दिल के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि एक नई दवा बैड कॉलेस्ट्रॉल को कम कर दिल के दौरे और स्ट्रोक के मामलों में अप्रत्याशित कमी ला सकती है। 27,000 मरीजों पर किए गए अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेस्ट के नतीजों का मतलब है कि अब ये दवा लाखों लोग इस्तेमाल कर सकेंगे। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि शोध के नतीजे दुनिया के सबसे बड़े हत्यारे (हार्ट अटैक) से मुकाबले की दिशा में बहुत बड़ा कदम हैं। हर साल दुनियाभर में करीब डेढ़ करोड़ लोग दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक से मर जाते हैं।
दिल की दुनिया में बैड कॉलेस्ट्रॉल खलनायक की भूमिका निभाता है। इसकी वजह से रक्त की धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं जिसका नतीजा ये होता है कि दिल और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन का पहुंचना मुश्किल हो जाता है और दिल का दौरा आने की परिस्थितियां बन जाती हैं।
बैड कॉलेस्ट्रॉल
इसी वजह से लाखों लोग स्टैटिंस नाम की दवा का सेवन करते हैं जो खराब कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटा देती है। दिल की बीमारी से लड़ने वाली नई दवा का नाम है इवोलोक्यूमैब (Evolocumab)। ये दवा लीवर के काम करने के तरीके में बदलाव लाती है और बैड कॉलेस्ट्रॉल में भी कमी लाती है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर पीटर सेवर कहते हैं, 'ये दवा स्टैटिंस के मुकाबले ज्यादा असरदार है।' उन्होंने दवा कंपनी ऐमजेन से मिली पैसे की मदद से ब्रिटेन में दवा के ट्रायल का इंतजाम किया था।
अब तक के सबसे अच्छे नतीजे
प्रोफेसर सेवर ने बीबीसी को बताया, 'दवा के टेस्ट का नतीजा ये हुआ कि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत कम हो गया और हमने देखा कि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर पहले दवा के सेवन से जितना कम होता था उससे भी कम हो गया।' ट्रायल में शामिल मरीज पहले से ही स्टैटिंस ले रहे थे और इस नई दवा से उन पर हर्ट अटैक का खतरा और कम हो गया। प्रोफेसर सेवर ने कहा, 'इस दवा से मरीजों पर खतरा 20 फीसदी और कम हो जाएगा जो कि एक बड़ी बात है। पिछले 20 सालों में कॉलेस्ट्रॉल कम करने की दवा के लिहाज से देखें तो शायद ये अब तक के सबसे अच्छे ट्रायल नतीजे हैं।'
ट्रायल से मिली जानकारी को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित किया गया और इसे अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक बैठक में भी साझा किया गया। शोध से पता चला कि दो साल के ट्रायल में नई दवा ले रहे हर 74 मरीजों के एक हार्ट अटैक और स्ट्रोक को रोका जा सका। हालांकि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि इस दवा से वाकई जिंदगियां बचाई जा रही हैं।
दिल के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर
इवोलोक्यूमैब (Evolocumab) एक एंटीबॉडी है जिसके जरिए हमारा इम्यून सिस्टम संक्रमण से बचाव करता है। हालांकि इसे हमारे लीवर में मौजूद पीसीएसके9 (PCSK9) नाम के प्रोटीन को लक्ष्य कर डिजाइन किया गया है। ये आखिरकार हमारे रक्त से खराब कॉलेस्ट्रॉल को कम कर दिल को बेहतर बनाता है। दूसरे ट्रायल्स में पता चला है कि ऐसे रोग प्रतिरोधियों ने बैड कॉलेस्ट्रॉल का स्तर 60 फीसदी तक तक किया है और ऐमजेन अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो इस पर नजर रख रही है। इस एंटीबॉडी को हर दो से चार हफ्ते में सूई के जरिए त्वचा में पहुंचाया जाता है।
खर्च
हालांकि प्रोफेसर सेवर का कहना है, 'ये दवाएं शायद स्टैटिंस की जरूरत को खत्म नहीं करेंगी क्योंकि कई ऐसे मरीज हैं जिनमें कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा होता है और ऐसे मरीजों के मामलों में हमें एक से ज्यादा दवा की जरूरत होगी ताकि कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नीचे लाया जा सके।' ऐसा माना जा रहा है कि ब्रिटेन के एनएचएस (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा) को हर साल एक मरीज पर 2,000 पाउंड का खर्च आएगा। ब्रिटेन में उन मरीजों को इवोलोक्यूमैब पहले से ही दी जा रही है जिनपर स्टैटिंस का असर नहीं हो रहा। ब्रिटिश हर्ट फाउंडेशन के प्रोफेसर सर नीलेश समानी का कहना है, 'ये ट्रायल एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।'