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SSC Recruitment Irregularities: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश बरकरार रखा, मंत्री से की गई पूछताछ, देर रात मामले में हुई सुनवाई

Thu, 19 May 2022 02:25 AM IST
देव कश्यप जॉब डेस्क, अमर उजाला
जॉब डेस्क, अमर उजाला Published by: देव कश्यप Updated Thu, 19 May 2022 02:25 AM IST
सार

कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में और हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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Calcutta High Court said SSC recruitment irregularities is a public scam,  upholds the order of the Single Bench
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) में नियुक्ति को लेकर जारी विवाद के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट के एकल पीठ के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने बुधवार देर रात एक आदेश जारी किया। आदेश में निर्देश दिया गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) गुरुवार को दोपहर साढ़े 12 बजे तक डब्ल्यूबीएसएससी कार्यालय को सुरक्षित करने के लिए सीआरपीएफ की सहायता ले। साथ ही सीआरपीएफ की मदद से सीबीआई के डाटा की सुरक्षा की जाएगी।

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देर रात मामले में हुई सुनवाई
अदालत एक याचिकाकर्ता द्वारा शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियुक्ति रिकॉर्ड के संरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका बुधवार को एसएससी अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार के अचानक इस्तीफे के बाद डाटा की सुरक्षा को लेकर दायर की गई थी।अदालत ने बुधवार को रात 11 बजे मामले की सुनवाई की और आदेश दिया कि अगले आदेश तक किसी भी अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को आचार्य सदन में एसएससी कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीपीआरएफ को तैनात किया जाएगा। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आयोग द्वारा एसएससी कार्यालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज गुरुवार को दोपहर 1.00 बजे उसके सामने रखे जाएं। 
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याचिकाकर्ता के वकील बिकाश भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय की अदालत में अपील करते हुए कहा कि केंद्रीय पुलिस बल को दस्तावेजों के संरक्षण के लिए एसएससी कार्यालय को सुरक्षित करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने आशंका जताी कि इनके साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।
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सीबीआई ने मंत्री पार्थ चटर्जी से तीन घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की
इससे पहले इस मामले में सीबीआई ने राज्य के मंत्री पार्थ चटर्जी से बुधवार शाम को तीन घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। यह मामला राज्य में बड़ा विवाद बन गया है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी ने चटर्जी पर ‘‘इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप लगाया है।

सिंगल बेंच का फैसला बरकरार
चटर्जी के सीबीआई के समक्ष पेश होने से पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को बुधवार को बरकरार रखा, जिसमें स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की सिफारिशों पर पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा की गई कथित अवैध नियुक्तियों की सीबीआई जांच करने का निर्देश दिया गया था।

खंडपीठ के आदेश के तुरंत बाद, न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने राज्य के मंत्री पार्थ चटर्जी को एसएससी नियुक्ति घोटाले के सिलसिले में बुधवार शाम छह बजे से पहले यहां स्थित सीबीआई के कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया था। चटर्जी के वकील ने इसके तुरंत बाद न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति रबींद्रनाथ सामंत की अन्य खंडपीठ के समक्ष तत्काल मौखिक याचिका दायर की, जिसमें न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इस पीठ ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि अपील अदालत की रजिस्ट्री में दायर नहीं की गई है, और इसलिए उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार सुनवाई नहीं की जा सकती। बाद में, शाम को मंत्री पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय पहुंचे।

मंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए
न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने अपने आदेश में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि न्याय के हित में चटर्जी मंत्री पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की लंबित भर्तियों की निगरानी के लिए नवंबर, 2019 में पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गठित एक समिति के सभी पांच सदस्यों को सीबीआई के सामने पेश होने का निर्देश दिया।

अनियमितताओं को सार्वजनिक घोटाला बताया
इससे पहले जस्टिस सुब्रत तालुकदार और जस्टिस एके मुखर्जी की खंडपीठ ने स्कूल सेवा आयोग की 2016 के पैनल में शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितताओं को सार्वजनिक घोटाला बताया। पीठ ने कहा कि एकल पीठ के जज गंगोपाध्याय का फैसला गलत नहीं था और उनके आदेशों में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। 

वर्तमान में चटर्जी उद्योग, वाणिज्य और संसदीय मामलों के मंत्री
कोर्ट ने इस बात को माना कि कक्षा 9 और 10 के शिक्षकों और समूह सी और डी कर्मचारियों की भर्ती के लिए साल 2016 में पैनल के लिए नियुक्ति प्रक्रिया की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय समिति अवैध थी। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सीबीआई के सामने पेश होने के आदेश दिए थे। चटर्जी वर्तमान में राज्य के उद्योग, वाणिज्य और संसदीय मामलों के मंत्री हैं।


इससे पहले भी चटर्जी को जज गंगोपाध्याय ने 12 अप्रैल को सीबीआई के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। हालांकि, मंत्री ने डिवीजन बेंच से इस आदेश पर स्टे हासिल कर लिया था। एसएससी नियुक्ति में हुए अनियमितता के मामले में कोर्ट की ओर से कुल सात आदेश जारी किए गए थे। इनमें से एक आदेश ग्रुप सी, दो ग्रुप डी और चार आदेश कक्षा नवीं और दसवीं के लिए शिक्षक भर्ती के मामले में था। इन सभी आदेश पर डिवीजन बेंच की ओर से पहले स्टे लगा दिया गया था। 

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