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मनोचिकित्सकों की सलाह: समलैंगिकों को मिले विवाह और बच्चा गोद लेने का अधिकार

Mon, 10 Apr 2023 03:54 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Mon, 10 Apr 2023 03:54 PM IST
सार

समलैंगिकों को अन्य नागरिकों के समान ही अधिकार मिलने चाहिए। उनका व्यक्तित्व दूसरे नागरिकों के समान ही है। ऐसे में उन्हें भी अधिकार है कि वह विवाह करें, परिवार बनाने के लिए बच्चा गोद लें और घर व संपत्ति बनाएं।

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Psychiatrist Supports Same Gender Right To Marriage and Adoption Legalized News in Hindi
समलैंगिक विवाह अधिकार - फोटो : shutterstock.com

विस्तार

समलैंगिकों के अधिकार पर छिड़ी बहस के बीच मनोचिकित्सकों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। भारत के मनोचिकित्सकों का कहना है कि समलैंगिक समुदाय के साथ देश के सभी नागरिकों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए। समलैंगिक समुदाय को विवाह, बच्चा गोद लेने, शिक्षा, रोजगार, संपत्ति का अधिकार और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने का अधिकार मिलना चाहिए। हाल ही में भारतीय मनोरोग सोसायटी ने समलैंगिक समुदाय के बेहतर स्वास्थ्य और मनोस्थिति के बचाव के लिए कुछ सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि समलैंगिकों को अन्य नागरिकों के समान ही अधिकार मिलने चाहिए। उनका व्यक्तित्व दूसरे नागरिकों के समान ही है। ऐसे में उन्हें भी अधिकार है कि वह विवाह करें, परिवार बनाने के लिए बच्चा गोद लें और घर व संपत्ति बनाएं।

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समलैंगिकों से भेदभाव मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारी का कारण

गुरुग्राम मुख्यालय स्थित भारतीय मनोरोग सोसायटी ने 3 अप्रैल को समलैंगिकों की मन स्थिति के प्रति सचेत करते हुए अपने बयान में कहा कि  समलैंगिक, ट्रांसजेंडर या अलैंगिक व्यक्ति को अन्य नागरिकों की तरह ही रहने से रोकना भेदभाव को दर्शाता है। समलैंगिकों के साथ इस तरह का भेदभाव पूर्ण व्यवहार उनके मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित बीमारियों को जन्म दे सकता है।

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समलैंगिकों संबंध वैधानिक, विवाह अधिकार कानून की मांग

वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था। फिलहाल देश में समलैंगिक संबंध वैधानिक है। मनोचिकित्सक समुदाय के वर्ष 2018 के कोर्ट के फैसले की याद दिलाते हुए समलैंगिकता को सामान्य कामुकता बताई और कहा कि यह निश्चित तौर पर बीमारी नहीं है।
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मनोचिकित्सकों ने किया समान लिंग के विवाह का समर्थन

मनोचिकित्सक बाॅडी का कहना है कि एक समान लिंग वाले परिवार के लिए बच्चा गोद लेने के लिए चुनौती, कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन विवाह का अधिकार मिलने के बाद समलैंगिक अभिभावक बच्चों को लिंग तटस्थ, निष्पक्ष वातावरण में पालने लायक हो जाएंगे। उनका कहना है कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि परिवार, समुदाय, स्कूल और समाज सामान्य तौर पर ऐसे बच्चो के विकास को बचाने और बढ़ावा देने के लिए संवेदनशील हों और उनके साथ भेदभाव होने से रोकें।

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