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न राशन कार्ड बना, न खाना मिला, झारखंड में महिला की भुखमरी से हुई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:03 PM IST
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झारखंड के गिरीडीह जिले में भूख से महिला की मौत के मामले में आधिकारिक टीम ने जांच में पाया कि उनके घर में अन्न का एक दाना नहीं था। 58 वर्षीय सावित्री देवी की मौत के एक दिन बाद प्रशासन ने आधिकारिक दौरा किया। मौत के कारणों की जांच के लिए आदेश दिए गए हैं। इस बात की जांच की जाएगी कि डुमरी ब्लॉक के मंगलगद्दी गांव की रहनेवाली सावित्री देवी के पास राशन कार्ड क्यों नहीं था और उन्होंने इसके लिए आवेदन किया था या नहीं।
सावित्री देवी की मौत शनिवार को हुई थी। बताया गया कि उन्होंने तीन दिनों से कुछ खाया नहीं था। वे अपनी दो बहुओं और चार पोते-पोतियों के साथ रहती थीं। महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी में उनका बड़ा बेटा काम करता है। उसके भेजे हुए बहुत थोड़े से पैसों से किसी तरह घर का गुजारा चलता था।
सावित्री देवी का छोटा बेटा हुलास महतो घर पहुंचा तब रविवार को प्रशासन को मौत की सूचना मिली। सावित्री देवी के पति का निधन 2010 में हो गया था।
मौत के बाद कोई पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया। झारखंड के खाद्य और आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सोमवार को कहा कि इस "चूक" के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है। अधिकारी इस बात की जांच करेंगे कि सावित्री देवी या उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को कोई अन्य सरकारी लाभ मिल रहा है या नहीं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कार्यकारी मजिस्ट्रेट और डुमरी के ब्लॉक विकास अधिकारी (प्रभारी) राहुल देव ने कहा, "खबर मिलने के बाद रविवार दोपहर हम उनके घर पहुंचे। पहली नजर में हमने पाया कि उनके घर में कोई खाना नहीं था। परिवार का राशन कार्ड भी नहीं था। हम जांच कर रहे हैं कि क्या इसके लिए कोई आवेदन किया गया था। और यदि किया गया था तो इस पर कोई कार्रवाई हुई या नहीं।"
इस मामले में बात करने के लिए गिरिडीह के डिप्टी कमिश्नर मनोज कुमार से संपर्क करने की हर कोशिश बेनतीजा रही।
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सावित्री देवी की मौत शनिवार को हुई थी। बताया गया कि उन्होंने तीन दिनों से कुछ खाया नहीं था। वे अपनी दो बहुओं और चार पोते-पोतियों के साथ रहती थीं। महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी में उनका बड़ा बेटा काम करता है। उसके भेजे हुए बहुत थोड़े से पैसों से किसी तरह घर का गुजारा चलता था।
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सावित्री देवी का छोटा बेटा हुलास महतो घर पहुंचा तब रविवार को प्रशासन को मौत की सूचना मिली। सावित्री देवी के पति का निधन 2010 में हो गया था।
मौत के बाद कोई पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया। झारखंड के खाद्य और आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सोमवार को कहा कि इस "चूक" के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है। अधिकारी इस बात की जांच करेंगे कि सावित्री देवी या उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को कोई अन्य सरकारी लाभ मिल रहा है या नहीं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कार्यकारी मजिस्ट्रेट और डुमरी के ब्लॉक विकास अधिकारी (प्रभारी) राहुल देव ने कहा, "खबर मिलने के बाद रविवार दोपहर हम उनके घर पहुंचे। पहली नजर में हमने पाया कि उनके घर में कोई खाना नहीं था। परिवार का राशन कार्ड भी नहीं था। हम जांच कर रहे हैं कि क्या इसके लिए कोई आवेदन किया गया था। और यदि किया गया था तो इस पर कोई कार्रवाई हुई या नहीं।"
इस मामले में बात करने के लिए गिरिडीह के डिप्टी कमिश्नर मनोज कुमार से संपर्क करने की हर कोशिश बेनतीजा रही।