसके बाद घर पर रहकर ही पीएससी की तैयारी की। स्वाति ने बताया कि उन्हें यह सफलता चौथे प्रयास में मिली है।
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लगातार तीन बार से प्री-एक्जाम में नाम नहीं आ रहा था, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और पहले जो कमियां थीं, उसे दूर किया। इसके बाद चौथे प्रयास में प्री, मेंस और इंटरव्यू में पास हुई। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनने का है। इसलिए नौकरी के साथ-साथ डिप्टी कलेक्टर के लिए भी तैयारी जारी रखेंगीं। अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बड़े पिता डॉ. राघवेंद्र दुबे, चाचा जितेंद्र, नीरज को दिया है।
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स्टेशनरी दुकानदार की बेटी बनी आबकारी निरीक्षक
तीर्थ नगरी बांदकपुर निवासी काजल नेमा का चयन आबकारी उप निरीक्षक के पद पर हुआ है। उनके पिता रामप्रकाश नेमा स्टेशनरी दुकान चलाते हैं। मां संध्या गृहिणी हैं। काजल ने आठवीं तक की पढ़ाई बांदकपुर में की। इसके बाद अपनी नानी के घर नरसिंहपुर में उत्कृष्ट विद्यालय में 12वीं की। काजल ने बताया कि वह पिछले तीन बार से प्री व मेन्स तो निकाल रहीं हैं, लेकिन हर बार इंटरव्यू में नहीं निकल पा रही थीं, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं छोड़ा। माता-पिता और सहपाठियों ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जिसके चलते वह लगातार मेहनत करती रहीं। उन्होंने बताया कि वह आगे जाकर डिप्टी कलेक्टर बनना चाहती हैं। तैयारी कर रहे प्रतिभागियों से कहना चाहती हूं जो लक्ष्य तय किया है, उसके प्रति पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत करें और धैर्य बनाए रखें, एक दिन सफलता निश्चित ही मिलती है।
शुभम वर्मा का सहायक आयुक्त में चयन
शहर के सिविल वार्ड 6 विवेकानंद नगर निवासी शुभम वर्मा का चयन सहायक आयुक्त स्कूल शिक्षा विभाग में हुआ है। शुभम पूर्व शासकीय अधिवक्ता केके वर्मा के भतीजे हैं। शिवम ने बताया कि कड़ी मेहनत व लगन से सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों को दिया है।
