Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के दिन भी कर सकते हैं विसर्जन , जानें आज के गणेश विसर्जन का मुहूर्त
Ganesh Chaturthi Puja Muhurat, Wishes Visarjan in Hindi : गणेश चतुर्थी पर घर में स्थापित गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन पूरे विधि-विधान से करना जरूरी होता है। यह विसर्जन आप अपनी सुविधा अनुसार चतुर्थी के दिन, अगले दिन, या फिर तीसरे, पांचवे, सातवें दिन कर सकते हैं।
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भगवान गणेश को बप्पा और मोरया क्यों कहा जाता है
गणेश विसर्जन से जुड़ी एक रोचक कथा महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गांव से जुड़ी है, जहां करीब 600 वर्ष पहले मोरया गोसावी नाम के एक महान गणेश भक्त का जन्म हुआ था। माना जाता है कि वे स्वयं गणेशजी के अंशावतार थे और उनका जन्म 1375 ई. में वामन भट्ट और पार्वती के घर हुआ था। मोरया बचपन से ही भगवान गणेश की भक्ति में लीन रहते थे और गणेश चतुर्थी के अवसर पर चिंचवाड़ से 95 किलोमीटर दूर स्थित मयूरेश्वर मंदिर तक पैदल यात्रा करते थे। यह सिलसिला उन्होंने 117 वर्षों तक जारी रखा। वृद्धावस्था में जब उनके लिए मंदिर तक जाना कठिन हो गया, तब एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और कहा कि अब तुम्हें मंदिर आने की आवश्यकता नहीं, मैं स्वयं तुम्हारे पास आऊंगा। अगले दिन स्नान के बाद मोरया को कुंड से निकलते ही अपने सामने वही मूर्ति दिखाई दी, जो उन्होंने स्वप्न में देखी थी। उन्होंने उस दिव्य मूर्ति को चिंचवाड़ में स्थापित किया, जो बाद में एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बन गया। यहीं से “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे की परंपरा शुरू हुई, जिससे भक्त और भगवान के बीच की दूरी और भी कम हो गई। मान्यता है कि चिंचवाड़ की गणेश प्रतिमा मयूरेश्वर भगवान के अंश स्वरूप है, इसलिए हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर वहां से मयूरेश्वर मंदिर तक डोली यात्रा निकाली जाती है।
Today Ganesh Visarjan Muhurat 2025: गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन मुहूर्त 2025
- गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन बुधवार, अगस्त 27, 2025 को
- अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ) - दोपहर 03:35 से सायं 06:48 तक
- सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - रात्रि 08:12 से अगस्त 28 देर रात 12:23
- उषाकाल मुहूर्त (लाभ) - 28 अगस्त तड़के 03:10 से प्रातः 04:33
भगवान गणेश को अर्पित करें ये 5 फूल
- गेंदे के फूल: आरोग्य और धन की प्राप्ति हेतु, रोग व आर्थिक समस्या दूर होती है।
- गुड़हल के फूल: शत्रु पर विजय के लिए, जीवन में समृद्धि और सुरक्षा मिलती है।
- पारिजात के फूल: संतान सुख के लिए, संतान से जुड़ी बाधाएं समाप्त होती हैं।
- कंद के फूल: पारिवारिक शांति के लिए, घर में प्रेम और सुख बना रहता है।
- अपराजिता के फूल: विवाह की सफलता हेतु, शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
Ganesh Chaturthi Vrat Niyam: गणेश चतुर्थी व्रत के नियम
- व्रत का संकल्प लेने के बाद उसे अधूरा न छोड़ें और पूरा नियमपूर्वक निभाएं।
- व्रत के दिन गणेश चतुर्थी की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
- इस दिन क्रोध, ईर्ष्या, और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें।
- पूजा के समय शुद्ध वस्त्र पहनें और बिना कुछ खाए या मुंह में झूठ लगाए ही पूजा करें।
