चाहत के बावजूद संबंध नहीं बना पाई महारानी, क्यों?
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ये अंश 'महारानी' उपन्यास से लिया गया है जिसके रचयिता है दीवान जरमनी दास। इस उपन्यास में भारत की महारानियों और शाही प्रेमिकाओं की परीकथाओं से भी रोमांचक गाथाएं हैं।
हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित 'महारानी' उपन्यास 19 वीं सदी के अंत और 20वीं सदी के शुरूआत में लिखा गया है।
इस उपन्यास के रचयिता दीवान जरमनी दास का कहना है कि मैं इस पुस्तक में जो कुछ भी लिख रहा हूं, वह औरतों के साथ हुए मेरे निजी अनुभवों के आधार पर ही है। इस पुस्तक में मैंने महिलाओं का जैसा भी चित्रण किया है, वह मेरी निजी जानकारी के आधार पर है, इसलिए इस चित्रण में किसी त्रुटि अथवा अतिश्योक्ति की कोई संभावना नहीं।
बेगम शराब पीने के लिए सेठ के घर जाती थी!
जब शराब के दौर पूरे हो जाते, तब नवाब अपने मेहमान सेठों में से एक खास व्यक्ति को अपनी कार में अपनी बेगम के साथ विलिगंडन क्लब के लिए रवाना कर देता। यह क्लब ताजमहल होटल से लगभग दस मील के फासले पर है। वह सेठ और बेगम बाकी लोगों की अपेक्षा करीब एक घंटे बाद क्लब पहुंचते।
बाद में उस सेठ की जुबानी मुझे बेगम के स्नेहमय व्यवहार के बारे में तारीफें सुनने को मिलतीं। और यह भी पता चलता कि रास्ते में वे लोग एक-दो पैग शराब और पीने के लिए सेठ के यहां रूक गए थे।
सेठ और बेगम जब क्लब पहुंचते, तो बहुत ही खुश दिखाई पड़ते। और नवाब उन दोनों की खुशी को खुशी-खुशी स्वीकार लेता तथा उसके चेहरे पर या मन में किसी प्रकार की ईष्या का भाव उत्पन्न न होने पाता।
महारानी यौन संबंध क्यों नहीं बना पाई?
महाराजा ने अपने एक निजी चिकित्सक से मशविरा किया कि आखिर क्या कारण हो सकता है जो महारानी उसके साथ सोने के लिए तैयार नहीं हो पाती। डॉक्टर क्योंकि महाराजा की शारीरिक अयोग्यता से परिचित था इसलिए उसने महाराजा को साफ-साफ बता दिया के महारानी सेक्स की भूख से परेशान है और महाराजा उसकी भूख शांत कर पाने के योग्य नहीं है। इसलिए उसे महाराजा से वितृष्णा हो गई है और अब वह कभी भी उसके साथ नहीं सो पाएगी।
डॉक्टर ने ही महाराजा को यह राय भी दी कि महारानी को उसकी पसंद के किसी जवान अफसर के साथ कपूरथला से बाहर भेज दिया जाए ताकि उसकी नसों का तनाव कुछ ढीला हो सके। महाराजा ने बेमन से डॉक्टर की यह राय मान ली और फिर उसके तुरंत बाद मेजर महारानी को लेकर कुछ दिन हवा बदलने के लिए दिल्ली चला गया।
दिल्ली में ये लोग एक होटल की सबसे ऊपर मंजिल पर ठहरे। मगर क्योंकि उस समय तक महारानी की नसों का तनाव बहुत अधिक बढ़ चुका था इसलिए वह मेजर के साथ भी किसी प्रकार का कोई यौन संबंध स्थापित न कर सकी।
अपने पुराने प्रेमियों को कभी नहीं भूलती थी पासवान
पासवान जी का पद एक रखैल से ऊंचा था और वैध पत्नी के पद के बराबर का। पासवान जी धन बटोरती रही। महाराजा से मूल्यवान उपहार प्राप्त करने के अलावा वह जौहरियों और ठेकेदारों से कमीशन तथा रिश्वत के रूप में रूपए ऐंठती रही।
पासवान जी में बहुत बड़ी खूबी यह थी कि वह अपने पुराने प्रेमियों को कभी नहीं भूलती थी। जब भी कभी उससे मिलने या उसके साथ सोने का अवसर मिलता, वह कभी संकोच न करती।
इडर के महाराज से मिलने के पूर्व उसके कई प्रेमी थे। अपने उन प्रेमियों पर वह बराबर अपनी मेहरबानियां निछावर करती रही। तन और मन दोनों देती रही। आमतौर पर होता यह है कि जब औरतें समाज में कहीं ऊंची उठ जाती हैं, तो वे अपने पुराने दोस्त और प्रेमिसों को भूल जाती हैं। मगर पासवान जी ऐसी नहीं थी।
पासवान जी के प्यार के यह सारे खेल आमतौर पर बम्बई स्थित इडर महल में ही खेले जाते। रियासत के लिए चीजें खरीदने वह अक्सर बम्बई जाती रहती और यहां का महल प्यार के इन खेलों के लिए बहुत सुरक्षित था, क्योंकि इस महल की एकान्तता के कारण उसका कोई भेद खुलने का खतरा नहीं था।