अमर उजाला विशेष: विशेषज्ञों से जानिए ओमिक्रॉन से जुड़े हर जरूरी सवाल के जवाब, ताकि आप भी रहें सुरक्षित
- देश में शुरू हो चुका है ओमिक्रॉन का कम्युनिटी ट्रॉसमिशन।
- ओमिक्रॉन वैरिएंट अधिक संक्रामक है, पर घातक नहीं।
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विस्तार
Medically Reviewed by-
डॉ आशीष जैन (श्वास रोग विशेषज्ञ, मैक्स अस्पताल, दिल्ली)
डॉ दीपक सक्सेना (महामारी रोग विशेषज्ञ)
भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में हालात बदतर होते जा रहे हैं, वहीं भारत में भी कुछ ही दिनों में कोरोना के इस वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 350 से अधिक हो गई है। अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना का यह वैरिएंट काफी संक्रामक है और इससे उन लोगों को भी संक्रमण का खतरा हो सकता है, जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है। वहीं एक रिपोर्ट में आईआईटी के विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि अगर हालात बिगड़ते रहे तो संभवत: फरवरी तक देश में तीसरी लहर आ सकती है।
कोरोना के इस नए वैरिएंट को लेकर आपके मन में भी कई तरह के सवाल होंगे। अमर उजाला ने खास पहल करते हुए इन्हीं सवालों के उत्तर जानने के लिए एक वेब-शो का आयोजन किया, जिसमें देश में जाने माने श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन और महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना ने सभी जरूरी सवालों के जबाब दिए। आइए आगे इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है ओमिक्रॉन वैरिएंट?
महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना बताते हैं, किसी भी वायरस को जीवित रहने के लिए खुद को म्यूटेट करते रहना जरूरी होता है। जिस तरह से पहले डेल्टा, अल्फा, बीटा जैसे कोरोना के तमाम वैरिएंट्स सामने आए थे, ओमिक्रॉन वैरिएंट भी वैसा ही है। कोरोना के सामने आए मामलों में करीब 70 फीसदी लोगों की ट्रैवेल हिस्ट्री रही है जबकि 30 फीसदी की नहीं है। जिससे पता चलता है कि ओमिक्रॉन का कम्युनिटी ट्रॉसमिशन हो रहा है, जिससे लोगों को विशेष सावधान रहने की जरूरत है।
ओमिक्रॉन वैरिएंट के लक्षण क्या हैं, कैसे पहचानें?
इस सवाल के जवाब में डॉ आशीष जैन बताते हैं, ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में फिलहाल उतनी ही जानकारियां अभी तक सामने आई हैं जितनी इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के डॉक्टर और शोधकर्ता बता रहे हैं। फिलहाल यह माना जा रहा है कि यह वायरस का एक माइल्ड रूप है। डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन की प्रकृति माइल्ड है, इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसपर आने वाले दिनों में अध्ययनों से ज्यादा बेहतर पता चलेगा। ओमिक्रॉन संक्रमण के लक्षण हल्के ही देखे जा रहे हैं।
गंभीर संक्रमण के मामले ज्यादा नहीं
डॉ दीपक बताते हैं, ओमिक्रॉन की संक्रामता दर अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक है। हालांकि राहत की बात यह है कि ओमिक्रॉन के जो डेटा सामने आ रहे हैं, उससे यह पता चलता है कि इसकी हॉस्पिटलाइजेशन रेट काफी कम है। इससे गंभीर मामलों के केस बहुत ही कम सामने आए हैं। आने वाले दिनों में यह और अच्छी तरह समझने को मिलेगा।
क्या विशेष आयुवर्ग के लोगों में अधिक हो रहा है संक्रमण?
डॉ दीपक बताते हैं, ऐसा माना जा रहा था कि जिस आयु वर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है, मतलब खासतौर पर बच्चों को संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। हालांकि भारत के संदर्भ में ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जो इसकी पुष्टि करता हो। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोगों में संक्रमण की पहचान की जा रही है, वहां के भी शोधकर्ता फिलहाल विशेष आयुवर्ग में संक्रमण के बारे में नहीं बता पा रहे हैं। खतरा सभी लोगों में है, सभी लोगों को सुरक्षा के उपाय करते रहने चाहिए।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।