सुप्रीम कोर्टः जमानत देकर छुट्टी पर गए जज, साइन करना भूल गए
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जेल में बंद झारखंड के एक व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी अभी लंबा इंतजार करना होगा। कारण, उन्हें बीमारियों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट की जिस दो सदस्यीय पीठ ने जमानत दी थी उसमें से एक न्यायाधीश जमानत के आदेशों पर हस्ताक्षर करना भूल गए। याचिका दोबारा पीठ के पास पहुंची तो पता चला कि साइन न करने वाले जज गर्मियों की छुट्टियों पर चले गए हैं। जेल में बंद बीमार व्यक्ति को अब जज के लौटने तक इंतजार करना पड़ेगा।
ये अजीब वाक्या सामने आया झारखंड के पुष्पेन्द्र कुमार सिन्हा नाम के आरोपी के साथ। पुराने मामले में वह काफी समय से जेल में बंद हैं। पुष्पेन्द्र डायबिटीज और कई अन्य बीमारियों से पीड़ित है।
उन्होंने चिकित्सकीय आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए जमानत देने की अपील की थी। बीते 17 जून को न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और एल नागेश्वर राव की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपी पुष्पेंद्र को जमानत दे दी थी। जमानत में पुष्पेंद्र की बीमारियों को ही आधार बनाया गया था।
जमानत का फरमाना जिला जेल में पहुंचा जहां पुष्पेन्द्र बंद थे। परिजन उम्मीद कर रहे थे कि जमानत मिलने पर वह बाहर आ जाएंगे लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें रिहा करने से इंकार कर दिया। परिजनों और पुष्पेन्द्र के वकील ने इस संबंध में जानकारी की तो पता चला कि जमानत के आदेश पर एक जज के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।
वकील प्रणव सचदेवा ने 21 जून को फिर सुप्रीम कोर्ट में इस पर गुहार लगाई। पुष्पेन्द्र के वकील प्रणव सचदेवा ने न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ को जानकारी दी कि उसके मुवक्किल की जमानत के आदेश हो गए हैं, लेकिन खंडपीठ के एक जज हस्ताक्षर करना भूल गए। अब वह छुट्टी पर चल गए हैं। इसलिए उनके मुवक्किल को जमानत देने की व्यवस्था की जाए।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने इस मामले में कुछ भी करने से असमर्थता जता दी। पीठ ने हालांकि पुष्पेन्द्र के प्रति सहानभूति तो जताई लेकिन कहा हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। आपको छुट्टियां खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण 29 जून तक उच्चतम अदालत में छुट्टियां चल रही हैं।