दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब दो करोड़ 61 लाख के पार पहुंच गए हैं जबकि इस वायरस ने आठ लाख 64 हजार से अधिक लोगों की जान ले ली है। कोरोना की कारगर और प्रभावी वैक्सीन बनाने का काम तो वैसे दुनियाभर में चल रहा है, लेकिन इस वायरस के बदलते स्वरूप ने वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मध्य प्रदेश में भोपाल स्थित एम्स में कोरोना को लेकर शोध चल रहा है, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। शोध के मुताबिक, यह वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है यानी अपना रूप बदल रहा है, जिसकी वजह से वैक्सीन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। एम्स भोपाल के निदेशक प्रोफेसर सरमन सिंह के नेतृत्व में हुए शोध में ये बातें पता चली हैं।
Coronavirus: कोरोना की वैक्सीन कारगर हो पाएगी या नहीं? AIIMS के रिसर्च ने बढ़ाई चिंता
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए दुनियाभर में बनाई जा रही वैक्सीन शायद ही उसपर काम कर पाए और इसका सबसे बड़ा कारण शायद ये है कि यह वायरस अपना रूप तेजी से बदल रहा है। इस वजह से वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक भी परेशान हैं।
कोरोना ने अब तक कितनी बार बदला अपना स्वरूप?
भोपाल एम्स समेत कई देशों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, जो कोरोना वायरस चीन से फैला था, उसका स्वरूप डी 614जी था। उसके बाद से यह अब तक 83 बार म्यूटेट हो चुका है यानी अपना रूप बदल चुका है। प्रोफेसर सरमन सिंह का कहना है कि स्टडी के आधार पर यह कहना अभी मुश्किल है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन पर मौजूदा वैक्सीन कितनी प्रभावी होगी।
अमेरिका में 60 बार हुआ कोरोना वायरस का म्यूटेशन
शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, कोरोना वायरस सबसे ज्यादा अमेरिका में अपना रूप बदल चुका है। यहां करीब 60 बार इस वायरस का म्यूटेशन हुआ है। इसके अलावा मलयेशिया में भी आठ बार कोरोना वायरस का म्यूटेशन देखा गया है जबकि भारत में यह पांच बार अपना रूप बदल चुका है। ऐसे में जब भी वैज्ञानिकों को ये लगता है कि अब उन्होंने एक कारगर वैक्सीन बना ली है, तब तक यह वायरस अपना रूप बदल चुका होता है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना का बदलता स्वरूप इंसान के शरीर में एंटीबॉडी भी नहीं बनने दे रहा है। उनका कहना है कि इसके म्यूटेशन की रफ्तार इसे खत्म करने के लिए किए जा रहे उपायों से भी तीन गुना तेज है, जिससे काफी मुश्किलें पैदा हो रही हैं। इसके अलावा शोध में यह भी सामने आया है कि म्यूटेशन के कारण प्लाज्मा थैरेपी भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में यह कहना अभी मुश्किल है कि जो वैक्सीन आएगी, वह इसके बदले हुए स्वरूप पर असरदार होगी या नहीं।