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घर सजाते वक्त इस बात का हमेशा रखें ध्यान

Sun, 03 Aug 2014 07:39 AM IST
Updated Sun, 03 Aug 2014 07:39 AM IST
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home decor for arthritis patient

घर की साज-सज्जा में अक्सर हम कुछ-न-कुछ बदलाव करते रहते हैं। मगर क्या आपने कभी ऑर्थराइटिस के रोगी को ध्यान में रख इंटीरियर में बदलाव किया है? घर के सामान की सेटिंग रोगी के अनुकूल करके आप उन्हें दर्द से थोड़ी राहत तो दे ही सकती हैं।

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रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत से ऐसे काम होते हैं, जिन्हें करना आर्थराइटिस के रोगियों के लिए किसी झंझट से कम नहीं होता। गठिया की स्थिति में रोगी के लिए चलना, जोड़ों को बार-बार मोड़ना, झुकना, भार उठाना बहुत मुश्किल होता है।
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ऐसे में किचन, स्टोररूम, बाथरूम आदि की सेटिंग अगर रोगी को ध्यान में रखकर की जाए, तो उसकी जिंदगी को सरल बनाया जा सकता है।

हल्के सामान का करें इस्तेमाल

home decor for arthritis patient

कहने के लिए तो हैंगर में कुछ खास वजन नहीं होता, लेकिन पुराने तार के भारी हैंगर को पकड़ना और उन पर कपड़े सुखाना रोगी के लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि तार के हैंगर पर कपड़े आसानी से टिकते नहीं और ग्रिप बनाने के लिए रोगी को जोड़ों पर दबाव डालना पड़ता है।

ऐसे में घर में प्लास्टिक और लकड़ी के हैंगर रखना सही रहता है, क्योंकि इन पर कपड़े आसानी से रुक जाते हैं।

इसके अलावा, रोजमर्रा में काम आने वाली चीजें, जैसे कपड़े, जूते, एक्सेसरीज को अलमारी के ऊपर वाली शेल्फ में ही रखना चाहिए, ताकि रोगी को बार-बार सामान निकालने के लिए झुकना न पड़े।

दवाई लेना बनाएं आसान

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गठिया के दर्द में रोगी के लिए जोड़ों पर दबाव डालना पीड़ादायी होता है। इसलिए उनकी जरूरत की जो भी दवाइयां हों, उन्हें एक ऐसे बॉक्स में रखें, जो आसानी से खुल जाता हो। 

इससे मरीज को बार-बार दवाई निकालने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही, इसका फायदा ये भी है कि रोज की दवाई का चार्ट बन जाने से दवाई लेना भूल जाने की आशंका भी नहीं होती है। 

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छोटी बदलावों का बड़ा असर

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घर में किए गए छोटे-छोटे बदलाव, रोगी के दर्द पर बड़ा असर डालते हैं। मसलन, घर में लगे दरवाजों की गोल लॉक को बार-बार घुमाना रोगी के लिए मुश्किल होता है, क्योंकि इससे रोगी के हाथों के जोड़ों पर दबाव पड़ता है।

ऐसे में अगर घर में सिंपल हैंडल लगवाएं, तो रोगी को दरवाजे खोलने या बंद करने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक शौचालय को बदलकर इंग्लिश टॉयलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है।  इससे रोगी के घुटने पर जोर नहीं पड़ेगा।

थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घर का सामान इस्तेमाल करें। जैसे किचन में एक किलो दाल के डिब्बे को रोज उठाने और रखने से अच्छा है कि आप हफ्ते भर की दाल एक छोटे से डिब्बे में निकाल लें।

टाइट ढक्कन वाले जार यूज करने के बजाय पुश करने वाले डिब्बे प्रयोग में लाएं।

इसी तरह, बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट निकालने के लिए बार-बार सिंक के नीचे झुकने की जगह, आसानी से खुलने वाले जार में
डाल कर सिंक के पास ही रख लें। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान को अपनी पहुंच में ही रखें, ताकि उन्हें रोज उठाने और रखने में किसी तरह की दिक्कत न आए।

साथ ही, किचन में इस्तेमाल होने वाले डिब्बों पर लेबल लगा लें, ताकि उन्हें ढूंढने के लिए रोगी को जोड़ों पर जोर न डालना पड़े। अगर घर का सामान रोगी की पहुंच में होगा, तो रोगी को कोई भी सामान बार-बार उठाने में परेशानी नहीं होगी।

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