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'मां शिक्षक बनाना चाहती थी, पर मैंने साहित्य की पूजा की'
विवियन गोर्निक/अमेरिकी पत्रकार एवं संस्मरण लेखिका
Updated Fri, 01 Dec 2017 11:07 AM IST
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विवियन गोर्निक
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'मेरी मां रोमांटिक उपन्यासों की मुरीद थीं। उन्होंने मात्र हाई स्कूल तक शिक्षा पाई थी। जब मैं थोड़ी बड़ी हुई, तो मैं उन्हें पढ़ने के लिए किताबें लाकर देती थी। मैं उन्हें जो भी किताबें देती, वह सब पढ़ डालती थी। बाद में जब मैं उनसे पूछती कि किताब कैसी थी, तो वह मुझे गंभीरतापूर्वक किताबों की अच्छाई या बुराई के बारे में बताती थीं।
एक बार मैंने उन्हें एक लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासकार स्टोर्म जेम्सन की आत्मकथा पढ़ने के लिए दी। जब कुछ दिनों बाद मैंने उनसे पूछा कि किताब कैसी लगी, तो उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जब मैं इस किताब को खत्म करूंगी, तो बहुत अकेलापन महसूस करूंगी। तभी मुझे लगा कि एक लेखक को भला किसी पाठक से और क्या चाहिए!
उन्होंने मुझे व्यावसायिक के बजाय शैक्षणिक पाठ्यक्रम लेने के लिए प्रेरित किया। वह चाहती थीं कि मैं शिक्षक बनूं, ताकि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं। लेकिन जब मैंने स्नातक किया और उन्हें पता चला कि मैं शिक्षक नहीं बन रही हूं, तो वह बहुत निराश हो गईं। मैं जिस छोटी-सी दुनिया से ताल्लुक रखती थी, वहां विरोधाभास भी कम नहीं थे।
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असल में हम इसलिए कॉलेज गए, क्योंकि हम क्लर्क जैसी छोटी नौकरियां नहीं करना चाहते थे। वास्तव में हमारे विचार बहुत अस्पष्ट थे। उच्च शिक्षा हासिल करना महज संस्कृति का हिस्सा था। लेकिन मैं और मेरी दोस्त साहित्य की पूजा करते थे। हम समझते थे कि जो कुछ भी हम जानते हैं, या हमारे जो भी सरोकार हैं, सब साहित्य में है। इसलिए मैंने शिक्षक बनने के बजाय साहित्य लेखन को अपनाया।'
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एक बार मैंने उन्हें एक लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासकार स्टोर्म जेम्सन की आत्मकथा पढ़ने के लिए दी। जब कुछ दिनों बाद मैंने उनसे पूछा कि किताब कैसी लगी, तो उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जब मैं इस किताब को खत्म करूंगी, तो बहुत अकेलापन महसूस करूंगी। तभी मुझे लगा कि एक लेखक को भला किसी पाठक से और क्या चाहिए!
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उन्होंने मुझे व्यावसायिक के बजाय शैक्षणिक पाठ्यक्रम लेने के लिए प्रेरित किया। वह चाहती थीं कि मैं शिक्षक बनूं, ताकि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं। लेकिन जब मैंने स्नातक किया और उन्हें पता चला कि मैं शिक्षक नहीं बन रही हूं, तो वह बहुत निराश हो गईं। मैं जिस छोटी-सी दुनिया से ताल्लुक रखती थी, वहां विरोधाभास भी कम नहीं थे।
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असल में हम इसलिए कॉलेज गए, क्योंकि हम क्लर्क जैसी छोटी नौकरियां नहीं करना चाहते थे। वास्तव में हमारे विचार बहुत अस्पष्ट थे। उच्च शिक्षा हासिल करना महज संस्कृति का हिस्सा था। लेकिन मैं और मेरी दोस्त साहित्य की पूजा करते थे। हम समझते थे कि जो कुछ भी हम जानते हैं, या हमारे जो भी सरोकार हैं, सब साहित्य में है। इसलिए मैंने शिक्षक बनने के बजाय साहित्य लेखन को अपनाया।'