SSC GD 2018: मेडिकल फिट अभ्यर्थियों का CAPF में भर्ती संघर्ष, दो साल में आमरण अनशन, पैदल मार्च व पुलिसिया मार
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विस्तार
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही के पद पर नियुक्ति के लिए दो साल से संघर्ष कर रहे SSC GD 2018 के मेडिकल फिट अभ्यर्थियों को गत दिसंबर में दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली थी। उन्हें भरोसा था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप से उन्हें ज्वाइनिंग मिल जाएगी, मगर ऐसा कुछ नहीं हो सका। सोमवार को देशभर के हजारों अभ्यर्थियों ने ट्वीटर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया है।अभ्यर्थियों ने #SSCGD18_joining_nhi_to_vote_nhi और #SSCGD2018_HMO_JOINING_DO हैशटेग के माध्यम से अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा, उन्हें संघर्ष करते हुए दो वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है। इस अवधि में अभ्यर्थियों ने एक माह का आमरण अनशन किया। उसके बाद पुलिस की प्रताड़ना झेलते हुए जब इन अभ्यर्थियों ने नागपुर से दिल्ली तक का पैदल मार्च शुरू किया। हरियाणा पुलिस ने इन्हें बॉर्डर पर ही रोक दिया। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि जब दिल्ली हाई कोर्ट ने खाली पड़े पदों को भरने का आदेश दिया है, तो सरकार उस बाबत मौन क्यों हैं। युवाओं को न तो एसएससी की ओर कुछ बताया जा रहा है और न ही केंद्रीय गृह मंत्रालय से ही कोई संतोषजनक जवाब मिल पाया है।यह भी पढ़ें: SSC GD Exam Answer Key: एसएससी जीडी उम्मीदवार आंसर की पर 25 तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति, जानें कब आएगा रिजल्ट
मेडिकल फिट अभ्यर्थियों के जरिए खाली पद भरने की मांग
सीएपीएफ में ज्वाइनिंग देने की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू किए गए अभियान के अंतर्गत अभ्यर्थियों ने अपने ट्वीट में लिखा, हमारा कसूर क्या है। एसएससीजीडी 2018 की भर्ती का फाइनल रिजल्ट चौथे साल में आया था। लगभग साठ हजार खाली पदों की एवज में करीब 54 हजार युवाओं को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में ज्वाइनिंग दी गई। इससे पहले 109552 युवाओं को मेडिकल फिट घोषित किया गया था। इन्हें ज्वाइनिंग लेटर मिलने की पूरी उम्मीद थी। इन अभ्यर्थियों ने बताया, भर्ती का रिजल्ट चार साल में आया था। इसके चलते अनेक अभ्यर्थी ओवरएज हो गए। उनके पास दूसरा चांस भी नहीं बचा। चूंकि इन युवाओं ने मेडिकल एवं शारीरिक परीक्षा पास कर ली थी, इसलिए वे ज्वाइनिंग देने की मांग कर रहे थे। युवाओं का कहना था कि 2018 में जितने पदों के लिए भर्ती निकली थी, उससे लगभग पांच हजार कम पदों पर ज्वाइनिंग दी गई। जो पद खाली रह गए हैं, उन्हें मेडिकल फिट अभ्यर्थियों के जरिए भरने की मांग की गई।
रिक्त पदों को भरने से अभ्यर्थियों का भला होगा
मेडिकल फिट अभ्यर्थियों का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 दिसंबर को दिए अपने फैसले में 13 जून 2000 को डीओपीटी द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा था, सरकार के पास जो वैकेंसी बची हैं, उनके भरने से अभ्यर्थियों का भला होगा। दूसरा, इससे सरकार का खर्च बचेगा, क्योंकि उसे दोबारा से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करनी पड़ेगी। एसएसबी व सीएपीएफ में जो रिक्त पद हैं, उन्हें भर्ती प्रक्रिया में पहले से शामिल रहे अभ्यर्थियों के माध्यम से भरा जाए। इसमें मेरिट, श्रेणी और स्टेट डोमिसाइल देखा जाए। कोर्ट ने सरकार को नियुक्ति पत्र देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अभ्यर्थियों को वरिष्ठता भी देनी होगी, मगर उन्हें पिछले वेतन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद अभ्यर्थियों ने एसएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय में भर्ती स्टेट्स मालूम करने का प्रयास किया, मगर कहीं से कोई सूचना नहीं मिली। हाई कोर्ट ने कई याचिकाओं को मिलाकर उनकी एक साथ सुनवाई करते हुए वह फैसला दिया था। सीएपीएफ में भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को पास करते हुए 152226 अभ्यर्थी मेडिकल के लिए भेजे गए। इनमें से 109552 अभ्यर्थी पास हो गए। जब रिजल्ट घोषित किया गया तो 54411 को नियुक्ति पत्र देने की बात सामने आई।
