क्या है 'यूफोनिक योग', कैसे 7 स्वर और 7 चक्र में छुपे हैं सेहत के 7 सूत्र, जानना चाहेंगे क्या?
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अध्यात्म की दृष्टि से देखा जाए, तो हमारे शरीर में सात चक्र मौजूद होते हैं। यह बात शायद आप लोगों को मालूम हो, लेकिन क्या आपको पता है कि इन सात चक्रों से सात स्वर जुड़े होते हैं। सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि... यह सात स्वर जब इन सात चक्रों के साथ मिलते हैं, तो बनता है योग का एक नया रूप 'यूफोनिक योग'।
मैं और कोरियोग्राफर सुमन कनावत अक्सर योग और संगीत को लेकर बातें करते थे, लेकिन एक बार अचानक हमने पाया कि योग और संगीत का एक-दूसरे से कुछ संबंध है। इसको लेकर हमने काफी शोध किए। कई प्रख्यात संगीतकार और योग विशेषज्ञों से मिले। इस शोध से हमें पता चला कि शरीर के सात चक्र और संगीत के सात स्वर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिर हमने योग, शास्त्रीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य की लयबद्ध संरचनाओं को लेकर 'यूफोनिक योग' की कार्यशाला, प्रशिक्षण और प्रदर्शन मॉडल तैयार करना शुरू किया।
तीन शास्त्रीय कलाओं का मिश्रण
शास्त्रीय नृत्य और संगीत को आमतौर पर मनोरंजन एवं भावनाओं की अभिव्यक्ति का जरिया माना जाता है, लेकिन नृत्य और संगीत अनेक बीमारियों के इलाज में भी कारगर साबित हो रहे हैं। योग में जब नृत्य और संगीत की शैली मिल जाती है, तो इसका असर और भी बढ़ जाता है। नृत्य के दौरान हमें काफी फुटवर्क करना पड़ता है, जिससे पैरों पर काफी असर पड़ता है। शरीर के सात चक्रों के साथ राग नट भैरव, राग गुर्जरी तोड़ी जैसे कई रागों का प्रयोग होता है, जो शरीर के चक्रों को जागृत कर शांति पहुंचाते हैं।
यूफोनिक योग का असर चार गुना
यूफोनिक योग शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य और योग का एक अनोखा संगम है। नृत्य, खेल, योग और शारीरिक व्यायाम एंडोर्फिन हार्मोन उत्पन्न करते हैं, जो हमें खुशी महसूस कराते हैं और तनाव को कम करते हैं। यूफोनिक योग को लोगों को तनाव से दूर रहने में मदद करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यूफोनिक योग, तीन पारंपरिक कलाओं के साथ योग के प्रभावों को लगभग चार गुना बढ़ा देता है। योग के साथ नृत्य का संयोजन मांसपेशियों में लचीलापन, नियंत्रण और ताकत का निर्माण करता है। इससे शरीर अधिक ऊर्जावान होता है और आपको कई प्रकार की बीमारियों से भी दूर रखता है।
योग का ज्ञान, प्रभाव का नहीं
पिछले कुछ सालों से योग को लेकर लोग काफी जागरूक हुए हैं, लेकिन उससे होने वाले प्रभावों को लेकर लोग अभी भी पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं। हम ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इससे होने वाले फायदों के बारे में जानकारी देकर इससे जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सही समय और उम्र में बच्चों को अगर कोई जानकारी दी जाए, तो वह लंबे समय तक उनके जहन में बनी रहती है। इसलिए हम कोशिश करते हैं कि सरल भाषा में उनको यूफोनिक योग के फायदों की जानकारी दें। इससे कई प्रकार की बीमारियों के साथ ही कई तरह की बुरी आदतों जैसे शराब और नशा छोड़ने में भी मदद मिलती है।
शास्त्रीय नृत्य और संगीत
यूफोनिक योग में कथक, ओडिशी नृत्य और भरतनाट्यम को जोड़ा गया है। कथक की शैली में अदाएं और मुद्राएं काफी होती हैं। भारत में 8 प्रकार के शास्त्रीय नृत्य में से कथक सबसे महत्वपूर्ण नृत्य शैली है। इसमें शरीर को काफी गतिविधि करनी होती है, जिससे शरीर का अच्छा खासा व्यायाम हो जाता है। इसके साथ अन्य नृत्य शैलियों के भी अलग-अलग फायदे हैं। लेकिन जब इसमें संगीत जुड़ जाता है, तो यह शरीर को अधिक प्रभावित करता है। योग के साथ नृत्य और संगीत का जोड़ अद्भुत परिणाम देता है। इन रागों के प्रयोग से हमारे शरीर के चक्र को बेहतर तरीके से जागृत किया जा सकता है।
दिमाग और शरीर समन्वय में सुधार और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
सतर्कता, पारस्परिक संचार और सुनने के कौशल में सुधार होता है।
याददाश्त बढ़ाता और दिल को स्वस्थ बनाता है। मैंने और मेरी टीम ने पंडित बिरजू महाराज, उस्ताद अमजद अली खान, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित विश्व मोहन भट्ट से काफी कुछ सीखा। हमने भारतीय नौसेना, तिहाड़ जेल, शारदा विश्वविद्यालय, मिरांडा कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, जेपी समूह, अंक और स्पेंसर इंडिया, ब्रसेल्स में भारतीय दूतावास, ताइवान में तीसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, काऊशुंग में अंतरराष्ट्रीय भारतीय खाद्य महोत्सव में यूफोनिक योग का प्रदर्शन किया है। योग स्वयं, समाज और प्रकृति के साथ एकता और सद्भाव की भावना जागृत करता है। यह हमारी जीवनशैली बदलकर और चेतना पैदा कर बेहतर दुनिया बनाने में हमारी मदद कर सकता है।
