साहिर लुधियानवी: मशहूर 5 फ़िल्मी गीत
साहिर लुधियानवी जितने बड़े शायर थे उतने ही बड़े गीतकार भी। जैसे उनके शेर ज़बानी याद रहते हैं वैसे ही उनके लिखे गीत भी लोग उसी चाव से गुनगुनाते हैं। 60-70 के दशक के मशहूर गीत अगर कोई याद करे तो उसमें 5 गीत साहिर के लिखे होंगे, इतना बड़ा उनका फ़लक था। प्रस्तुत हैं उनके लिए मशहूर 5 गीत।
तुम अगर साथ देने का वा'दा करो
मैं यूँ ही मस्त नग़्मे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो
मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ
कितने जल्वे फ़ज़ाओं में बिखरे मगर
मैं ने अब तक किसी को पुकारा नहीं
तुम को देखा तो नज़रें ये कहने लगीं
हम को चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मैं हर इक शय से नज़रें चुराता रहूँ
मैं ने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संग-ए-मरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुक़द्दर हूँ मैं
मैं समझता हूँ तुम मेरी तक़दीर हो
तुम अगर मुझ को अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ
मेरे दिल में आज क्या है
तू कहे तो मैं बता दूँ
तेरी ज़ुल्फ़ फिर सवारूँ
तेरी माँग फिर सजा दूँ
मुझे देवता बनाकर, तेरी चाहतों ने पूजा
मुझे देवता बनाकर, तेरी चाहतों ने पूजा
मेरा प्यार कह रहा है, मैं तुझे खुदा बना दूँ
कोई ढूँढ्ने भी आए, तो हमें ना ढूँढ़ पाए
कोई ढूँढ्ने भी आए, तो हमें ना ढूँढ़ पाए
तू मुझे कहीं छुपा दे, मैं तुझे कहीं छुपा दूँ
मेरे बाज़ुओं मे आकर, तेरा दर्द चैन पाए
मेरे बाज़ुओं मे आकर, तेरा दर्द चैन पाए
तेरे गेसुओं मे छुपकर, मैं जहाँ के ग़म भुला दूँ
अभी न जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं
अभी अभी तो आई हो अभी अभी तो
अभी अभी तो आई हो, बहार बनके छाई हो
हवा ज़रा महक तो ले, नज़र ज़रा बहक तो ले
ये शाम ढल तो ले ज़रा ये दिल सम्भल तो ले ज़रा
मैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूँट पी तो लूँ
नशे के घूँट पी तो लूँ
अभी तो कुछ कहाँअहीं, अभी तो कुछ सुना नहीं
अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं
सितारे झिलमिला उठे, सितारे झिलमिला उठे, चराग़ जगमगा उठे
बस अब न मुझको टोकना
बस अब न मुझको टोकना, न बढ़के राह रोकना
अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी
यही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भरा
जो खत्म हो किसी जगह ये ऐसा सिलसिला नहीं
अभी नहीं अभी नहीं
नहीं नहीं नहीं नहीं
अधूरी आस, अधूरी आस छोड़के, अधूरी प्यास छोड़के
जो रोज़ यूँ ही जाओगी तो किस तरह निभाओगी
कि ज़िंदगी की राह में, जवाँ दिलों की चाह में
कई मुक़ाम आएंगे जो हम को आज़माएंगे
बुरा न मानो बात का ये प्यार है गिला नहीं
हाँ, यही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भरा
हाँ, दिल अभी भरा नहीं
नहीं नहीं नहीं नहीं
उड़ें जब-जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
हों जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे न नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
जिंद मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी सदके
के जहाँ मेरा यार बसता
जिंद मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
जिंद मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागिन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिंद मेरिये
जाएं कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती नज़ारे हम क्या देखें
तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती नज़ारे हम क्या देखें
पिघले बदन तेरे तपती निगाहों से
शोलों की आँच आए बर्फ़ीली राहों से
लगे कदमों से आग लिपटती नज़ारे हम क्या देखें
रंगों की बरखा है खुशबू का साथ है
किसको पता है अब दिन है की रात है
लगे दुनिया भी आज सिमटती नज़ारे हम क्या देखें
पलकों पे फैला तेरी पलकों का साया है
चेहरे ने तेरे मेरा चेहरा छुपाया है
तेरे जलवों की धुँध नहीं छँटती नज़ारे हम क्या देखें