होशियार! रिश्तों में घुन लगा रही है पी-फबिंग नाम की सौतन
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स्मार्टफोन हमारी जिंदगी में इस हद तक पैठ बना चुका है कि लोगों को अपने पार्टनर का भी ख्याल नहीं रहता है। किसी रेस्तरां में डिनर पर गए हों या फिर वीकेंड पर पिकनिक मनाने निकले हैं, ज्यादातर लोग पास बैठे अपने पार्टनर को तरजीह देने की बजाय अपने फोन से गुफ्तगू करना ज्यादा मुनासिब समझते हैं।
अगर आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं, तो आप पी-फबिंग के शिकार हैं। पी-फबिंग, यानी अपने पार्टनर की अनदेखी करके फोन या दूसरे तकनीकी गैजेट्स से चिपके रहना।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि स्मार्टफोन या दूसरे गैजेट्स दूसरी चीजों से हमारा ध्यान हटा लेते हैं। आपकी इस आदत से आपका पार्टनर चिड़चिड़ेपन और तनाव से ग्रस्त हो सकता है, जिसका सीधा असर आपसी रिश्ते पर पड़ना तय है।
कहीं आप अपने साथी की अनदेखी तो नहीं कर रहे हैं?
फबिंग (Phubbing), अंग्रेजी के दो शब्दों Phone और Snubbing के योग से बना है। फोन से तो हम सभी परिचित ही हैं, जबकि Snubbing का अर्थ होता है अनदेखी करना।
इन दोनों शब्दों को मिलाकर ही फबिंग शब्द पहली बार 2013 में उस वक्त अस्तित्व में आया था, जब स्मार्टफोन का दखल हमारी जिंदगी में तेजी से बढ़ रहा था। इसमें पी-फबिंग का अर्थ पार्टनर से जुड़ा है।
शोधकर्ताओं ने अब पाया है कि पी-फबिंग के कारण जिस व्यक्ति को अनदेखा किया जा रहा है, वो चिड़चिड़ेपन का शिकार हो सकता है। पी-फबिंग के शिकार कपल्स में दूसरे लोगों की अपेक्षा कहासुनी भी ज्यादा होती है।
पी-फबिंग बढ़ाता है पार्टनर का चिड़चिड़ापन
हालात ऐसे हो जाते हैं कि पार्टनर की गैर-मौजूदगी में पी-फबिंग का शिकार व्यक्ति तनाव में डूबा रहता है। ऐसे में न केवल रिलेशनशिप प्रभावित होती है, बल्कि जिंदगी के दूसरे पहलू भी अनछुए नहीं रह जाते हैं।
टेक्सास की बेलर यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जेम्स रॉबर्ट्स करीब 150 लोगों की रिलेशनशिप का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। अध्ययन में शामिल लोगों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनका पार्टनर उनसे बातचीत करते वक्त भी फोन की ओर नजरें गड़ाए रखता है।
अध्ययन के दौरान लोगों से पूछा गया कि कहीं बाहर घूमने जाने या फिर साथ में डिनर करते वक्त उनका पार्टनर फबिंग कर रहा हो, तो उस वक्त उन्हें कैसा महसूस होता है? प्रतिभागियों के जवाब से अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि पी-फबिंग सीधे तौर पर रिलेशनशिप के हर पहलू को प्रभावित करती है।
इस सौतन से जरा बचे!
मामला तब ज्यादा पेचीदा हो जाता है, जब ग्रुप में बैठकर भी आप आपने पार्टनर को नजरअंदाज करके फोन में जुटे रहते हैं। ऐसे में आपके पार्टनर को अपमानित महसूस हो सकता है।
मनोविज्ञान में अटैचमेंट थ्योरी नामक मनोवैज्ञानिक मॉडल का इस्तेमाल रिलेशनशिप की गतिशीलता का पता लगाने के लिए किया जाता है। और अगर इस अटैचमेंट स्टाइल में चिड़चिड़ापन जुड़ जाता है, तो समझ लीजिए कि मामला गंभीर हो रहा है। चिड़चिड़ेपन या फिर ध्यानमग्न रहने जैसे फैक्टर अगर रिलेशनशिप में दिखने लगें, तो आपके पार्टनर में असुरक्षा एवं उपेक्षा का भाव पनप सकता है।
रिलेशनशिप की बुनियाद मजबूत हो, इसके लिए रुपये-पैसे से ज्यादा पार्टनर से आपका जुड़ाव ज्यादा मायने रखता है। अगर आप अपनी शादी-शुदा जिंदगी को बचाए रखना चाहते हैं, तो पी-फबिंग जैसी सौतन को अपनी जिंदगी से दूर रखना
ही बेहतर है।