किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर ज्यादा समय व्यतीत करना ठीक नहीं है। एक शोध के मुताबिक इससे उनमें एडीएचडी नामक मानसिक विकार उत्पन्न होता है। सोशल मीडिया पर घंटो चिपके रहने से हम सोचते हैं कि इससे हमारे अंदर सामाजिकता का भाव बढ़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहने से न केवल हमारा समय नष्ट होता है, बल्कि हमारी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कमजोर होती है। दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार, जो किशोर दिन में अधिकतर समय सोशल मीडिया का उपयोग करते रहते हैं, उनमें एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) नामक मानसिक विकार का खतरा बहुत ज्यादा होता है।
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सोशल मीडिया के साथ मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल उपकरण इस्तेमाल करने से यह समस्या गंभीर हो सकती है। अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का मतलब ध्यान अभाव सक्रियता विकार होता है। यह एक मानसिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति को किसी विषय या वस्तु पर ध्यान लगाने में परेशानी महसूस होती है। उसकी एकाग्रता बार-बार भंग होने लगती है। शोध में 15 से 16 साल तक के 2,600 किशोरों पर दो साल तक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में उनके द्वारा मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल डिवाइस चेक करने की गतिविधियों की देखरेख की गई। अध्ययन के दो साल बाद देखा गया कि जो किशोर ज्यादा मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करते थे, उनमें एडीएचडी की संभावना ज्यादा है।
मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की मुख्य वजह सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, मैसेज भेजना, फोटो डालना आदि था। जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित अध्ययन में सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग वीडियो, टेक्स्ट मैसेजिंग, संगीत और ऑनलाइन चैट रूम्स सहित डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर ध्यान दिया गया है। यह अध्ययन अभिभावकों, स्कूलों, तकनीकी कंपनियों और शिशु रोग विशेषज्ञों के लिए आंख खोलने वाला है, जिसमें डिजिटल उपकरणों के अधिक इस्तेमाल को लेकर आगाह किया गया है।