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साथ में अगर कोई हो तो ज्यादा खाना खाते हैं हम, वजह भी जान लीजिए

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 15 Jun 2018 08:53 AM IST
If somebody is accompanying you then you will eat more food
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बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं खाना हमेशा सबके साथ मिल-बांट कर खाना चाहिए। तन्हा खाना अच्छी नजर से नहीं देखा जाता। बुज़ुर्गों का तर्क है कि मिल-जुलकर खाने से बरकत होती है लेकिन मॉडर्न रिसर्च बताती हैं कि हम ग्रुप में बैठ कर ज़्यादा खाना खाते हैं। हम उन व्यंजनों का जायका भी ले लेते हैं, जिन्हें हम अकेले में शायद कभी ना खाएं।
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वैसे साथ मिलकर खाने का चलन बहुत पुराने जमाने से रहा है। जब इंसान शिकार करके पेट पालता था, तब भी वो झुंड में बैठकर खाता था। रिसर्च तो ये भी साबित करती है कि अकेले खाना खाने से इंसान डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो जाता है। कहते हैं कि साथ बैठने-उठने वालों के खान-पान की आदतें भी हम पर अपना असर डालती हैं।

हेल्थ मनोचिकित्सक जॉन दी कास्त्रो ने साल 1994 में करीब 500 लोगों पर रिसर्च की। इस रिसर्च सैम्पल में अकेले खाना खाने वाले और लोगों के साथ खाने वाले दोनों शामिल थे। पाया गया कि ग्रुप में खाने वालों ने खाना ज़्यादा खाया।

एक और रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि ग्रुप में खाने वाले 40 फीसद लोग ज़्यादा आइसक्रीम खाते है। 10 फीसद लोगों ने मैक्रोनी ज़्यादा खाई। जबकि जो लोग अकेले बैठ कर खाना खाते हैं वो इन चीजों को कई मर्तबा हाथ तक नहीं लगाते। 
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क्या है वजह?

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