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काम के बाद ईमेल चेक करने से सेहत पर पड़ता है बुरा असर, जानें कैसे
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:15 PM IST
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अकसर लोग काम करने के बाद भी अपने स्मार्टफोन पर ईमेल चेक करते रहते हैं, जो कि धीरे-धीरे उनकी आदत में भी शुमार हो जाता है। लेकिन एक अध्ययन में कहा गया है कि काम के बाद भी ईमेल चेक करना आपकी और आपके परिवार की सेहत पर बुरा असर डालता है। इसके अलावा यह आपके रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है।
वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो हर स्तर के चिड़चिड़ेपन के शिकार थे। इनमें से बहुत कम लोगों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा था। उन्हें यह अहसास भी नहीं था कि उनकी इस आदत से उनके साथी पर कितना तनाव बढ़ रहा है।
इस अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने कहा कि ऑफिस के काम को कहीं से भी करने का लचीलापन लोगों में तनाव का स्तर बढ़ा रहा है। ज्यादातर कर्मचारी सोने से पहले आखिरी काम ईमेल चेक करने का करते हैं और सुबह उठने के बाद सबसे पहला काम भी यही करते हैं।
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इस अध्ययन में बेकर ने दावा कि है कि लगातार मेल चेक करने की अपेक्षा से ही कर्मचारी, उसके साथ और बच्चों में तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। शोध के सह लेखक प्रोफेसर विलियम बेकर ने कहा कि ऑफिस और निजी जिंदगी की जरूरतों को लेकर कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति रहती है। इससे उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ता है और उनकी कामकाजी व निजी जिंदगी प्रभावित होती है।
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वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो हर स्तर के चिड़चिड़ेपन के शिकार थे। इनमें से बहुत कम लोगों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा था। उन्हें यह अहसास भी नहीं था कि उनकी इस आदत से उनके साथी पर कितना तनाव बढ़ रहा है।
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इस अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने कहा कि ऑफिस के काम को कहीं से भी करने का लचीलापन लोगों में तनाव का स्तर बढ़ा रहा है। ज्यादातर कर्मचारी सोने से पहले आखिरी काम ईमेल चेक करने का करते हैं और सुबह उठने के बाद सबसे पहला काम भी यही करते हैं।
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इस अध्ययन में बेकर ने दावा कि है कि लगातार मेल चेक करने की अपेक्षा से ही कर्मचारी, उसके साथ और बच्चों में तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। शोध के सह लेखक प्रोफेसर विलियम बेकर ने कहा कि ऑफिस और निजी जिंदगी की जरूरतों को लेकर कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति रहती है। इससे उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ता है और उनकी कामकाजी व निजी जिंदगी प्रभावित होती है।