- व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- भगवान गणेश को ताजे और शुद्ध भोग अर्पित करें, बासी या अशुद्ध चीजें न चढ़ाएं।
- दिन में सोने से बचें, कोशिश करें कि दिनभर सतर्क और ध्यानमग्न रहें।
- इस दिन बाल और नाखून न काटें।
- पूजा करते समय सिर ढक कर रखें, यह सम्मान और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर कैसे करें व्रत का पारण
गणेश चतुर्थी का व्रत समाप्त करने के लिए व्रती को पहले भगवान गणेश को अर्पित किए गए भोग को ग्रहण करना चाहिए। व्रत खोलने से पहले पूजा करके गणपति बप्पा को भोग लगाना आवश्यक होता है। इस दिन गणेश जी को जिन चीज़ों का भोग लगाया जा सकता है, उनमें प्रमुख हैं – मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केले, जामुन, नारियल के लड्डू, तिल-गुड़ के लड्डू, सूजी का हलवा, पंचमेवा, पंचामृत, बेसन के लड्डू और गुड़-चावल की खीर। व्रत खोलते समय इन्हीं में से किसी एक भोग प्रसाद को सबसे पहले ग्रहण करके व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।
व्रत के दौरान किन चीजों को खाना से बचना चाहिए
- सामान्य नमक (केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें)
- अनाज और दालें
- मांसाहार और मदिरा
- तामसिक चीजें (जैसे लहसुन, प्याज)
- गरम मसाले, हल्दी, लाल मिर्च
- कटहल
Ganesh Sthapana Kitne Din Ke Liye Kare: गणेश स्थापना कितने दिन के लिए करें?
आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार गणपति बप्पा को 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक घर में विराजमान रख सकते हैं। यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा, समय और व्यवस्था पर निर्भर करता है। जिस दिन आप विसर्जन करना चाहें, उस दिन विधिवत पूजन और आरती के बाद बप्पा को विदा करें।
घर पर गणेश स्थापना पूजा विधि : Ganesh Sthapana Puja Vidhi In Hindi
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश को घर में आमंत्रित करें।
- उन्हें फूलों की माला पहनाएं और ताजे फूल अर्पित करें।
- फिर गंगाजल या दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं, फिर साफ जल से शुद्ध करें।
- बप्पा के माथे पर चंदन और रोली लगाएं, फिर हल्दी और अक्षत चढ़ाएं।
- अब घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप अर्पित करें।
- परिवार के साथ मिलकर गणेश जी की आरती करें और हाथ जोड़कर विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।
- विसर्जन तक रोज़ विधिपूर्वक पूजा करें।
- दिन में कम से कम एक बार भजन या आरती अवश्य करें।
Ganpati Sthapna Muhurat: गणपति प्रतिमा स्थापना मुहूर्त
शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त को गणेश प्रतिमा की स्थापना का शुभ समय सुबह 11:05 से दोपहर 12:42 तक है। लेकिन दोपहर 12:22 से राहुकाल शुरू हो जाएगा, जो अशुभ माना जाता है। इसलिए गणपति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा पूजन के लिए सबसे उत्तम समय 11:05 से 12:22 बजे तक रहेगा।
शहरों के अनुसार गणेश चतुर्थी स्थापना मुहूर्त 2025: Shubh Muhurat For Ganesh Chaturthi 2025)
- पुणे - प्रातः 11:21 से दोपहर 01:51
- नई दिल्ली -प्रातः 11:05 से दोपहर 01:40
- चेन्नई - प्रातः10:56 से दोपहर 01:25
- जयपुर - प्रातः11:11 से दोपहर 01:45
- हैदराबाद -प्रातः 11:02 से दोपहर 01:33
- गुरुग्राम - प्रातः11:06 से दोपहर 01:40
- चण्डीगढ़ -प्रातः 11:07 से दोपहर 01:42
- कोलकाता - प्रातः10:22 से दोपहर 12:54
- मुम्बई - प्रातः 11:24 से दोपहर 01:55
- बेंगलूरु - प्रातः 11:07 से दोपहर 01:36