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रांची: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा घोटाले का मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह फरार, तलाश में जुटी जांच एजेंसियां

Tue, 01 Sep 2026 05:31 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Tue, 01 Sep 2026 05:31 PM IST
सार

जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षा घोटाले में ब्लैकलिस्टेड परीक्षा संचालन एजेंसी के निदेशक मिथिलेश सिंह को जांच एजेंसियां मुख्य मास्टरमाइंड मानकर उसकी तलाश कर रही हैं। जांच में अभ्यर्थियों को पास कराने के बदले लाखों रुपये लेने, परीक्षा पोर्टल में कथित डिजिटल हेरफेर और 300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।

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Ranchi News JPSC-JSSC Exam Scam Mastermind Mithilesh Singh Fleeing Agencies Launch Search Operations
झारखंड लोक सेवा आयोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के मामले में ब्लैकलिस्टेड परीक्षा संचालन एजेंसी वेबेल और आईसीएन का निदेशक मिथिलेश सिंह इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड बनकर उभरा है।
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वित्तीय और डिजिटल साम्राज्य के नेटवर्क को खंगालने में जुटी
सीआईडी की विशेष जांच टीम उसके पूरे वित्तीय और डिजिटल साम्राज्य के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। फिलहाल वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश में कई शहरों में टीमें भेजी गई हैं। परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से सीआईडी की पूछताछ और शुरुआती जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि मिथिलेश सिंह ने जेएसएससी सीजीएल और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने के एवज में प्रति परीक्षार्थी 12 लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली थी।
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सांठगांठ और डिजिटल सेंधमारी के तरीके आए सामने
इस नेटवर्क का खुलासा तब और पुख्ता हुआ, जब मामले के एक अन्य गिरफ्तार मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने स्वयं, अपने भाई अक्षय तिवारी और अपनी पत्नी सुषमा कुमारी का चयन सुनिश्चित कराने के लिए मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये यानी कुल 36 लाख रुपये की राशि दी थी। जांच में परीक्षा संचालन के दौरान अपनाई गई साठगांठ और डिजिटल सेंधमारी के बेहद गंभीर तरीके सामने आए हैं। वेबेल और आईसीएन जैसी ब्लैकलिस्टेड और संदिग्ध एजेंसियों को ओएमआर शीट की प्रोसेसिंग और प्रश्न-पत्र प्रिंट करने का संवेदनशील जिम्मा दिया गया था। दिल्ली से गिरफ्तार आईसीएन कर्मियों सुमांश प्रकाश और राहुल कुमार ने सीआईडी को बताया कि वे केवल निचले स्तर के निर्देशों पर काम कर रहे थे, जबकि जेएसएससी अधिकारियों और आयोग के साथ सभी मुख्य डीलिंग मिथिलेश सिंह खुद संभालता था। उसने परीक्षा पोर्टल के बैक-एंड सॉफ्टवेयर में अनधिकृत बदलाव करवाकर अभ्यर्थियों के अंकों के साथ हेरफेर की।
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मिथिलेश के पास मौजूद है 300 करोड़ से अधिक की  बेनामी संपत्ति 
जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि प्रश्न-पत्र लीक और धांधली से अर्जित काली कमाई के जरिए मिथिलेश ने देशभर में 300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति खड़ी की है। सीआईडी की पड़ताल में दिल्ली, पटना, रांची, मुंबई, पुणे, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में उसके नाम पर कई बेनामी जमीन, आलीशान मकान, फ्लैट, होटल और कमर्शियल संपत्तियों की जानकारी मिली है।

मूल रूप से बिहार के भोजपुर (आरा) जिले का रहने वाला मिथिलेश सिंह अंतरराज्यीय स्तर पर परीक्षा घोटालों का पुराना खिलाड़ी बताया जा रहा है। वह इससे पहले बिहार, पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों में संलिप्त रहा है और करीब चार बार जेल जा चुका है। उसने झारखंड में भी दूसरे राज्यों के इसी संगठित सिंडिकेट मॉडल को लागू किया था।
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