खुशखबरी: अब मां के पेट में ही ठीक हो जाएगी ये लाइलाज बीमारी
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स्वीडन और लंदन के डॉक्टरों ने दावा किया है कि जल्द ही गर्भ में ही स्टेम सेल थेरेपी को किया जा सकेगा। इससे बच्चों में जन्म के समय से ही होने वाले भंगुर हड्डी रोग की रोकथाम में सफलता मिलेगी।
स्टेम सेल के इस परीक्षण को जनवरी में किया जाएगा। इस परीक्षण को स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और यूनाइटेड किंगडम के ओरमोंड स्ट्रीट अस्पताल की टीम करेगी।
भंगुर हड्डी रोग को ऑस्टियोजेनेसिस इंपरफेक्टा भी कहते हैं। ये बीमारी जन्म लेने वाले करीब 25 हजार बच्चों में से एक को होती है। इसके चलते बच्चों के शरीर में हड्डियों का विकास नहीं हो पाता है, हड्डियां कमजोर होती है और कई बार बच्चों में जन्म से ही टूटी हुई हड्डियां पाई जाती है।
क्या है स्टेम सेल?
स्टेम सेल या स्टेम कोशिका को 'मदर सेल' कहते हैं जो जन्म के बाद शिशु की नाभि से जुड़ी हुई नली के खून में पाए जाते हैं। मानव शरीर में सैकड़ों तरह की कोशिकाएं स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती हैं।
ये कोशिकाएं रोज शरीर को चलने, दिल की धड़कन, दिमाग के सोचने, किडनी के जरिए खून साफ करने, त्वचा की पुरानी कोशिकाओं को नई कोशिकाओं में बदलने आदि के लिए जिम्मेदार होती हैं। इन सभी कोशिकाओं को बनाने का काम स्टेम सेल ही करते हैं।
अमूमन जब किसी को चोट लगती है तो स्टेम सेल ही घाव भरने में काम आते हैं। स्टेम सेलों की मदद से हम जल्दी बूढ़े होने से बच जाते हैं।
भंगुर हड्डी रोग से पीड़ित एडम की आपबीती
बीबीसी के मुताबिक हेम्पशायर के रहने वाले एडम का जन्म टूटी हुई बांह और रीढ़ के हड्डी के साथ हुआ था। एडम के मुताबिक जब आप बच्चे होते हैं तो आपका दौड़ने, उछल-कूद करने का मन करता है। लेकिन उसके साथ सबसे बड़ी समस्या ये थी कि उसे हरवक्त चौकन्ना रहना पड़ता था। एडम की मानें तो कम से कम 40 बार उसे हड्डियों के टूटने से गुजरना पड़ा।
साल 2009 में एडम के पैर में फ्रैक्चर हुआ जिसके लिए 12 ऑपरेशन हुए। लेकिन आजतक एडम का पैर सही नहीं हो सका। अब उसका बायां पैर दाएं पैर से 4 इंच छोटा है। हाल ही में ग्रेजुएट हुए 21 वर्षीय एडम की मानें तो ये यकीन करना वाकई बहुत मुश्किल होता है कि आप किसी टेबल पर अपने पैर का अंगूठा रखें और अंगूठे की हड्डी टूट जाए।
एडम अफसोस जाहिर करते हुए कहते हैं कि ये एक ख्वाब ही है कि वो कभी जीवन में नॉर्मल हो पाएंगे। लेकिन ये अच्छी खबर है कि इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
वहीं कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की डॉक्टर सिसेलिया गोदरस्टोर्म कहती हैं कि हमें पूरा यकीन है कि अगर में हड्डियों के टूटने को कम कर पाए और उनके विकास के लिए उन्हें शक्ति प्रदान कर पाए तो इसका व्यापक असर दिखेगा।
बहरहाल, उम्मीद यही की जा रही है कि स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से चिकित्सा इतिहास में एक नई उपलब्धि जुड़ेगी। और भविष्य में कई बीमारियों का इलाज स्टेम सेल से सफल साबित होंगे।