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झारखंड: 14 साल से कर रहे सेवा, अब नौकरी पर संकट; हाई कोर्ट ने सिल्ली के छऊ कलाकारों को दी राहत
Mon, 26 Oct 2026 06:42 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Mon, 26 Oct 2026 06:42 PM IST
सार
झारखंड हाई कोर्ट ने सिल्ली के छऊ नृत्य कलाकारों को राहत देते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से नई अनुबंध आधारित बहाली के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को फिलहाल कार्यरत कलाकारों को सेवा से नहीं हटाने का निर्देश दिया है।
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झारखंड हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड हाई कोर्ट ने सिल्ली के छऊ नृत्य कलाकारों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अनुबंध पर नई बहाली के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह फिलहाल इन कार्यरत कलाकारों को सेवा से न हटाए।
नियमितीकरण की मांग और नया संकट
सिल्ली में तैनात ये छऊ नृत्य कलाकार पिछले 14 वर्षों से लगातार इस पारंपरिक कला के संरक्षण और प्रस्तुति का कार्य निष्ठापूर्वक कर रहे हैं। इन कलाकारों ने 1 अप्रैल 2026 से अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इसी दौरान राज्य सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिये अनुबंध आधारित नई बहाली प्रक्रिया का प्रस्ताव सामने आया। इस कदम से लंबे समय से सेवा दे रहे कलाकारों के सामने अचानक बेरोजगार होने और सेवा से हटाए जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस संभावित कार्रवाई से अपनी आजीविका बचाने के लिए कलाकारों ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया।
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अदालत में वकीलों की प्रभावी दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता नेहा मेहता और अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने प्रभावी ढंग से रखा। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष जोरदार तर्क दिया कि जो कलाकार इतने वर्षों से इस पारंपरिक लोक कला को जीवित रखने में अपना योगदान दे रहे हैं, उनकी सेवाओं को नियमित किया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के उपरांत अदालत ने आउटसोर्सिंग से होने वाली प्रस्तावित बहाली पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही अदालत ने प्रार्थियों को सुरक्षात्मक राहत देते हुए उन्हें वर्तमान पद से न हटाने का महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
ये भी पढ़ें- बिहार: गयाजी से बैंकॉक का सफर होगा आसान, इंडिगो की पहली नॉन-स्टