Shardiya Navratri 2025: शुरू हुए शारदीय नवरात्रि, जानें पूजा विधि और कलश स्थापना का मुहूर्त
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Mon, 22 Sep 2025 04:05 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Mon, 22 Sep 2025 04:05 PM IST
खास बातें
Shardiya Navratri 2025 Puja Vidhi, Shubh Muhurat in Hindi: आश्विन मास की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि शुरू होते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर सोमवार से शुरू हो रहे हैं। इस वर्ष देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो सुख-समृद्धि, राष्ट्र उन्नति और कल्याण का प्रतीक है। इसके अलावा इस तिथि पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और हस्त नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में आइए इस दिन के महत्व और पूजा विधि को जानते हैं।
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शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
04:01 PM, 22-Sep-2025
नवरात्रि के पहले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
घर को गंदा न रखें
मां दुर्गा को स्वच्छता बेहद प्रिय है। पहले दिन ही यदि घर में गंदगी रहती है तो इसे अपवित्र माना जाता है। घर में धूप-दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें। साथ ही शरीर और मन को भी स्वच्छ रखें। नवरात्रि में स्नान जरूर करें।
व्रत के दौरान गुस्सा और कटु वचन न बोलें
नवरात्रि में साधक को आचरण से भी सात्विकता दिखानी चाहिए। गुस्सा करना, झगड़ा करना या अपशब्द बोलना व्रत की पवित्रता को कम कर देता है। पहले दिन से ही संयम और शांति का पालन करें।
मां दुर्गा को स्वच्छता बेहद प्रिय है। पहले दिन ही यदि घर में गंदगी रहती है तो इसे अपवित्र माना जाता है। घर में धूप-दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें। साथ ही शरीर और मन को भी स्वच्छ रखें। नवरात्रि में स्नान जरूर करें।
व्रत के दौरान गुस्सा और कटु वचन न बोलें
नवरात्रि में साधक को आचरण से भी सात्विकता दिखानी चाहिए। गुस्सा करना, झगड़ा करना या अपशब्द बोलना व्रत की पवित्रता को कम कर देता है। पहले दिन से ही संयम और शांति का पालन करें।
03:41 PM, 22-Sep-2025
नवरात्रि के पहले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
कलश स्थापना में लापरवाही न करें
पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। कई बार लोग जल्दबाज़ी में बिना दिशा और नियम का ध्यान रखे कलश स्थापित कर देते हैं। कलश को उत्तर-पूर्व दिशा में और साफ जगह पर ही रखें।
लहसुन-प्याज का सेवन भूलकर भी न करें
नवरात्रि के दौरान सात्विकता का पालन जरूरी है। पहले दिन ही लहसुन, प्याज, मांसाहार या मदिरा का सेवन अशुभ माना जाता है। इससे व्रत की पवित्रता भंग हो जाती है और साधक को माता की पूर्ण कृपा नहीं मिलती।
पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। कई बार लोग जल्दबाज़ी में बिना दिशा और नियम का ध्यान रखे कलश स्थापित कर देते हैं। कलश को उत्तर-पूर्व दिशा में और साफ जगह पर ही रखें।
लहसुन-प्याज का सेवन भूलकर भी न करें
नवरात्रि के दौरान सात्विकता का पालन जरूरी है। पहले दिन ही लहसुन, प्याज, मांसाहार या मदिरा का सेवन अशुभ माना जाता है। इससे व्रत की पवित्रता भंग हो जाती है और साधक को माता की पूर्ण कृपा नहीं मिलती।
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03:22 PM, 22-Sep-2025
इन मंत्रों का करें जाप
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करने से वे जल्दी प्रसन्न होती हैं और जीवन में स्थिरता व दृढ़ता का आशीर्वाद देती हैं।
बीज मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों के साथ अपनी पूजा संपन्न कर देवी से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
बीज मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों के साथ अपनी पूजा संपन्न कर देवी से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
03:12 PM, 22-Sep-2025
सरल और संपूर्ण पूजाविधि Navratri 2025 Puja Vidhi
सबसे पहले प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें और उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत व आम के पत्ते डालें। अंत में एक नारियल पर चुनरी लपेटकर उसे कलश के ऊपर रख दें।
02:57 PM, 22-Sep-2025
नवरात्रि में भोजन के नियम
- व्रत रखने वाले भक्तों को अनाज, नमक और तैलीय पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इसके स्थान पर फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक का सेवन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- दिनभर फलाहार कर रात में एक बार भोजन करने का विधान है। कई श्रद्धालु अष्टमी या नवमी तक निर्जल उपवास भी करते हैं, लेकिन यह तभी उचित है जब स्वास्थ्य इसकी अनुमति दे।
- व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध, आलस्य, नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
- इस समय तामसिक भोजन, मादक पदार्थ और मांसाहार से पूर्णत: बचना चाहिए।
- व्रत के दौरान घर में शुद्ध और सात्त्विक वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
02:40 PM, 22-Sep-2025
शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : अमर उजाला
संकटों को मां करती हैं दूर,
मां की ये छवि निराली
नवरात्रि में आपके घर लाए खुशहाली।।
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
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02:19 PM, 22-Sep-2025
