अमर उजाला शब्द सम्मान 2025: ममता कालिया और मेमचौबी 'आकाशदीप' से सम्मानित; उस्ताद शुजात हुसैन खान ने बांधा समां
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Wed, 11 Feb 2026 07:42 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 11 Feb 2026 07:42 PM IST
खास बातें
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 का आयोजन दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत किया।
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अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
07:56 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 के जूरी और विजेता-
07:52 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 के जूरी और विजेता-
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07:42 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 में उस्ताद शुजात हुसैन खान को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
07:41 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी जी ने आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, क्या गजल, क्या शे'र, क्या भजन, क्या सूफी गीत... आज शाम ऐसा कुछ नहीं बचा जो उस्ताद शुजात हुसैन की सितार और उनकी गायिकी से न निकला हो।07:23 PM, 11-Feb-2026
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने बांधा समां
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में प्रस्तुति देकर समां बांधा। उन्होंने 'गजल का पहला शहर है, इतने हिस्से में बंट गया हूं मैं', 'आईना झूठ बोलता ही नहीं', 'बेहोशी नशा खुश्बू क्या-क्या न तुम्हारे सांसों में' जैसी गजलों के साथ प्रस्तुति दी। इस दौरान दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।07:12 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं' को गाते हुए सितार वादन किया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सभागार झूम उठा।
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07:05 PM, 11-Feb-2026
तबले की थाप और सितार के सुरों से झूम उठा सभागार
कार्यक्रम में तबले की थाप और सितार के सुरों से धाराएं निकलीं और संगीत की नदी में एक हो गईं। इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट सभागार झूम उठा।06:55 PM, 11-Feb-2026
दर्शन देहो शंकर महादेव को सुरों में पिरोया
उस्ताद शुजात हुैसन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश 'दर्शन देहो शंकर महादेव' को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी।06:47 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कहा, संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।06:45 PM, 11-Feb-2026
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025
शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूँ कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। - उस्ताद शुजात हुसैन खान