फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Chhatarpur News ›   Birth of a child without head and hands and feet in Chhatarpur

MP News: छतरपुर में बिना सिर और हाथ पैर वाले बच्चे का जन्म, डॉक्टरों ने सशर्त परिजनों को सौंपा नवजात

Wed, 28 Dec 2022 03:20 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 28 Dec 2022 03:20 PM IST
सार

छतरपुर जिला अस्पताल में सोमवार को दो जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ। जिनमें एक बच्ची स्वस्थ है,लेकिन दूसरा बच्चा अविकसित पैदा हुआ है। अविकसित बच्चे के पैर और सिर नहीं हैं, उसकी हार्ट बीट भी नहीं चल रही थी।

विज्ञापन
Birth of a child without head and hands and feet in Chhatarpur
छतरपुर जिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छतरपुर में दो जुड़वा बच्चे होने का मामला सामने आया है, जिनमें से एक बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा तो वहीं दूसरा बच्चा एबनॉर्मल पैदा हुआ है, जिसका पूरी तरह विकास नहीं हो पाया। उसका सिर और हाथ नहीं है। उसका धड़ और पैर भी अविकसित हैं। इस तरह का बच्चा पैदा होने की खबर से जिला अस्पताल में हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं लोगों में कौतुहल का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार मामला छतरपुर जिला अस्पताल का है। जिले के लवकुश नगर थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह 9:55 पर 25 वर्षीय कल्पना यादव (पति- ब्रजेन्द्र यादव) जिला अस्पताल रेफर होकर डिलेवरी के लिए आईं, जिसने 9:55 पर ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, तो वहीं 1 घंटे बाद तकरीबन 11 बजे दूसरे एबनार्मल बच्चे को जन्म दिया है। जो कि अस्पताल में चर्चा का विषय बना हुआ है। 
विज्ञापन


विज्ञापन


प्रसूता वार्ड की महिला डॉक्टर  ने बताया कि दो जुड़वा बच्चे फीमेल ही हैं जिनमें से एक जो बच्ची पहले हुई वह नार्मल और स्वस्थ है तो वहीं दूसरी बच्ची अविकसित अधूरी और मृत अवस्था में हैं। मामले में चाईल्ड स्पेशलिस्ट डॉ.ऋषि द्विवेदी का कहना है कि हाल ही में जिला अस्पताल में दो ट्विंस बेबी पैदा हुए हैं, जिनमें से एक बच्चा अच्छा है तो दूसरे की ग्रोथ नहीं होने से वह एबनॉर्मल पैदा हुआ है। ये मल्टीपल केन्जाइटल डिफार्टमिटी है। उसके पैर प्रॉपर नहीं है ब्रेन/सिर नहीं हैं हाथ नहीं है। इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं प्रॉपर रीजन हैं प्रॉपर न्यूटिशियन कि कमी होना, उनका नहीं पहुंच पाना होता है। बच्चा जीवित नहीं है पेट के अंदर भी जीवित नहीं था। उसके विकसित होने का कारण उसमें प्रॉपर सप्लाई न होना था, जिससे वह बढ़ तो गया पर सिर्फ मांस के टुकड़े की तरह उसके अंदर बाहर के आर्गन विकसित नहीं हो सके, उसके अंदर हार्टबीट नहीं चल रही थी, जिससे पता चलता है कि उसके हार्ट नहीं था। बाकी की जानकारी जांच और PM के बाद ही पता चल सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि परिजनों को बच्चा समझाइश देकर दिया जाएगा, कि वे कहीं पुरानी विचारधारा और रूढ़िवादिता के चलते घर ले जाकर उसका पूजा-पाठ ना करने लगें। दरअसल अक्सर ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में लोग इस तरह के बच्चे पैदा होने पर ईश्वरीय और दैवीय चमत्कार मानकर आडंबर करने लगते हैं, जिससे उन्हें समझाइश दी जाएगी कि यह कोई चमत्कार नहीं है। यह तो केन्जाइटल डिफर्टलीज है जो कि प्रॉपर न्यूट्रिशन और सारी चीजों की वजह से अविकसित ही रहा और अब समय पूरा होने पर ट्विन्स की तरह बच्चे के साथ निकला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed