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बड़ी कामयाबी: वैज्ञानिकों ने बना ली चमत्कारी वैक्सीन, शरीर में बनने ही नहीं देगी कैंसर कोशिकाएं

Fri, 12 Jun 2026 08:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 12 Jun 2026 08:05 PM IST
सार

वैज्ञानिक एक नई वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, जिसे LynchVax कहा जा रहा है। यह कोई सामान्य वैक्सीन नहीं है। इसका उद्देश्य  कैंसर बनने की प्रक्रिया को शुरू होने से पहले ही रोकना है। माना जा रहा है कि ओवेरियन और बाउल कैंसर के खतरे को इससे कम किया जा सकेगा। 

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LynchVax	vaccine that could prevent from developing bowel and ovarian cancer know details in hindi
कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

कैंसर का नाम सुनते ही हमारे मन में डर, चिंता और अनिश्चितता घर कर जाती है। दुनियाभर में हर साल करोड़ों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और लाखों लोगों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में होने वाली हर छह में से लगभग एक मौत इसी बीमारी के कारण होती है। अब कम उम्र के लोग भी न सिर्फ इस जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं, बल्कि उनकी मौत भी हो रही है। 

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मेडिकल साइंस ने कई चमत्कारी दवाओं और अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर कैंसर के शिकार लोगों के इलाज को आसान बनाने में मदद की है। सर्वाइकल और लिवर जैसे कैंसर को रोकने के लिए पहले से ही वैक्सीन उपलब्ध हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने दो और खतरनाक कैंसर के जोखिमों को कम करने वाली वैक्सीन के बारे में जानकारी दी है।
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हालिया अध्ययन में सामने आया है कि शोधकर्ता बाउल (कोलोरेक्टल) कैंसर और ओवेरियन कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। ये दोनों कैंसर दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों की जान लेते हैं। 
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इस क्रांतिकारी वैक्सीन को लिंचवैक्स (LynchVax) नाम दिया गया है।  इसका उद्देश्य कैंसर बनने की प्रक्रिया को शुरू होने से ही रोकना है। यानी ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह प्रशिक्षित करेगी कि वह कैंसर बनने वाली असामान्य कोशिकाओं को शुरुआती चरण में ही पहचानकर खत्म कर दे।

LynchVax	vaccine that could prevent from developing bowel and ovarian cancer know details in hindi
बाउल कैंसर का कम हो सकेगा खतरा - फोटो : Freepik.com

बाउल और ओवेरियन कैंसर को रोक सकती है ये वैक्सीन

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाउल और ओवेरियन कैंसर से बचाव वाली इस वैक्सीन के जल्द ही ट्रायल शुरू होने वाले हैं, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या ये वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह से तैयार कर सकती है कि वह कैंसर बनने से पहले ही संदिग्ध और असामान्य कोशिकाओं (सेल्स) को पहचानकर खत्म कर दे?
 

  • यह ट्रायल खासतौर पर उन लोगों पर किया जाएगा जिन्हें लिंच सिंड्रोम नाम की आनुवंशिक स्थिति है। 
  • लिंच सिंड्रोम शरीर में कई प्रकार के कैंसर जैसे पेट या आंत (कोलोरेक्टल कैंसर) और गर्भाशय (एंडोमेट्रियल) कैंसर होने के जोखिम  80 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।
  • जीन में म्यूटेशन के कारण ये खतरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलता जाता है।
  • आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि अकेले इंग्लैंड में लगभग 1.75 लाख लोग इस सिंड्रोम से प्रभावित हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 5 प्रतिशत लोगोंयानी करीब 10 हजार लोगों को ही पता है कि उन्हें यह समस्या है।

LynchVax	vaccine that could prevent from developing bowel and ovarian cancer know details in hindi
कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन का ट्रायल - फोटो : Adobe Stock

इम्यून सिस्टम को कैंसर के खिलाफ तैयार करेगी ये वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना के सहयोग से ये ट्रायल किया जाना है जिसमें प्रतिभागियों को mRNA-4194 नाम की वैक्सीन दी जाएगी। 
 

  • इसके बाद वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि उनके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कैसी प्रतिक्रिया देती है, कौन-सी खुराक सबसे बेहतर रहती है और क्या यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है?
  • अध्ययन का दूसरा चरण 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसमें ऑक्सफोर्ड सहित ब्रिटेन के कई चिकित्सा केंद्र शामिल होंगे, ताकि बड़े स्तर पर वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा को परखा जा सके।
  • इस पूरे ट्रायल का मुख्य उद्देश्य इम्यून सिस्टम को पहले से तैयार करना है। यानी शरीर को यह सिखाना कि कौन-सी कोशिकाएं आगे चलकर कैंसर में बदल सकती हैं और उन्हें शुरुआती चरण में ही खत्म कर देना है।

LynchVax	vaccine that could prevent from developing bowel and ovarian cancer know details in hindi
कैंसर के खिलाफ लड़ाई में मिली बड़ी कामयाबी - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

प्रमुख शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च यूके के वरिष्ठ प्रोफेसर डेविड चर्च बताते हैं कि लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में जीवनभर कैंसर का खतरा बना रहता है।
 

  • कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी महिला को पहले गर्भाशय में कैंसर हुआ और कुछ साल बाद उसे बाउल कैंसर हो गया। या फिर पहले बाउल कैंसर और बाद में कोई दूसरा कैंसर विकसित हो सकता है।
  • प्रोफेसर चर्च का कहना है कि वैक्सीन के लिए जिन जैविक लक्ष्यों (टारगेट्स) को चुना गया है, वे लिंच सिंड्रोम से जुड़े कई तरह के कैंसरों में समान रूप से पाए जाते हैं। 
  • यदि यह वैक्सीन सफल रहती है, तो यह एक साथ कई प्रकार के कैंसरों से सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।



शरीर में कैंसर बनने ही नहीं देगी ये वैक्सीन

लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में समय के साथ कोशिकाओं के भीतर कई तरह के म्यूटेशन होते रहते हैं। यही बदलाव कोशिकाओं को कैंसर में बदलने की आशंका बढ़ा देते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि इन बदलावों को प्रतिरक्षा प्रणाली पहचान सकती है । यदि इम्यून सिस्टम को सही तरीके से प्रशिक्षित और सक्रिय किया जाए, तो वह इन असामान्य कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें कैंसर बनने से पहले ही खत्म कर सकता है।
 

  • प्रोफेसर चर्च के अनुसार यह mRNA वैक्सीन शरीर को ये पहचानने में मदद कर सकती है  कि किन संदिग्ध कोशिकाओं को पहचानना है और उन पर हमला कैसे करना है?
  • अगर यह साबित हो जाता है कि इम्यून सिस्टम को कैंसर से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ियों को पहचानने और उनके खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है, तो यह तरीका दूसरे प्रकार के कैंसरों की रोकथाम में भी उपयोगी साबित हो सकता है।


अगर यह वैक्सीन सफल साबित होती है, तो चिकित्सा विज्ञान में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि हो सकती है। अब तक ज्यादातर कैंसर का इलाज तब शुरू होता है जब बीमारी सामने आ चुकी होती है, लेकिन यह वैक्सीन पहली बार कैंसर को बनने से पहले ही रोकने की दिशा में उम्मीद जगाती है।




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स्रोत:
Vaccines for cancer prevention

 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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