लॉकडाउन के दौर में कोविड-19 से लड़ाई के लिए मास्क पहनना और सामाजिक दूरी, साबुन और पानी का अहम योगदान रहा है। ये अब ऐसी चीजें बन गई हैं जिन्हें याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है और शरीर और दिमाग इन्हें आदतों में ले आए हैं, लेकिन ये आदत अब से छह महीने पहले शायद ही किसी को रही हो। मास्क, सेल्फ-आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोरोना के खिलाफ हथियारों के बीच हैंडवॉश को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
साबुन या हैंडवॉश, जानिए किससे जल्दी खत्म होता है कोरोना वायरस
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हाथ धोने की सलाह भूलने लगे लोग
छह महीने में संक्रमण के बढ़ते मामलों और लॉकडाउन को लेकर बनी एक कनफ्यूज्ड ग्लोबल तस्वीर ने हाथ धोने की सलाह को हाशिए पर ला दिया है। मास्क पहनने और फेस कवर करने के खिलाफ कुछ लोगों में बढ़ते गुस्से के बीच हाथ धोने को लेकर बनी जागरूकता धीरे-धीरे घटती जा रही है। एक इथियोपियाई स्टडी में कहा गया है कि अस्पताल जाने वाले 1,000 लोगों में से एक फीसदी से भी कम लोग ऐसे हैं जो कि ठीक ढंग से हाथ धोते हैं, लेकिन क्या सलाह बदल दी गई थी?
एक्सपर्ट्स कहते हैं, ऐसा बिलकुल नहीं हुआ है बल्कि, वे इसे दोगुना असरदार मानते हैं। बोस्टन की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री और केमिकल बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर थॉमस गिलबर्ट कहते हैं कि कोरोना वायरस के केमिकल मेकअप को खत्म करने का सबसे आसान तरीका सस्ते साबुन और गर्म पानी से हाथ धोना है। वे कहते हैं, 'इन वायरस में मेंब्रेंस होती है जो कि जेनेटिक पार्टिकल्स को घेरे होती है जिसे लिपिड मेंब्रेंस कहते हैं। चूंकि ये तैलीय, चिकनाईयुक्त स्ट्रक्चर होते हैं, ऐसे में इन्हें साबुन और पानी से खत्म किया जा सकता है। साबुन और पानी से इनका बाहरी खोल घुल जाता है और ह्यूमन सेल्स पर असर डालने वाले जेनेटिक मैटेरियल जो कि वायरस की कॉपियां बना लेता है, वह बह जाता है और खत्म हो जाता है।'
गिल्बर्ट कहते हैं, 'मैंने अभी तक हाथ धोने में लगने वाले वक्त को कम करने जैसा कुछ नहीं सुना है।' वे कहते हैं, 'आपको अपने हाथ गीले करने चाहिए, साबुन लेना चाहिए और तसल्ली से 20 सेकेंड्स तक हाथों को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। कोई भी कोना या जगह अछूती नहीं रहनी चाहिए।'
गिल्बर्ट कहते हैं कि इतने वक्त में लिपिड मेंब्रेन और साबुन के बीच रासायनिक क्रिया पूरी हो जाती है। वे कहते हैं कि इसके अन्य फायदे भी होते हैं। साबुन मैटेरियल को साफ करने में भी अच्छा काम करता है। वे कहते हैं कि अगर गर्म पानी और साबुन से ये काम करते हैं तो ऐसा और जल्दी हो जाता है।
साबुन है जरूरी
यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के मॉलिक्यूलर साइंस के प्रोफेसर मार्टिन माइकेलिस कहते हैं कि केवल पानी इस वायरस को खत्म नहीं कर सकता है। वे कहते हैं, 'खाना बनाते वक्त अगर आपके हाथ में तेल लग जाता है तो इसे केवल पानी से साफ करना मुश्किल भरा होता है। आपको साबुन की जरूरत पड़ती है। कोरोना वायरस के लिए भी साबुन की जरूरत ठीक उसी तरह से होती है। इससे वायरस के ऊपर चढ़ा लिपिड का आवरण हट जाता है और वायरस निष्क्रिय हो जाता है।'
हाथ धोने के प्रभावों को बड़े पैमाने पर हैंड सैनिटाइजर्स के इस्तेमाल ने किनारे कर दिया है। लोग घर से बाहर जाते वक्त सैनिटाइजर्स की छोटी बोतल साथ रखते हैं। साथ ही दुकानों या दफ्तरों में जाते वक्त भी लोगों के हाथ सैनिटाइजर्स से साफ कराए जाते हैं।
थॉमस गिल्बर्ट कहते हैं कि अगर आप सारा दिन घर पर रहते हैं और आपके घर हर रोज 20 अजनबी नहीं आते हैं तो हाथ धोने की वैसी जरूरत नहीं है। गिल्बर्ट कहते हैं, 'अपनी कार में या अपने घर के दरवाजे पर सैनिटाइजर की बोतल रखना खराब नहीं है, लेकिन ये चीजें तभी अच्छी हैं जबकि आपके घर पर सिंक, साबुन और पानी न हो। मैं हैंड सैनिटाइजर के मुकाबले हमेशा साबुन और पानी को तरजीह देता हूं।'