Jharkhand Election: झारखंड में भाजपा के सामने कौन सी चुनौतियां, सीता और चंपई सोरेन होंगे कितने मददगार?
झारखंड में भाजपा को उम्मीद है कि पांच साल का एंटी इनकंबेंसी फैक्टर, परिवार में नाराजगी, पार्टी में बगावत और जमीन घोटाले का आरोप हेमंत सोरेन की चुनावी राह कठिन कर देगा।
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हाल के दिनों में जितने भी राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए हैं, या होने हैं, भाजपा को सबसे अधिक उम्मीद झारखंड से है। भाजपा को उम्मीद है कि पांच साल का एंटी इनकंबेंसी फैक्टर, परिवार में नाराजगी, पार्टी में बगावत और जमीन घोटाले का आरोप हेमंत सोरेन की चुनावी राह कठिन कर देगा। हालांकि, लोकसभा चुनाव नतीजों के चलते भाजपा अपनी रणनीति पर पुनर्विचार भी कर रही है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने राज्य की 14 सीटों में से आठ लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन वह आदिवासी बहुल पांच लोकसभा सीटों में से एक पर भी जीत हासिल करने में नाकाम रही थी। आदिवासी बहुल सीटों खूंटी, लोहरदगा, चाईबासा, राजमहल और दुमका में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को एक से डेढ़ लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
यहां तक कि भाजपा को दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन भी भाजपा के लिए आदिवासी दुमका लोकसभा सीट पर जीत हासिल करने में नाकाम रही थीं। उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार नलिन सोरेन ने हराया था।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। झामुमो ने इसे राज्य में आदिवासी स्वाभिमान से जोड़ दिया और आदिवासियों में इस गिरफ्तारी के कारण हेमंत सोरेन के प्रति सहानुभूति का भाव पैदा हो गया। यही कारण रहा कि आदिवासियों ने लोकसभा चुनाव में झामुमो गठबंधन के पक्ष में एकजुट होकर वोट दिया और भाजपा को इसका नुकसान हुआ।
भाजपा की परेशानी यह है कि लोकसभा चुनावों में जनता प्रधानमंत्री के चेहरे को ध्यान में रखकर भी वोट करती है। मोदी की लोकप्रियता से अभी भी इनकार नहीं किया जा सकता। यानी लोकसभा में कमजोर प्रदर्शन के बाद भी भाजपा को मोदी की छवि का लाभ मिला होगा। जबकि विधानसभा के चुनाव में उसके पास मोदी का चेहरा नहीं होगा। उलटे इस बार उसके सामने सीधे हेमंत सोरेने होंगे जो अपनी गिरफ्तारी से उपजी सहानुभूति की लहर को भुनाने की कोशिश करेंगे। ऐसे में भाजपा को आदिवासी बहुल सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कैसे डैमेज कंट्रोल करेगी पार्टी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आदिवासी बहुल सीटों पर पार्टी के प्रभावी और चुनाव जीतने में सक्षम उम्मीदवारों पर पार्टी दांव लगा सकती है। इस बार पार्टी ने 25 से अधिक उम्मीदवारों को बदल सकती है। पार्टी की पहली सूची इसी सप्ताह जारी की जा सकती है।
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