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सरकार का दावा: खतरनाक नहीं N440K स्ट्रेन, लेकिन इस वैरिएंट की वजह से बढ़ रहे संक्रमण के मामले

Thu, 06 May 2021 02:47 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 06 May 2021 02:47 PM IST
सार

  • कोरोना का N440K वैरिएंट दिसंबर 2020 और जनवरी और फरवरी 2021 में प्रचलन में था
  • वर्तमान में B.1.617 और B.1 आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना में पाए गए प्रमुख वैरिएंट हैं, जो बहुत संक्रामक हैं

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Coronavirus in India double mutant variant B1617 is very infectious
कोरोना वायरस - फोटो : iStock

विस्तार

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन लाखों की संख्या में संक्रमित मरीज मिल रहे हैं, जबकि संक्रमण के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पहले यह माना जा रहा था कि ब्रिटेन में पहली बार पाया कोरोना का अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट, जिसे B.1.1.7 के नाम से जाना जाता है, भारत में तबाही मचा रहा है। फिर उसके बाद अभी हाल ही में कहा गया कि कोरोना के N440K वैरिएंट से आंध्र प्रदेश में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन अब आंध्र प्रदेश के कोविड कमांड सेंटर के प्रमुख डॉ. के. एस. जवाहर रेड्डी ने कहा है कि कोरोना का यह वैरिएंट दिसंबर 2020 और जनवरी और फरवरी 2021 में प्रचलन में था। 

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उन्होंने कहा कि मार्च में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण में भारी गिरावट आई और मौजूदा पॉजिटिविटी दर में N440K वैरिएंट की हिस्सेदारी न्यूनतम है। वर्तमान में B.1.617 और B.1 आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना में पाए गए प्रमुख वैरिएंट हैं, जो बहुत संक्रामक हैं। 
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चूंकि कोरोना का N440K वैरिएंट आंध्र प्रदेश में खोजा गया था, इसलिए इसे 'एपी स्ट्रेन' नाम दिया गया था। सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने इसकी खोज की थी और इसे 15 गुना अधिक संक्रामक बताया गया था। वैज्ञानिकों का कहना था कि कोरोना के N440K वैरिएंट की वजह से लोग तीन से चार दिन में ही बीमार हो जा रहे हैं।  

क्या है कोरोना का B.1.617 वैरिएंट? 

कोरोना के B.1.617 वैरिएंट को 'डबल म्यूटेंट' और 'इंडियन स्ट्रेन' भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार भारत में ही पाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में यह कहा था कि B.1.617 वैरिएंट में ऐसे म्यूटेंट हैं जो वायरस को अधिक संक्रामक बनाते हैं और जो वैक्सीन की प्रतिरक्षा से भी बच सकते हैं। B.1.617 नाम का कोरोना वायरस वैरिएंट भारत के अलावा दक्षिण एशिया के 17 देशों में भी मिल चुका है।


हालांकि अमेरिका के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथोनी फौसी ने अभी हाल ही में यह कहा था कि लैब अध्ययनों से प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि भारत द्वारा विकसित कोवैक्सिन कोरोना वायरस के बी.1.617 वैरिएंट को निष्प्रभावी करने में सक्षम है।

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