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लड़कियां ही नहीं लड़के भी होते हैं बांझ, इस तकनीक से बन सकते हैं पिता

Fri, 16 Nov 2018 09:47 AM IST
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Advertorial Updated Fri, 16 Nov 2018 09:47 AM IST
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ICSI Treatment (Intracytoplasmic Sperm Injection) services in india
- फोटो : file photo

इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) पुरुष बांझपन के उपचार का सफल तरीका है। ICSI को IVF (इन विंट्रो फर्टिलाइजेशन) की उन्नत तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ICSI पुरुष बांझपन के उपचार के सबसे सफल तरीके के रूप में सामने आया है। जिन पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होती है, वहां आईवीएफ तकनीक ज्यादा कारगर नहीं होती है ऐसी स्थिति में ICSI तकनीक से लाभ होने की संभावनाए अधिक रहती हैं । इस प्रक्रिया महिला के अंडो को शरीर से बाहर निकल कर लैब में हर परिपक्व अंडे के केंद्र में एक शुक्राणु को इंजेक्ट किया जाता है जिससे भ्रूण बन जाता है जिसे बाद में महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

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ICSI Treatment (Intracytoplasmic Sperm Injection) services in india
पुरुष बांझपन के उपचार का सफल तरीका है इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन - फोटो : File Photo

क्या है ICSI के लाभ
ICSI के बारे में बताते हुए इन्दिरा आई वी एफ लाजपतनगर दिल्ली सेण्टर की आई वी एफ स्पेशलिस्ट डॉ. सागरिका अग्रवाल कहती हैं एक समय था जब पुरुष बांझपन की परिस्थिति में शुक्राणुदाता की शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था, लेकिन ICSI ट्रीटमेंट ने उन पुरुषों को भी पिता बनने का सुख दिया है, जिनमें शुक्राणुओं की संख्या बेहद कम होती है या निल होती है ।ICSI का काम है मेल पार्टनर के शुक्राणुओं में से स्वस्थ शुक्राणु चुनना और उसके प्रयोग से गर्भधारण को संभव बनाना।


ऐसे होता ICSI ट्रीटमेंट
ICSI ट्रीटमेंट के चक्र में 4 से 6 सप्ताह लगता  हैं।महिला के अंडकोष को अधिक अंडे उत्पन्न  करने के लिए विशेष दवा दी जाती है। एक बार जब अंडे तैयार हो जाते हैं, तब उन्हें निकल कर पुरुष के शुक्राणु को उसमे इंजेक्ट किया जाता है जिससे निषेचन की संभावनाए अधिक रहती हैं।

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ICSI Treatment (Intracytoplasmic Sperm Injection) services in india
इस तकनीक का सफलता प्रतिशत अधिक होने का कारण यह है पुरुष के कम अच्छे शुक्राणुओ से भी गर्भधारण किया जा सकता है। - फोटो : social media

इक्सी और आई वी एफ में क्या अन्तर
आई वी एफ में लैब में महिला के अंडो के सामने पुरुष के शुक्राणुओ को छोड़ दिया है, शुक्राणु अंडो में प्रवेश कर जाते है जिससे निषेचन की प्रक्रिया होती है जबकि इक्सी में एक अंडे में एक शुक्राणु का प्रवेश करवाया जाता है इससे निषेचन की संभावनाए अधिक रहती है | इस तकनीक का सफलता प्रतिशत अधिक होने का कारण यह है पुरुष के कम अच्छे शुक्राणुओ से भी गर्भधारण किया जा सकता है।


फर्टिलाइजेशन के 5 दिन बाद गर्भ में रखा  जाता है भ्रूण
इन्दिरा आई वी एफ इलाहाबाद की सेण्टर की आई वी एफ स्पेशलिस्ट डॉ. रीमा सिरकार कहती हैं प्रकिया वाले दिन पुरुष के वीर्य का नमूना लिया जाता है, अगर वीर्य को बाहर निकालने में परेशानी हो, तब अंडकोष की थैली को सर्जरी की मदद से एकत्र कर लिया जाता है। इसके बाद विशेषज्ञ स्वस्थ शुक्राणु का चुनाव करते हैं और फिर निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन के लिए दो से तीन दिन का समय लगता है। निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन के 5 दिन बाद, तैयार भ्रूण को गर्भकोष में नली की मदद से रख दिया जाता है। यह कार्य बेहद उन्नयत उपकरणों से किया जाता है, जिससे कि संक्रमण का खतरा न रहे और सफलता मिल जाये ।


शुन्य शुक्राणु की स्थिति में क्या करें
कई पुरुषों में निल स्पर्म की समस्या भी सामने आती है ऐसी परिस्थिति में इक्सी तकनीक कारगर साबित हुई है। कई पुरुष ऐसे होते हैं जिनके अंडकोष में शुक्राणु बनते तो हैं लेकिन बाहर नहीं आ पाते है, ऐसे में टेस्टीक्यूलर बायप्सी के माध्यम से अंडकोष से शुक्राणु लेकर गर्भधारण करवाया जा सकता है ।


इन लक्षणों के आधार पर ICSI की मदद लेने को कहते हैं डॉक्टर

-शुक्राणु संबंधी कोई परेशानी होने के कारण बांझपन हो।

-शुक्राणुओं की कम गिनती, खराब क्वालिटी, शुक्राणुओं की कम गतिशीलता, खराब आकार जैसी समस्याएं।

-जब स्वस्थ शुक्राणु तो पैदा हों, लेकिन बाहर आने में रुकावट हो ।

आई वी एफ की उन्नत तकनीक इक्सी पुरुष बाँझपन के लिए सर्वाधिक लाभदायक साबित हो रही है।

नोटः यह लेख एक विज्ञापन है। निःसंतानता से जुड़ा आपका कोई भी सवाल है तो इन्दिरा आईवीएफ कि वेबसाइट विजिट करें, अपनी समस्या लिखें या एक्सपर्ट डॉ. से बात करने के लिए कॉल करें - 07229944449। 

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