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राम भरोसे शिक्षा: स्टूडेंट्स के बैठने और पढ़ाई सहित अन्य सुविधाओं में कमी, PM श्री कन्या हाईस्कूल का मामला

Tue, 10 Dec 2024 08:22 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 10 Dec 2024 08:22 PM IST
सार

बकस्वाहा में पीएम श्री कन्या हाईस्कूल की छात्राओं को भवन की समस्या से जूझना पड़ रहा है। बता दें कि 1080 छात्राओं के लिए महज 19 कमरे उपलब्ध हैं।

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Lack of facilities for girl students in PM Shri Kanya High School in Bakswaha Chhatarpur
स्कूल की छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छतरपुर जिले के बकस्वाहा में पीएम श्री कन्या हाईस्कूल में 1080 छात्राओं के लिए पर्याप्त भवन की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। यह स्कूल कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए है। लेकिन छात्रों के बैठने और पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि विद्यालय में पढ़ाई में लगातार विघ्न उत्पन्न हो रहे हैं। यहां विद्यालय में कुल छह से 12वीं तक सात कक्षाओं के लिए 22 सेक्शन बनाए गए हैं।

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विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं की संख्या इस प्रकार है
कक्षा छह: 122 छात्राएं (तीन सेक्शन)
कक्षा सात: 133 छात्राएं (तीन सेक्शन)
कक्षा आठ: 152 छात्राएं (तीन सेक्शन)
कक्षा नौ: 185 छात्राएं (तीन सेक्शन)
कक्षा 10: 187 छात्राएं (दो सेक्शन)
कक्षा 11: 128 छात्राएं (चार सेक्शन)
कक्षा 12: 173 छात्राएं (चार सेक्शन)

इस प्रकार, कुल 1080 छात्राएं विद्यालय में अध्ययनरत हैं। लेकिन कक्षाओं के संचालन के लिए विद्यालय में कुल 26 कमरे हैं, जिनमें से सात कमरे जर्जर हो चुके हैं और उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके चलते केवल 19 कमरे ही पढ़ाई के लिए उपलब्ध हैं, जो कि इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के लिए अपर्याप्त हैं।
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यह विद्यालय 100 साल पुरानी बिल्डिंग में स्थित है और इसके अधिकांश कमरे अब जर्जर हो चुके हैं। बारिश के मौसम में भवनों के गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे छात्राओं और शिक्षकों की जान का खतरा है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए बकस्वाहा के तहसीलदार भरत पांडे ने विद्यालय का निरीक्षण किया और 26 में से सात कमरों को क्षतिग्रस्त घोषित करते हुए इन कमरों में कक्षाएं चलाने पर रोक लगा दी। इसके बाद, विद्यालय में केवल 19 कमरे ही कक्षाओं के संचालन के लिए रह गए हैं।प्रधानमंत्री श्री योजना के तहत विद्यालय को शामिल किया गया, लेकिन यहां अब तक कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। स्कूल में उचित कमरे, प्रयोगशाला, व्यावसायिक शिक्षा कक्ष और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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कक्षा संचालन के लिए छह से 12वीं तक के 22 सेक्शन वाले कक्षाओं के लिए कम से कम तीन अतिरिक्त कमरे चाहिए। 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए एकीकृत प्रयोगशाला की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल एक प्रयोगशाला काम कर रही है। हेल्थ केयर और ब्यूटी एंड वेलनेस जैसे दो व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनके लिए दो अतिरिक्त कमरे चाहिए। कक्षा छह से आठ तक की 407 छात्राओं के लिए एक बड़े हॉल की जरूरत है, ताकि वे एक साथ बैठकर भोजन कर सकें। एक व्यवस्थित ICT कंप्यूटर लैब की आवश्यकता है, ताकि सभी छात्राओं को कंप्यूटर शिक्षा मिल सके।

अब यह सवाल उठता है कि 1080 छात्राओं के लिए इस गंभीर समस्या का समाधान कब होगा? विद्यालय की नई बिल्डिंग के लिए फंड कब मिलेगा, इस पर सबकी नजरें हैं। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो छात्राओं का भविष्य अंधेरे में हो सकता है।

स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं
तहसीलदार भरत पांडे ने कहा कि स्कूल की बिल्डिंग का निरीक्षण किया गया था और जर्जर कमरे देखकर उन्हें कक्षाएं चलाने से रोक दिया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में प्रतिवेदन भेजा गया है।

विद्यालय के प्राचार्य अरविंद तिवारी ने कहा कि उन्होंने भवन की कमी का प्रस्ताव बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है। जब तक नई बिल्डिंग की स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक इस पुराने भवन में कक्षाओं का संचालन करना पड़ेगा। वर्तमान विधायक राम सिया भारती ने कहा कि वे मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर भवन की कमी को लेकर सदन में भी यह मुद्दा उठाएंगे और भवन की व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।


नगर पलिका अध्यक्ष किरण सोनी ने कहा कि जब साइकिल वितरण कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने भवन की कमी का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने कलेक्टर से मिलने का निर्णय लिया। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। किरण सोनी ने कहा कि नगर परिषद भवन के मुद्दे पर हर संभव मदद करेगी। पीएम श्री कन्या हाईस्कूल, वकस्वाहा की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। 1080 छात्राओं के लिए मात्र 19 कमरे और स्कूल के जर्जर भवन की स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। यदि इस मामले में समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इन छात्राओं का भविष्य अंधेरे में पड़ सकता है।

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