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जानिए बांस का खटिया और सीढ़ी के अलावा रसोई में महत्व

Sun, 12 Nov 2017 11:28 AM IST
पुष्पेश पंत / अमर उजाला,डेस्क
पुष्पेश पंत / अमर उजाला,डेस्क Updated Sun, 12 Nov 2017 11:28 AM IST
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recipe of bamboo
बांस के तने से फूटने वाली नई कोपल के डंठल का स्वाद निराला होता है। जो लोग इसे पसंद करते हैं, उन्हें लगता है कि इसमें मिर्च-मसाला न ‌मिलाकर, इसका कुदरती आनंद ही लेना सर्वश्रेष्ठ है। चीन की सरहद से जुड़े भारत के उत्तर-पूर्वी भू-भाग में  भी बांस खूब खाया जाता है। 
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पुराना मुहावरा है ‘उल्टे बांस बरेली को,’मगर जो लोग खाने-पीने के शौकीन हैं, उनका मानना है, ‘सीधे बांस बरेली को।’ कुछ पाठकों को यह बात अटपटी लग सकती है कि जिस बांस से फिल्मी लंबू, तंबू तानता है या जिससे खटिया या रंगरेज की सीढ़ी बनाई जाती है, उसका रसोई में क्या काम?
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जिन लोगों ने विदेशी व्यंजनों का रस लिया है, वह इस बात से अनजान नहीं कि चीनी खान-पान की परंपरा में बैम्बू शूट्स का विशेष स्थान है। बांस के तने से फूटने वाली नई कोपल के डंठल का स्वाद निराला होता है और जो लोग इसके प्रेमी हैं, उन्हें लगता कि इसमें मिर्च-मसाला नहीं मिलाया जाना चाहिए।  इसका कुदरती आनंद ही लेना सर्वश्रेष्ठ है। 
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recipe of bamboo
चीन की सरहद से जुड़े भारत के उत्तर-पूर्वी भू-भाग में जो राज्य सात बहनों के नाम से जाने जाते हैं, वहां भी बांस खूब खाया जाता है। असम में खाने के अलावा बांस की नली में भरकर झींगे और मछली भाप से पकाए जाते हैं, जिन्हें खास मौकों पर तैयार किया जाता है।

मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में ‘रतुई’ नाम की सलादनुमा चटनी मेहमानों का स्वागत करती है, जिसे नाममात्र के लिए ही उबाला जाता है। मगर इस पूरे अंचल में तीखे मिर्च-मसालों से बांस की कोपल को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता।

सुदूर दक्षिण में केरल में पारंपरिक रूप से कसे नारियल और चावल को मिलाकर भाप से पकाकर नाश्ते के लिए ‘पूट्ट’ बनाया जाता रहा है। इसे कडला करी अर्थात सूखे मटर की घुघनी के साथ परोसा जाता है। पूट्ट को भाप से पकाने के पहले इसे बांस की नली में भरा जाता था। आजकल इसके लिए स्टेनलेस स्टील की एक नली का प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसमें हरे-भरे बांस की वह सौंधी महक कहां।

recipe of bamboo
आज से कोई 60 साल पहले जब एक बार पिता के साथ दिल्ली आने का मौका मिला, तब उन्होंने कहा कि चलो आज तुम्हें बांस का मुरब्बा खिलवाएंगे। उस वक्त यह सुनकर बड़ा अजीब लगा। उन दिनों कनॉट प्लेस में अचार-मुरब्बे की एक बड़ी मशहूर दुकान हुआ करती थी।

मेजर्स हरनारायण गोपीनाथ की। वहां सेब, नाशपाती, आंवले और बेल के साथ-साथ बांस का असाधरण मुरब्बा भी बेचा जाता था। वहीं बांस के मुरब्बे को चखने का मौका मिला। उसके बाद आजतक यह मुरब्बा देखने तक को नहीं मिला।

हां, बांस का अचार जरूर झारखंड, छत्तीसगढ़ में अक्सर हमारी जुबान को चुभलाता रहा है। व्यावसायिक रूप से बनाए जाने वाले इस अचार में इस कदर मसाले और तेल मौजूद रहते हैं कि यह पता करना कठिन हो जाता है कि अचार बांस का है या खुंभ का।

recipe of bamboo
आजकल एक बार फिर नामी-गिरामी रेस्तरों ने अपने मेन्यू में बांस को जगह दी है। नई पीढ़ी की भूमंडलीय पसंद के अनुसार, आयात की विलायती सब्जियों की तश्तरी में ब्रसल्स स्प्राउट, बेबीकॉर्न, ब्रोकली और एसैपरेगस जैसी अनोखी सब्जियों के साथ यह भी देखने को मिलने लगा है। जहां ताज़ा बांस सुलभ न हो, वहां नमकीन पानी में टिन में बंद या पॉलिथीन के पाउच में भी बैम्बू शूट खरीदा जा सकता है।

बांस के बारे में सबसे रोचक बात यह है कि इसका प्रयोग आप अपनी पसंद या रुचि के अनुसार, कई तरह से शाकाहारी ही नहीं मांसाहारी व्यंजनों में भी कर सकते हैं। अगर मात्रा कम हो तो इसे सिर्फ सूप में या थाई करी में बदल सकते हैं और अगर दूसरी कोई अनोखी विदेशी सब्जी न हो, तो किसी मौसमी देसी सब्जी के साथ भी इसकी जुगलबंदी संभव है। 
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