सावधान! वायु प्रदूषण ने पैदा किया नया खतरा, आत्महत्या की तरफ बढ़ रहे हैं लोग
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वायु प्रदूषण सुनने में इतना खतरनाक नहीं लगता जितना खतरनाक हमारे शरीर और दिमाग पर असर डालता है। 21वीं सदी में वायु प्रदूषण ही एक ऐसी चीज है जो शहरी ही नहीं बल्कि देहात और झुग्गी-झोपड़ियों में पल रहे जीवन को लीलने की तरफ अग्रसर है। अगर आप शुद्ध हवा नहीं ले रहे हैं तो आपका जीवन कितना बचेगा? वायु प्रदूषण का सबसे घातक असर युवाओं और बुजुर्गों के साथ ही बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस वक्त दुनियाभर के कई देशों के साथ ही भारत भी वायु प्रदूषण की चपेट में है और देश की राजनधानी दिल्ली वायु प्रदूषण का घर बनी हुई है!
दक्षिण कोरिया के सियोल शहर में तो सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाले दिन लोग घरों से बाहर तक नहीं निकलते। शुद्ध हवा अब हमारे लिए एक सपना बनती जा रही है और युवाओं में अवसाद से लेकर घबराहट तक वायु प्रदूषण की वजह से बढ़ रही है। एक नए अध्ययन का तो यहां तक कहना है कि वायु प्रदूषण की वजह से हम शारीरिक तौर पर ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी बीमार हो रहे हैं। बच्चों में वायु प्रदूषण की वजह से मानसिक बीमारियां बढ़ रही हैं।
जानलेवा वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण जानलेवा साबित हो सकता है। इसकी वजह से अस्थमा ही नहीं बल्कि दिल का दौरा और प्रसव पूर्व बच्चे का जन्म एवं आपकी आयु कम हो सकती है। अगल-अलग अध्ययनों का कहना है कि वायु प्रदूषण का सामना करने की वजह से किशोरावस्था में अवसाद, व्यग्रता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अध्ययन 'एन्वायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव्स' पत्रिका में छपा है।
वंचितों के लिए ज्यादा जानलेवा वायु प्रदूषण
इस अध्ययन में जो बात सबसे ज्यादा चौंकाती है वह यह है कि वायु प्रदूषण उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है जो वंचित हैं। ऐसे लोगों में वायु प्रदूषण की वजह से आत्महत्या की प्रवृत्ति ज्यादा हो सकती है।अमेरिका के सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्तां ने अपने अध्ययन में यह बात कही है। यह पहली बार है जब किसी अध्ययन में वायु प्रदूषण का सीधा संबंध व्यग्रता और आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसी मानसिक बीमारी से सीधे जोड़ा गया है।
इस अध्ययन का कहना है कि जो लोग गंदी बस्तियों और उसके आसपास रहते हैं उनके स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ी वजह ट्रैफिक की वजह से हो रहा प्रदूषण (ट्रैप) है। ट्रैप के कारण ही बच्चों में तनाव और चिंता की समस्या बढ़ रही है और मस्तिष्क के तंत्रिका तंत्र में प्रभाव पड़ रहा है। भारत ही नहीं बल्कि मैक्सिको सिटी, जकार्ता, नई दिल्ली, लॉस एंजेलिस, पेरिस और लंदन भी वायु प्रदूषण की चपेट में है।