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
माता दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की कथा बहुत रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष ने एक बार अपने राज महल में यज्ञ का आयोजन करवाया था। राजा दक्ष का अपने दामाद भगवान शिव से बहुत ज्यादा मतभेद था जिसके कारण वह भगवान शिव से गुस्सा रहते थे। राजा दक्ष ने सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव जी का अपनान करने के लिए उनको यज्ञ में नहीं बुलाया। जब यह बात माता पार्तती को पता चली तो वह अपने पिता के द्वारा करवाए गए यज्ञ में शामिल होना चाहती थी। शिवजी के कई बार मना करने के बाद भी माता पार्वती नहीं मानी और अकेले अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं। वहां पर अपने पति का का पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान देख सती ने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ को तहस नहस कर दिया और सती के शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 अंग विभक्त किए, जो शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद सती ने हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया।
माता दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की कथा बहुत रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष ने एक बार अपने राज महल में यज्ञ का आयोजन करवाया था। राजा दक्ष का अपने दामाद भगवान शिव से बहुत ज्यादा मतभेद था जिसके कारण वह भगवान शिव से गुस्सा रहते थे। राजा दक्ष ने सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव जी का अपनान करने के लिए उनको यज्ञ में नहीं बुलाया। जब यह बात माता पार्तती को पता चली तो वह अपने पिता के द्वारा करवाए गए यज्ञ में शामिल होना चाहती थी। शिवजी के कई बार मना करने के बाद भी माता पार्वती नहीं मानी और अकेले अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं। वहां पर अपने पति का का पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान देख सती ने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ को तहस नहस कर दिया और सती के शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 अंग विभक्त किए, जो शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद सती ने हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया।
02:00 PM, 22-Sep-2025
पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा को समर्पित
मां शैलपुत्री बीज मंत्र
ह्रीं शिवायै नम:
प्रार्थना मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित
मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
प्रार्थना मंत्र
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित
मां चंद्रघंटा बीज मंत्र
ऐं श्रीं शक्तयै नम:
प्रार्थना मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा को समर्पित
मां कूष्मांडा बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:
प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित
मां स्कंदमाता बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
प्रार्थना मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
छठा माता मां कात्यायनी की पूजा को समर्पित
मां कात्यायनी बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
प्रार्थना मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सांतवा दिन मां कालरात्रि को समर्पित
मां कालरात्रि बीज मंत्र
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
प्रार्थना मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आंठवा दिन मां महागौरी की पूजा को समर्पित
मां महागौरी बीज मंत्र
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
प्रार्थना मंत्र
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री की पूजा को समर्पित
मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
प्रार्थना मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
01:40 PM, 22-Sep-2025
Shardiya Navratri 2025
- फोटो : अमर उजाला
तुला राशि
आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ आपके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होने के योग है। करियर को लेकर निर्णय लेने में आप स्वयं को सफल महसूस करेंगे।
मकर राशि
मकर राशि वालों को प्रेम जीवन में कई सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। कार्यस्थल पर आपकी जमकर प्रशंसा होगी और पदोन्नति की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। आर्थिक लाभ होने के साथ-साथ नए आय के स्रोत प्राप्त होंगे।
कुंभ राशि
आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। प्रेम संबंधों में आपके गहराई आएगी। नए व्यापार के प्रारंभ होने से आपका मन प्रसन्न रहेगा और स्वास्थ्य में सुधार भी महसूस होगा।
01:20 PM, 22-Sep-2025
नवरात्रि में जरूर करें ये सरल उपाय
अखंड ज्योत
यदि संभव हो तो नौ दिनों के लिए घर में अखंड ज्योत जलाएं। यह देवी के प्रति आपकी अटूट आस्था का प्रतीक है और घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सुख-शांति लाता है।
लाल पुष्प और श्रृंगार
प्रतिदिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल या कोई अन्य लाल पुष्प अर्पित करें। साथ ही, नवरात्रि में किसी एक दिन मां को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें। इससे देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।