Cancer on Rise: कैंसर की गिरफ्त में युवा आबादी, सामने आए पिछले 30 साल के डरा देने वाले आंकड़े
पिछले तीन दशकों में युवाओं में कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर का निदान और मौतों के मामले जो साल 1990 में 28% थे, वो साल 2019 में बढ़कर 79% हो गए है।
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पिछले कुछ दशकों के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि दुनियाभर में कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ा है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर हो या फिर हार्ट की बीमारी, बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। पर जो बीमारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है वह है- कैंसर।
1950-60 के दशक में कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता था, पर हालिया रिपोर्टस बताते हैं कि अब कम उम्र के लोग भी तेजी से इस गंभीर और घातक रोग का शिकार होते जा रहे हैं।
मेडिकल जर्नल बीएमजे ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में बड़ी संख्या में युवा आबादी कैंसर का शिकार हो रही है। पिछले तीन दशकों में युवाओं में कैंसर के मामलों में तीन गुना से ज्यादा की वृद्धि हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर का निदान और मौतों के मामले जो साल 1990 में 28% थे, वो साल 2019 में बढ़कर 79% हो गए है।
शोधकर्ताओं ने साल 2050 तक इन आंकड़ों के और भी बढ़ने की आशंका जताते हुए लोगों को सावधान किया है।
30 से कम उम्र के लोग भी हो रहे हैं कैंसर का शिकार
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर शोध बताते हैं कि खराब होती लाइफस्टाइल और गड़बड़ खान-पान के साथ पर्यावरणीय-आनुवांशिक कारक कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते है। हालांकि जिस तरह से 30 से कम उम्र के लोग तमाम प्रकार के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं, धूम्रपान न करने वालों को लंग्स कैंसर हो रहा है यहां तक कि फिजिकली एक्टिव लोग भी इससे अछूते नहीं हैं, इसने कैंसर के कारणों के मायाजाल को और मजबूत कर दिया है।
एक गंभीर सवाल कि जो कैंसर अब तक बुढ़ापे की बीमारी था, वह जीवन के शुरुआती दशकों में ही क्यों हो रहा है? इसका जवाब स्पष्ट रूप से वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है।
(ये भी पढ़िए- क्या जंक फूड्स खाने से कैंसर होता है?)
इन कैंसर के मामलों में तेजी से हुई वृद्धि
प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि वैसे तो कई प्रकार के कैंसर मामले बढ़ रहे हैं पर अमेरिका में कम उम्र में होने वाले कैंसर में स्तन कैंसर सबसे आम हैं। इसके अलावा 50 से कम उम्र के लोगों में पाचन अंगों जैसे कोलन, मलाशय, पैंक्रियाज और पेट के कैंसर के मामलों में भी तेजी से उछाल आया है।
अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि साल 1950 की तुलना में आज के युवाओं में कोलन कैंसर का जोखिम दोगुना और मलाशय में होने वाले कैंसर का जोखिम चार गुना अधिक देखा जा रहा है।
बढ़ते कैंसर को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शोधकर्ता कहते हैं कि कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए आनुवांशिकता के साथ लाइफस्टाइल की गड़बड़ आदतें जैसे अल्कोहल-धूम्रपान की आदत, अल्ट्रा- प्रोसेस्ड फूड्स का बढ़ता सेवन प्रमुख हो सकता है। इसके अलावा हाल के कई अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक के कारण बढ़ते कैंसर और अन्य बीमारियों के खतरे को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है।
अमेरिका स्थित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी की निदेशक डॉ. कैथी एंग कहती हैं, 'कुछ केस हैरान करने वाले हैं। जैसे युवा, धूम्रपान न करने वाले लोग लंग कैंसर का शिकार हो रहे है। शाकाहारी और फिजिकली फिट रहने वालो में भी कैंसर बढ़ रहा है, इसलिए ऐसा लगता है कि कैंसर के लिए अन्य कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं जिसको समझने के लिए हमें और विस्तार से अध्ययन की आवश्यकता है।
कैंसर की रोकथाम के लिए किए जा रहे हैं कई शोध
हाल के वर्षो में कैंसर के रोकथाम और बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने कई दवाएं और टीके तैयार किए हैं। माना जा रहा है इनकी मदद से इस घातक बीमारी से बचाव में आसानी हो सकती है।
इसी क्रम में ब्रिटेन के वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं जो इस घातक बीमारी को एक-दो नहीं बल्कि 20 साल पहले ही रोक सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल दिग्गज कंपनी जीएसके के साथ मिलकर एक ऐसी वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं जो शरीर में 'अज्ञात कैंसर' सेल्स का पता लगा सकती है। यहां पढ़िए पूरी खबर
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स्रोत और संदर्भ
Global trends in incidence, death, burden and risk factors of early-onset cancer from 1990 to 2019
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