फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Stress Management ›   Know how nature can cure you from the risk of asthma and stress

हरियाली के बीच रहने वालों को कम होता है अस्थमा और तनाव, जानें क्या कहता है शोध

Thu, 27 Sep 2018 10:28 AM IST
सुबोध कुमार मिश्रा
सुबोध कुमार मिश्रा Updated Thu, 27 Sep 2018 10:28 AM IST
विज्ञापन
Know how nature can cure you from the risk of asthma and stress
जिनका बचपन हरियाली की गोद में बीतता है, व्यस्क होने पर उनमें श्वसन संबंधी बीमारियां, यहां तक कि अस्थमा होने की आशंका काफी कम हो जाती है। यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी इंटरनेशनल कांग्रेस में पेश किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक, जिन बच्चों के घरों के आसपास पेड़-पौधों की संख्या अधिक होती है, उनमें वयस्क होने पर श्वसन संबंधी बीमारियां कम होती हैं।
विज्ञापन


इसके विपरीत, वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले बच्चों में युवा अवस्था में श्वसन संबंधी समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है। सात यूरोपीय देशों में बच्चों और वयस्कों में फेफड़ों के स्वास्थ्य की जांच के लिए RHINESSA (फेफड़ों से संबंधित बीमारियों पर काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र) ने कई अध्ययन केंद्रों से बच्चों के आवासीय परिसर के आसपास हरियाली और वायु प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों को एकत्र किया। 
विज्ञापन

 

नॉर्वे के हॉकलैंड विश्वविद्यालय अस्पताल के  डॉ. इंग्रिड नॉर्डेइड क्यूपर और उनके सहकर्मियों ने 18 से 52 वर्ष की आयु वर्ग के 5415 प्रतिभागियों के घर के आसपास से जुड़े हरियाली डेटा का विश्लेषण किया, साथ ही 4414 प्रतिभागियों के घर के आसपास के वायु प्रदूषण आंकड़ों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने अपने विश्लेषण में देखा कि कितने लोग तीन से अधिक श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे। श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षणों में शामिल थे- छाती की घरघराहट, श्वासहीनता, सांस की तकलीफ से नींद से जागना, जागने के बाद छाती में तनाव, खांसी, दमा और अस्थमा।

शोधकर्ताओं ने जन्म से 18 साल तक तीन वायु प्रदूषकों के औसत वार्षिक एक्सपोजर की गणना की, जिनमें पीएम 2.5 और पीएम 10 के अलावा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड शामिल थे। साथ ही उन्होंने इसी अवधि के लिए प्रतिभागियों के घर के चारों ओर 100 मीटर क्षेत्र में हरियाली का भी मूल्यांकन किया। उन्होंने पाया कि वायु प्रदूषकों के बीच जन्म से 18 साल तक रहने वाले प्रतिभागियों में श्वसन रोग संबंधी लक्षण मौजूद थे। कई प्रतिभागियों में अस्थमा के लक्षण भी पाए गए।

 

डॉ. क्यूपर कहते हैं, "ये शुरुआती परिणाम हैं, लेकिन हमने पाया कि बचपन के दौरान हरियाली के संपर्क में रहने वाले वयस्कों में श्वसन रोग संबंधी कम लक्षण थे, जबकि बचपन में वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले वयस्कों में इसके लक्षण अधिक थे, यहां तक कि अस्थमा भी।" डॉ. क्यूपर कहते हैं,  "हमें किसी भी निश्चित निष्कर्ष निकालने से पहले इन निष्कर्षों का विश्लेषण करने की आवश्यकता है। हालांकि, यह संभव है कि हमारे निष्कर्ष वायु प्रदूषण और हरियाली के दीर्घकालिक प्रभावों पर हमारे ज्ञान का विस्तार करेंगे, जिससे चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को मदद मिलेगी।'

' डॉ. क्यूपर का मानना है कि हमारे परिणाम शहर के योजनाकारों और नीति निर्माताओं के लिए मूल्यवान होंगे। आने वाले वर्षों में जनसंख्या घनत्व में वृद्धि के साथ वायु प्रदूषण एक्सपोजर में कमी लाना महत्वपूर्ण होगा और भावी शहर की योजनाओं में हरियाली की पहुंच में वृद्धि करना होगा। यूरोपीय श्वसन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर मीना गागा के अनुसार, "यह एक आकर्षक अध्ययन है, जो आवासीय क्षेत्रों में हरियाली और बच्चों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है। डॉक्टर श्वसन समस्याओं से ग्रस्त रोगियों को देखते समय बता सकते हैं कि कैसे हरी-भरी जगहें प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों का सामना करने में सक्षम हो सकती हैं।
 
विज्ञापन

श्वसन संबंधी ज्यादातर बीमारियां एलर्जी के कारण होती है। हरे-भरे स्थानों पर वायु प्रदूषक, जिन्हें हम एलर्जन कहते हैं, न के बराबर होते हैं। दूसरी तरफ जहां का वायु प्रदूषित होता है, वहां पीएम पार्टिकल्स, हानिकारक गैसों और धूलकण की मात्रा ज्यादा होती है। ये पार्टिकल्स हमारे फेफड़ों में जमा होकर उन्हें धीरे-धीरे खोखला करते हैं। वायु प्रदूषण के बीच रहने वाले बच्चे जब बड़े होते हैं, तो उनके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं, जिससे उनकी श्वसन प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस वजह से उनमें श्वसन संबंधी बीमारी होने का खतरा काफी अधिक होता है। इसके विपरित हरे-भरे स्थानों पर रहने से फेफड़ों को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, जिससे वे मजबूत होते हैं।

डॉ. मितेश शर्मा, डायरेक्टर, कार्डियक सर्जरी, डी.एन.एस.एस.एच., नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all update about bollywood news, fitness news, cricket news, Entertainment news in Hindi. Stay updated with us for all breaking hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed