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झारखंड के 1.36 लाख करोड़ के बकाये पर बड़ा झटका, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी आर-पार की लड़ाई

Mon, 14 Sep 2026 11:57 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Mon, 14 Sep 2026 11:57 AM IST
सार

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद एमएमडीआर संशोधन अधिनियम लागू हो गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार पर झारखंड के खनन रॉयल्टी और अन्य वित्तीय मदों से जुड़े 1.36 लाख करोड़ रुपये के पुराने बकाये के दावे की कानूनी स्थिति बदल गई है।

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jharkhand rs 1 36 lakh crore dues mmdr amendment act supreme court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रपति ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही नया संशोधन अधिनियम लागू हो गया है। इसके लागू होते ही केंद्र सरकार पर झारखंड के 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये के दावे की कानूनी स्थिति बदल गई है और यह दावा प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। हालांकि, झारखंड सरकार इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय अपने बकाये की वसूली के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ संशोधन अधिनियम

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही एमएमडीआर संशोधन अधिनियम देशभर में प्रभावी हो गया है। केंद्र सरकार ने इन नए विधायी प्रावधानों को लागू कर खनन से जुड़े वित्तीय और कानूनी ढांचे में बदलाव किया है। इस कानून के लागू होने के साथ ही केंद्र के सामने राज्यों की ओर से किए जाने वाले पुराने बकाये के दावों की कानूनी स्थिति भी बदल गई है। इसी बदलाव का सीधा असर झारखंड के 1.36 लाख करोड़ रुपये के दावे पर पड़ा है।

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खनन रॉयल्टी समेत अन्य मदों का था दावा

झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार के सामने खनन रॉयल्टी और अन्य वित्तीय मदों के तहत 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का दावा किया था। राज्य सरकार लंबे समय से केंद्र से इस राशि का भुगतान करने की मांग करती रही है।

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हालांकि, नए एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के अस्तित्व में आने के बाद केंद्र सरकार पर झारखंड का यह 1.36 लाख करोड़ रुपये का दावा खत्म हो गया है। नए कानूनी प्रावधानों ने राज्य के पुराने वित्तीय दावे को निष्प्रभावी कर दिया है।

बकाया हासिल करने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार झारखंड सरकार अब इस कानून के कारण खत्म हुए 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये को हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी। राज्य सरकार अपनी प्रस्तावित याचिका में एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों को चुनौती देगी और अदालत से अपने न्यायसंगत बकाये को फिर से बहाल करने की मांग करेगी।



अधिकारियों के मुताबिक सरकार सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेज पेश करेगी। इसका उद्देश्य झारखंड के वित्तीय अधिकारों और राज्य के बकाये की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब इस मामले में राज्य सरकार की कानूनी लड़ाई के जरिए यह तय होगा कि 1.36 लाख करोड़ रुपये के पुराने दावे को दोबारा हासिल करने का रास्ता खुलता है या नहीं।

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