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इन जुड़वा बहनों के नंबर देखकर नहीं होगा आंखों पर विश्वास

Wed, 27 May 2015 06:33 PM IST
Updated Wed, 27 May 2015 06:33 PM IST
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twin sisters got same figures in ICSE result

माध्यमिक परीक्षाओं के रिजल्ट के इस दौर में जहां एक के बाद एक टॉपर सामने आ रहे हैं वहीं रांची की दो जुड़वा बहनों की कहानी आपको अचंभे में डाल देगी। जुड़वा भाई-बहनों के मामलों में अभी तक शक्ल सूरत और कुछ आदतों की समानता की बातें सामने आती रही हैं।

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लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इन दोनों बहनों का आईसीएससी बोर्ड के रिजल्ट में नंबर भी काफी कुछ समान रहे। छह में से कुल पांच विषयों में जुड़वा बहनों के नंबर बिल्कुल एक जैसे हैं। एक विषय में मात्र एक नंबर का ही अंतर रहा। दोनों बहनों के नंबर देखकर हर कोई हैरत में है।
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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार रांची के लोरेटो कान्वेंट स्कूल की छात्रा अपोरूपा और अनोरूपा चटोपाध्याय के नंबर इस कदर एक समान हैं कि देखने वाला पहली बार में तो इस गलफत में पड़ जाए कि मार्कशीट किसकी है।
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बिना ट्यूशन और कोचिंग के पाई सफलता

twin sisters got same figures in ICSE result

मसलन, कम्‍प्यूटर साइंस में दोनों बहनों के 100, इंग्लिश में 95, साइंस में 99, मैथ में 98 और हिस्ट्री और ज्योग्राफी में एक समान 97 अंक हैं। मात्र हिंदी का मामला अपवाद रहा जिसमें अनोरूपा को 98 और अपोरूपा को 97 नंबर मिले। छात्राओं के पिता शैलेस चटोपाध्याय बिरसा एग्रीकल्‍चर यूनिवर्सिटी में जुलोजी के प्रोफेसर हैं।

जबकि माता मौसमी चटोपाध्याय ग्रहणी हैं। पिता शैलेस बताते हैं की उनकी दोनों जुड़वा बेटियों ने पढ़ाई के लिए कभी भी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। शैलेस कहते हैं कि उन्होंने कभी भी अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए दबाव नहीं दिया न ही किसी खास विषय पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा।

एक साथ पढ़ाई और अन्य काम करने वाली अपनी बेटियों के बारे में शैलेस कहते हैं कि ये संभव नहीं है कि दोनों जिंदगी भर एक साथ ही रह सकें इसलिए जरूरी है कि दोनों अपनी मर्जी से अपना भविष्य तय करें।

लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज होगा दोनों का नाम

twin sisters got same figures in ICSE result

हालांकि उनकी दोनों बेटियों का उद्देध्य डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। वहीं छात्राओं की इस उपलब्धि के नाम एक और ख्याति जल्द ही जुड़ने वाली है। लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स ने दोनों बहनों का रिकार्ड मांगा है, जिससे वो इन्हें अपनी बुक में जगह दे सके।

किताब के संपादक विजय घोष के अनुसार वे अपने आगामी संस्करण 2016 में इन दोनों जुड़वा बहनों की उपलब्धि को जगह देना चाहते हैं। वहीं इस संबंध में जानकारी मिलने पर दोनों बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

अनोरूपा के अनुसार कि हम हमेशा से ये जानते थे कि हममें कुछ खास है लेकिन ‌लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में जगह मिलेगी इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। उनके पिता शैलेस चटोपाध्याय कहते हैं कि उनकी बेटियों की इस उपलब्धि ने रातों रात उन्हें भी प्रसिद्ध कर दिया। उम्मीद है लिम्का बुक में नाम आने इन्हें और सफलता मिल सकेगी।

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