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Hindi News ›   Lifestyle ›   Digvijay Diwas 2024 Swami Vivekananda Speech in Chicago Dharm Sansad

Digvijay Diwas 2024: क्यों मनाया जाता है दिग्विजय दिवस, जानिए स्वामी विवेकानंद से नाता

Wed, 11 Sep 2024 09:10 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 11 Sep 2024 09:10 AM IST
सार

दिग्विजय दिवस का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और विचारों को समाज में फैलाना और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के विकास में योगदान देना है। यह दिन भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और विश्व शांति के विचारों का प्रसार करने के लिए मनाया जाता है।
 

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Digvijay Diwas 2024 Swami Vivekananda Speech in Chicago Dharm Sansad
दिग्विजय दिवस 2024 स्वामी विवेकानंद का भाषण - फोटो : amar ujala

विस्तार

Swami Vivekananda Speech in Chicago Dharm Sansad: 11 सितंबर को दिग्विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारत के स्वर्णिम इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिग्विजय दिवस का नाता स्वामी विवेकानंद से है। दिग्विजय दिवस स्वामी विवेकानंद की विश्वविजयी यात्रा और उनके अद्वितीय योगदान की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस मुख्यतः स्वामी विवेकानंद द्वारा 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म महासभा में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की स्मृति में मनाया जाता है। इस भाषण ने भारत की महान संस्कृति और हिंदू धर्म की उदारता को विश्व पटल पर मजबूती से स्थापित किया। इस वर्ष दिग्विजय दिवस की 131वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

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क्यों मनाया जाता है दिग्विजय दिवस ?

दिग्विजय दिवस का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और विचारों को समाज में फैलाना और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के विकास में योगदान देना है। यह दिन भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और विश्व शांति के विचारों का प्रसार करने के लिए मनाया जाता है।

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उनका शिकागो की धर्म संसद में दिया गया भाषण धर्म, देश, विचारधारा और राजनीति की सीमाओं से परे था, क्योंकि यह सभी के लिए सार्वभौमिक था। हालांकि, यह केवल स्वामी विवेकानंद के जादुई शब्द नहीं थे; यह चरित्र, निस्वार्थ परिव्राजक जीवन और तपस्या के वर्ष थे जिन्होंने भारत के प्रति विश्व के दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया। 

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स्वामी विवेकानंद ने अपने इस भाषण की शुरुआत "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" से की, जिसने वहाँ उपस्थित जनसमूह का दिल जीत लिया। उनके विचारों और संदेश ने विश्वभर में भारतीयता और हिंदुत्व के प्रति नई जागरूकता फैलाई।



स्वामी विवेकानंद का भाषण

अमेरिका में मेरे भाइयों और बहनों मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के सताए लोगों को शरण में रखा है।  संबोधन को आगे बढ़ाते हुए कहा, मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से भी धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है।

स्वामी विवेकानंद आगे बोले,

''मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया और हम सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं। जिस तरह अलग-अलग जगहों से निकली नदियां, अलग रास्तों से होकर समुद्र में मिलती हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य भी अपनी इच्छा से अलग रास्ते चुनता है। ये रास्ते दिखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं लेकिन ये सभी ईश्वर तक ही जाते हैं।''

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