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डीओपीटी के इस कार्यालय ज्ञापन का दिया हवाला
13 जून 2000 को जारी डीओपीटी का कार्यालय ज्ञापन कहता है कि जो वैकेंसी नहीं भरी जाती, उन्हें आगे नहीं ले जाना है। उसी वर्ष वेटिंग लिस्ट/रिजर्व लिस्ट से भरा जाना है। उक्त केस से जुड़ी आठ याचिकाओं में कहा गया कि 2018 का एग्जाम था, जिसमें अभ्यर्थी क्वॉलिफाइंग अंकों से थोड़ा पीछे रह गए हैं। इसमें 5981 एक्स-सर्विसमैन की वैकेंसी थी। उसमें से 172 का चयन हुआ, बाकी पद खाली रह गए। 260 लोगों का रिजल्ट रोक दिया गया। इसके पीछे वेरिफिकेशन का कारण बताया गया। याचिका में कहा गया कि अगर ये वैकेंसी भरी जाती हैं तो हमारा चयन हो सकता है। सरकारी काउंसिल ने भर्ती प्रक्रिया के समर्थन में तर्क देते हुए कहा था, उम्मीदवार ज्यादा थे, इसके चलते भर्ती में ज्यादा समय लग गया। जो उम्मीदवार क्वालिफाइंग करते हैं, उसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें नियुक्ति का हक मिल जाएगा। उसके बाद कट ऑफ मार्क्स सूची बनती है, तब जाकर नियुक्ति होती है। सरकारी काउंसिल ने भर्ती के तरीके को सही बताया। एसएससीजीडी 2018 के एग्जाम में 3041284 प्रत्याशी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा में अपीयर हुए। इनमें से 554903 आवेदक शारीरिक परीक्षा के लिए शॉर्ट लिस्ट किए गए। इसके बाद 152226 अभ्यर्थियों को मेडिकल जांच के लिए चयनित किया गया। 29 लोगों ने कोर्ट से आदेश लेकर अपना मेडिकल कराया। कुल 109552 अभ्यर्थी मेडिकल में पास हुए। सरकार ने इसमें वेटिंग लिस्ट का कोई प्रावधान नहीं रखा, इसके स्पोर्ट में अदालत के समक्ष कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।
छह हजार पदों पर अटका था मामला
सीएपीएफ में लगभग छह हजार पदों पर भर्ती का मामला अटका था। सरकारी वकील ने कहा था, वैकेंसी की संख्या अलग-अलग राज्यों के लिए तय है। एक राज्य के लिए तय पदों को दूसरे प्रदेश के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जा सकता। उसी राज्य से अभ्यर्थी लेने होंगे। उसमें मेरिट और श्रेणी का भी ध्यान रखना होगा। 10 फीसदी पद एक्स सर्विस मैन के लिए थे। अगर वह नहीं भर सके हैं तो दूसरे उम्मीदवारों को मौका दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया को सरकारी वकील ने भी ठीक माना था। रिजल्ट जारी होने से पहले दूसरे वर्गों से एक्स-सर्विसमैन के लिए तय वैकेंसी भर दी गई। 55912 आवेदकों का चयन किया गया। कुछ पद कोर्ट के आदेश पर खाली रखे गए। लगभग चार हजार पद खाली रहे, क्योंकि योग्य उम्मीदवार नहीं मिले थे। डीओपीटी का कार्यालय ज्ञापन कहता है कि खाली पदों को वेटिंग लिस्ट से ही भरना है। इस मामले में वेटिंग लिस्ट/रिजर्व लिस्ट नहीं नहीं रखी गई। प्रार्थी के वकील ने कहा, डीओपीटी के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, खाली पदों को रिजर्व लिस्ट से भरा जाना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया में लंबा समय लगा, कोर्ट ने इस बात को खारिज कर दिया। अंत में कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, आपके पास जो वैकेंसी बची है, उन्हें भरने से उम्मीदवारों का भला होगा। आपने वेटिंग लिस्ट भी नहीं बनाई। ऐसे में आपका भी भला होगा, क्योंकि वैकेंसी भरने के नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करनी पड़ेगी। सरकार का खर्च बचेगा। वे रिक्त पद, जिन पर किसी ने ज्वाइन नहीं किया है, उन्हें भी एसएसबी व सीएपीएफ एसएससीजीडी 2018 के अभ्यर्थियों से भरा जाए। उसमें मेरिट, श्रेणी व स्टेट डोमिसाइल का ध्यान रखा जाए।