West Asia Live: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की बीच वार्ता जारी, जेडी वेंस बोले- बातचीत में हो रही प्रगति
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ईरान की छह अरब डॉलर की राशि वापस की जाएगी- पेजेशकियन
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए हुए प्रारंभिक समझौते के तहत कतर में फंसी ईरान की छह अरब डॉलर की राशि वापस की जाएगी। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू हो गई है, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हो रही है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान के सहयोग और समझौते की शर्तों के पालन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधित धनराशि जारी की जा सकती है।
जेडी वेंस बोले- बातचीत में हो रही प्रगति
वेंस ने कहा कि इस वार्ता का उद्देश्य बहुत सरल है। कूटनीति और आपसी सहयोग के जरिए पश्चिम एशिया को बदलना, जहां ईरान और खाड़ी देशों के बीच लंबे समय से तनाव और टकराव रहा है। अब एक ऐसा भविष्य दिखाई दे रहा है, जहां सभी देश मिलकर शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि केवल कुछ घंटों की बातचीत में ही काफी प्रगति हुई है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले घंटों में और भी सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।#WATCH | Lucerne, Switzerland: US Vice President JD Vance says, "First of all, I want to thank the President United States. He has empowered us to find a diplomatic resolution to a host of issues that matter to the American people, but I think the world. The opening of the Strait… pic.twitter.com/hjiUt3PT9v
— ANI (@ANI) June 21, 2026
शहबाज, मुनीर से मिला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल तकनीकी स्तर की वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं। 17 जून को हुए 14 सूत्रीय समझौते के आधार पर बातचीत हो रही है, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। वार्ता का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।