सा स्वर - मूलाधार चक्र
रे स्वर - स्वाधिष्ठान चक्र
गा स्वर - मणिपुर चक्र
मा स्वर - अनाहत चक्र
पा स्वर - विशुद्ध चक्र
धा स्वर - अजन चक्र
नि स्वर - सहस्रार चक्र
फायदे
जो लोग कम उम्र से ही डांस में हिस्सा लेते हैं, उनका मोटापा तो कम होता ही है, साथ ही उन्हें तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से भी निजात मिलता है। इसके अलावा आधुनिक और शास्त्रीय दोनों तरह के नृत्य में हिस्सा लेने वालों को अन्य लोगों की तुलना में तनाव कम रहता है। लंदन में हुए एक अध्ययन से पता चला कि 60 किलो का कोई शख्स अगर 30 मिनट तक नृत्य करता है, तो इस दौरान वह तकरीबन 150 कैलोरी बर्न करता है।
राग जैत
मूलाधार चक्र शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह 'आधार चक्र' है। भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जागृत होने लगता है। इस चक्र को जागृत करके के लिए ध्यान लगाते समय राग जैत सुनने से इसका बेहतर प्रभाव पड़ता है। इस चक्र को वीरभद्र और त्रिकोण आसन जागरूक करता है। इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जागृत हो जाता है।
राग गुर्जरी तोड़ी
स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है, जिसकी छह पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर एकत्रित है, तो आपके जीवन में मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहती है। इस चक्र को जागृत करके के लिए ध्यान लगाते समय राग गुर्जरी तोडी सुनने से सुनना चाहिए। इसे जागरूक करने के लिए बाल आसन,वज्रासन, सिंहासन और गऊमुख आसन करना चाहिए। राग गुर्जरी तोड़ी सुनने से क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गुणों का नाश होता है।
राग देशकार
मणिपुर चक्र नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो दस दल कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है। राग देशकार को सुनते हुए इस चक्र को जागृत करने से शरीर अधिक प्रभावित होता है। भुजंगासन और धनुरासन के जरिए इस चक्र को जागरूक किया जाता है। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।
राग नट भैरव
अनाहत चक्र हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। राग नट भैरव सुनने से इस चक्र को जागृत करने के लिए ध्यान लगाने में मदद मिलती है। इस चक्र को मर्जरी आसन, सेतुबंध आसन और अर्ध मुंह श्वासन कर जागृत किया जाता है। इससे हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह,दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है।
राग भैरवी
कंठ में सरस्वती के स्थान पर विशुद्ध चक्र है और जो सोलह पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है, तो आप अति शक्तिशाली होंगे। सर्वांगासन, मत्स्यासन और उष्ट्रासन के जरिए आप इस चक्र को जागरूक करते हैं। इस दौरान राग भैरवी सुनने से विशुद्ध चक्र अधिक प्रभाव देता है। इससे मौसम के प्रभाव को रोका जा सकता है। साथ ही हमरे संचार को भी यह चक्र बेहतर तरीके से प्रभावित करता है।
अल्हैया बिलावल राग
दोनों आंखों के बीच भृकुटी में अजन चक्र होता है। जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय होती है, वह व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का होता है। इस चक्र को जागरूक करने के लिए गरुड़ासन और वीरभद्रासन-2 करना चाहिए। इन आसनों के साथ अल्हैया बिलावल राग सुनना चाहिए। इस चक्र में शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। चक्र के जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है।
राग आसावरी
सहस्रार चक्र की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जागृत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है। ध्यान लगाकर और शीर्षासन के जरिए इस चक्र को जागरूक किया जाता है। इस दौरान राग आसावरी सुनने से शरीर को काफी फायदा मिलता है। इससे तनाव दूर होता है साथ ही व्यक्ति अवसाद की बीमारी से भी दूर रहता है।
श्रुति चतुरलाल प्रसिद्ध तबला वादक पंडित चतुरलाल की पोती हैं। सुमन कनावत एक योग प्रशिक्षक हैं। श्रुति और सुमन अपनी टीम के साथ यूफोनिक योग का प्रदर्शन भारत के कई शहरों और पेरिस, ताइवान, श्रीलंका और लंदन में भी कर चुकी हैं।
यह आलेख नेहा सजवाण से बातचीत पर आधारित।