Vaccination: भ्रामक प्रचार और अंधविश्वास के बीच टीकाकरण की जीत
शहरी हो या ग्रामीण, सभी क्षेत्रों में गरीबों, वंचितों और अशिक्षित समूहों के बीच टीकाकरण के अंतर को कम करना एक प्राथमिकता होनी चाहिए। आखिरकार टीकाकरण न केवल बच्चों को बल्कि समूचे समुदाय को लाभ पहुंचाता है।
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प्रोफेसर पीसी जोशी,
दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व कार्यवाहक कुलपति
महामारियां अक्सर गलत व भ्रामक सूचनाओं, अंधविश्वास और साजिश की कहानियों को पनपने का भरपूर अवसर देती हैं। किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के बीच जनता तक सही सूचनाएं समय पर पहुंचाना सबसे अहम जिम्मेदारी होती है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सबसे दिल छू लेने वाला पहलू यह है कि आम आदमी भी जागरूकता फैलाने या मदद करने के लिए नए विचारों के साथ आगे आए। टीकाकरण समानता का एक मुख्य पैमाना है। यदि किसी स्थान पर टीकाकरण की सेवाएं नहीं हैं, तो यह भी काफी हद तक संभव है कि वहां पानी और स्वच्छता जैसी सुविधाएं भी नहीं होंगी। ऐसे इलाकों के बच्चे अक्सर निमोनिया, दस्त और खसरे जैसे रोगों के शिकार होते हैं। टीके इन बीमारियों से आसानी से बचाव करते हैं। इसलिए शहरी हो या ग्रामीण, सभी क्षेत्रों में गरीबों, वंचितों और अशिक्षित समूहों के बीच टीकाकरण के अंतर को कम करना एक प्राथमिकता होनी चाहिए। आखिरकार टीकाकरण न केवल बच्चों को बल्कि समूचे समुदाय को लाभ पहुंचाता है।
टीकाकरण ने सीरिंज के प्रति डर किया खत्म
राजस्थान के सिरोही जिले की गरासिया जनजाति के मामले को लेते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गरासिया जनजाति की जिले में आबादी लगभग 28 फीसदी होकर 1,036,346 है। यह जनजाति शादी को लेकर अपने अपरंपरागत दृष्टिकोण के लिए जानी जाती है। इस जनजाति के किसी भी व्यक्ति का शरीर वयस्क होने तक छेदना प्रतिबंधित है। इसी दृष्टिकोण के कारण उनमें सीरिंज के प्रति भी डर पैदा हुआ। यह संदेह, आस्था, इतिहास और रीति-रिवाजों के एक अजीब मिश्रण का नतीजा है। हर गरासिया गांव में परंपरागत रूप से एक 'भोपा' होता है, जो आस्था पर मरहम लगाने का काम करता है।
टीकाकरण जागरूकता अभियान से अफवाहें हुईं दूर
हकीकत यह है कि इस समुदाय के अधिकांश बुजुर्गों ने कभी टीका नहीं लगवाया। आज भी जब गर्भवती महिला टीका लगवाने आती है या नव प्रसूता बच्चे को टीके लगवाने आती है, तो उन्हें रोका जाता है। चूंकि टीका लगने के बाद बच्चे एक दो दिन बीमार हो जाते हैं तो उसे इस खुराक का दुष्प्रभाव बताया जाता है। समुदाय के बुजुर्ग सीरिंज को कोई बला मानते हैं। ऐसे में एनजीओ को ऐसी अफवाहों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ती है।
जनजातियों में टीकाकरण को बढ़ावा
हम तीन दशक से जमीनी काम कर रहे हैं, ताकि एक समुदाय में बदलाव आ सके। पिछले करीब डेढ़ दशक में हमने देखा है कि टीकाकरण को लेकर ज्यादातर महिलाओं ने अपने संकोच को त्याग दिया है। वे मिशन इंद्रधनुष के बारे में जानती हैं और अपने बच्चों का टीकाकरण कराने आती हैं।
अफवाहें दूर करने में एनजीओ की भूमिका
यूनिसेफ द्वारा समर्थित एक गैर सरकारी संगठन 'जन चेतना संस्थान' की ऋचा औदिच्य ने बताया कि यह संस्थान गरासिया महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर काम करता है। हालांकि सदी की शुरुआत के बाद से इस दिशा में की गई सारी प्रगति महामारी के कारण धुल जाने के खतरे में थी। इसके अलावा टीके के कारण प्रजनन क्षमता व दीर्घायु पर असर होने की दुष्प्रचार युक्त साजिशें भी गरासिया समुदाय में पैठ बनाए हुए थीं। इसलिए इस समुदाय के लोगों का टीकाकरण सभी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। सिविल सोसायटी से लेकर लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए भी जनजाति को टीकों की खुराक लेने के लिए तैयार करना और उन तक टीके पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
सरकारी स्तर पर प्रयास
गरासिया बस्तियां आमतौर पर विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई हैं, उनके मकान ज्यादातर पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों को दो तरह का दृष्टिकोण अपनाना पड़ा। एक स्थानीय कार्यकर्ताओं को शामिल करना और दूसरा राज्य सरकार से प्रोत्साहन दिलाना। सरकारी अधिकारियों को राशन की दुकानों पर तैनात किया गया, यहां आसानी से लोग मिल जाते हैं। यहां टीकाकरण रिकॉर्ड में लोगों के नाम की तस्दीक की गई। वहीं, नागरिकों में टीके के प्रति विश्वास कायम करने के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, प्रभावशाली समुदाय के नेताओं, पुजारियों और परंपरागत चिकित्सकों तथा समुदाय की सम्मानित हस्तियों को पहले टीका लगाया गया। अबू रोड ब्लॉक में आज पहली खुराक पाने वालों की टीकाकरण दर 93 फीसदी और दोनों खुराक पाने वालों की दर 81 फीसदी है। नियमित टीकाकरण एक बार फिर तेज हो गया है और कोविड टीकाकरण की दिशा में लगातार प्रगति हुई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं वंचितों तक पहुंचाना
यूनिसेफ टीकाकरण में भारत सरकार के साथ साझेदारी कर रहा है। टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं वंचित बच्चों और समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए। यह सुनिश्चित कराने के लिए योजना, उनके कार्यान्यन और विभिन्न रणनीतियों की निगरानी के जरिए यूनिसेफ ऐसे वंचितों की पहचान कर आवश्यक स्वास्थ्य और टीकाकरण सेवाओं को जारी रखने के उद्देश्य का समर्थन कर रहा है। भारत सरकार की साझेदारी ने समुदायों के बीच बच्चों का टीकाकरण करने और नियमित टीकाकरण को मजबूत करने के लिए जागरूकता और विश्वास पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सिर्फ जानकारी देने से ज्यादा जरूरी होता है लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना। इसके लिए अंदरूनी नजरिया समझने की जरूरत होती है। हम जो करते हैं और जिस पर यकीन करते हैं, उसके बीच में करीबी संबंध होता है। लोग जो करते हैं, उन्हें उनकी आस्था या यकीन के नजरिए से देखना होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उनके व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है। लोगों के व्यवहार में सार्थक और गहन बदलाव लाने वाले वार्तालाप का समर्थक किया जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।