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झारखंड न्यूज: कोयले से आगे बढ़कर गोल्ड-ग्रेफाइट समेत महत्वपूर्ण खनिजों पर फोकस, 18 ब्लॉक नीलामी को तैयार
Wed, 09 Sep 2026 04:16 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 09 Sep 2026 04:16 PM IST
सार
झारखंड अब कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण और उच्च मूल्य वाले खनिजों पर फोकस करेगा। राज्य में खनिज अन्वेषण और माइन प्लानिंग को गति देने के लिए एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। नीलामी के लिए 18 खनिज ब्लॉक तैयार किए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर
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झारखंड में खनन को मिलेगी नई दिशा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड अब कोयला आधारित अर्थव्यवस्था के बजाय महत्वपूर्ण और उच्च मूल्य वाले खनिजों पर ध्यान केंद्रित करेगा। राज्य में खनिज अन्वेषण, पहचान और माइन प्लानिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य में नीलामी के लिए कुल 18 खनिज ब्लॉक तैयार हैं। सक्षम प्राधिकार से मंजूरी के बाद राज्य के खान एवं भूतत्व निदेशालय ने 15 प्रमुख खनिज ब्लॉक तैयार किए हैं। इनमें रांची का चुरी लाइमस्टोन ब्लॉक, रामगढ़ के हरिहरपुर-लेम-बिचा और पियरतांड़ लाइमस्टोन ब्लॉक, पूर्वी सिंहभूम का सोना ब्लॉक तथा सरायकेला-खरसावां के कई गोल्ड ब्लॉक शामिल हैं। इसके अलावा, गिरिडीह के गंसासार-लुप्पी बेस मेटल एवं बरगंडा कॉपर ब्लॉक तथा पश्चिमी सिंहभूम के घटकुरी, अजीताबुरु और बंधबुरू लौह अयस्क व मैंगनीज ब्लॉक भी नीलामी के लिए तैयार हैं।
केंद्र सरकार का खान मंत्रालय तीन क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉकों की नीलामी करेगा। इनमें पलामू का रेवारातू ग्रेफाइट ब्लॉक व अधमानिया ग्रेफाइट-वैनेडियम ब्लॉक और लोहरदगा का सिसकरी पाट बॉक्साइट-टाइटेनियम ब्लॉक शामिल हैं।
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तकनीक से तेज होगा अन्वेषण
रांची में तीसवीं झारखंड राज्य भूतात्विक कार्यक्रम पर्षद की बैठक में भू-वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने खनिज अन्वेषण में नई तकनीक को अपनाने पर गहन विचार-विमर्श किया। बैठक में, अरवा राजकमल ने कहा कि कोयला उत्पादन हमेशा एक ही गति से आगे नहीं बढ़ सकता। एक समय ऐसा आएगा, जब इसका उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद घटने लगेगा। इसलिए राज्य को कोयले के बाद की अर्थव्यवस्था पर अभी से विचार करना होगा।
बदलती वैश्विक परिस्थितियों में जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन की नीतियों के कारण दुनिया भर में कम कार्बन वाले उत्पादन पर ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मन अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्था ने राज्य के खनिज क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच भी उन्नत सामग्री अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की संभावना तलाश रहा है।
ये भी पढ़ें- झारखंड के गिरिडीह में ACB की बड़ी कार्रवाई: साइबर थाने का SI 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
भविष्य की नीतियां और क्लोजर प्लान
बैठक में राहुल सिन्हा ने अगले 10 से 20 वर्षों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक नीतियां बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि भू-वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान ही भूमि, वन क्षेत्र, सीमांकन और पर्यावरण से जुड़ी संभावित बाधाओं की पहचान कर लेने से नीलामी तथा लीज प्रक्रिया सुगम हो जाएगी। उन्होंने लिथियम, यूरेनियम, टाइटेनियम और वैनेडियम जैसे खनिजों के अन्वेषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खदान शुरू करने के साथ ही उसके अंतिम क्लोजर प्लान पर भी कार्य करना जरूरी है, ताकि खनन कार्य समाप्त होने के बाद पर्यावरणीय संतुलन बहाल रहे और स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रह सकें।
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राज्य में नीलामी के लिए कुल 18 खनिज ब्लॉक तैयार हैं। सक्षम प्राधिकार से मंजूरी के बाद राज्य के खान एवं भूतत्व निदेशालय ने 15 प्रमुख खनिज ब्लॉक तैयार किए हैं। इनमें रांची का चुरी लाइमस्टोन ब्लॉक, रामगढ़ के हरिहरपुर-लेम-बिचा और पियरतांड़ लाइमस्टोन ब्लॉक, पूर्वी सिंहभूम का सोना ब्लॉक तथा सरायकेला-खरसावां के कई गोल्ड ब्लॉक शामिल हैं। इसके अलावा, गिरिडीह के गंसासार-लुप्पी बेस मेटल एवं बरगंडा कॉपर ब्लॉक तथा पश्चिमी सिंहभूम के घटकुरी, अजीताबुरु और बंधबुरू लौह अयस्क व मैंगनीज ब्लॉक भी नीलामी के लिए तैयार हैं।
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केंद्र सरकार का खान मंत्रालय तीन क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉकों की नीलामी करेगा। इनमें पलामू का रेवारातू ग्रेफाइट ब्लॉक व अधमानिया ग्रेफाइट-वैनेडियम ब्लॉक और लोहरदगा का सिसकरी पाट बॉक्साइट-टाइटेनियम ब्लॉक शामिल हैं।
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तकनीक से तेज होगा अन्वेषण
रांची में तीसवीं झारखंड राज्य भूतात्विक कार्यक्रम पर्षद की बैठक में भू-वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने खनिज अन्वेषण में नई तकनीक को अपनाने पर गहन विचार-विमर्श किया। बैठक में, अरवा राजकमल ने कहा कि कोयला उत्पादन हमेशा एक ही गति से आगे नहीं बढ़ सकता। एक समय ऐसा आएगा, जब इसका उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद घटने लगेगा। इसलिए राज्य को कोयले के बाद की अर्थव्यवस्था पर अभी से विचार करना होगा।
बदलती वैश्विक परिस्थितियों में जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन की नीतियों के कारण दुनिया भर में कम कार्बन वाले उत्पादन पर ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मन अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्था ने राज्य के खनिज क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच भी उन्नत सामग्री अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की संभावना तलाश रहा है।
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भविष्य की नीतियां और क्लोजर प्लान
बैठक में राहुल सिन्हा ने अगले 10 से 20 वर्षों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक नीतियां बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि भू-वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान ही भूमि, वन क्षेत्र, सीमांकन और पर्यावरण से जुड़ी संभावित बाधाओं की पहचान कर लेने से नीलामी तथा लीज प्रक्रिया सुगम हो जाएगी। उन्होंने लिथियम, यूरेनियम, टाइटेनियम और वैनेडियम जैसे खनिजों के अन्वेषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खदान शुरू करने के साथ ही उसके अंतिम क्लोजर प्लान पर भी कार्य करना जरूरी है, ताकि खनन कार्य समाप्त होने के बाद पर्यावरणीय संतुलन बहाल रहे और स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रह सकें।