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Supreme Court: भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार को नहीं मिल सकती शिकायत निवारण की अनुमति

Sat, 26 Feb 2022 08:44 PM IST
सुभाष कुमार जॉब डेस्क, अमर उजाला
जॉब डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Sat, 26 Feb 2022 08:44 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अपील  को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती का विज्ञापन साल 1999 में जारी किया गया था और अब साल 2022 आ चुका है। इतना लंबा समय खुद में ही अपीलकर्ता को राहत देने की दिशा में एक बाधा है।

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Supreme Court said that Candidate can't be permitted grievance redressal at any stage of recruitment process
Supreme Court - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार को भर्ती की प्रक्रिया के दौरान किसी चरण में शिकायत निवारण ते लिए संपर्क करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम. एम. सुंदरेश की पीठ ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया को कभी न कभी बंद करना ही होता है। इस कारण उम्मीदवार को किसी चरण में उसकी ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के निवारण ते संपर्क करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भले ही उसकी शिकायत सही क्यों न हो। 

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7 सालों तक किया नियुक्ति पत्र का इंतजार
पीठ एक अपीलकर्ता की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने साल 1999 में उपसहायक अभियंता के पद पर आवेदन किया था। अपीलकर्ता ने मेडिकल परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आने में देरी के कारण उसे नियुक्ति नहीं मिल पाई थी। अपीलकर्ता ने बताया कि उसने 7 सालों तक नियुक्ति पत्र का इंतजार किया, इसके बाद राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया। अपीलकर्ता  ने बताया कि न्यायाधिकरण की ओर से राहत न मिलने के बाद उसने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी। यहां उसकी अपील  यह कहकर खारिज कर दी गई थी कि वह बांग्लादेशी नागरिक है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अपील 
सुप्रीम कोर्ट ने अपील  को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती का विज्ञापन साल 1999 में जारी किया गया था और अब साल 2022 आ चुका है। इतना लंबा समय खुद में ही अपीलकर्ता को राहत देने की दिशा में एक बाधा है। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता की यह दलील नहीं मानी जा सकती की उसने सात साल तक नियुक्ति पत्र का इंतजार किया और इसके बाद राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण का रुख किया। पीठ ने कहा कि हम अपीलकर्ता की ओर से सवाल खड़े किए जाने वाले पुलिस सत्यापन रिपोर्ट की तथ्यात्मक शुद्धता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। इस अपील को खारिज किया जा रहा है। 

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