बाजार में चाट खाएं मगर धनिया के पत्ते न डलवाएं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाजार में चाट खाने वालों के लिए चेतावनी। चटपटे चाट का आनंद जरूर लें, लेकिन धनिया के पत्ते ऊपर से न डलवाएं। ठीक से न धुले धनिया के पत्तों के माध्यम से कीड़े (टेपवर्म) पेट में चले जाते हैं जो पेट के रास्ते दिमाग तक पहुंच जाते हैं और फिर वहां उनके कारण नशों पर दबाव पड़ता है। इसके कारण कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
यह सामने आया है बंगलुरू स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल हेल्थ एंड न्यू साइंस (निमहांस) के डॉक्टरों के शोध में।
बंगलुरू से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित निमहांस में बना ब्रेन म्यूजियम दक्षिण पूर्व एशिया का अपनी तरह का पहला म्यूजियम है। म्यूजियम में 500 से ज्यादा मस्तिष्क रखे गए हैं जिन पर शोध का काम जारी है।
दिमाग में हार्ड डिस्क भी है और टेंपरेरी मेमोरी भी। थैलामस दिमाग का वह हिस्सा है जहां पर अहम छिपा है। अहम मस्तिष्क के बीचों बीच सुरक्षित स्थान पर होता है।
संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. एस के शंकर रिटायर होने के बाद बिना सैलरी के यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके मुताबिक हेलमेट लगाने मात्र से सड़क हादसे के अधिकांश घायलों की जान बचाई जा सकती है। उनके मुताबिक बाजार और होटलों में धनिया के पत्ते ठीक से धोए नहीं जाते। जो दिमाग तक कीड़े पहुंचने का बड़ा कारण हैं।
हेलमेट से ही बचाया जा सकता है सिर को
इस म्यूजियम में अधिकतर हेड इंजरी के बाद मरे लोगों के ब्रेन रखे हुए हैं। सभी मौतों में हेलमेट न लगाना मौत का बड़ा कारण साबित हुआ है। हेलमेट लगाकर ही सिर को चोट से बचाया जा सकता है। इसके अलावा भी कई ऐसे कारण हैं जिन पर मनुष्य ध्यान नहीं देता और बात दिमाग तक पहुंच जाती है।
स्पाइनल ब्रेक से बचने के लिए जरूरी है सीट बेल्ट
कार एक्सीडेंट के दौरान हल्का सा झटका भी स्पाइनल पर असर डालता है और इसमें मौजूद नसों का दिमाग से संपर्क समाप्त होने पर मौत हो जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक गोपीनाथ मुंडे के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा।
कान में तीली डालना घातक
कान में तीली डालकर, पेन की कैप और चाबी से खारिश करने वालों के लिए यह जानना जरूरी है कि दिमाग में कान के पास मौजूद हिस्सा इससे खराब होता है। मर्ज बढ़ने के साथ ही मरीज को बचाना मुश्किल होता है।
मोबाइल गर्म होते ही बात बंद करें
मोबाइल गर्म होते ही बात बंद कर देनी चाहिए। आठ से दस साल ऐसे ही बात करते रहे तो दिमाग की नसों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। म्यूजियम में एक ऐसा ब्रेन भी मौजूद है जिसकी मौत का कारण मोबाइल है।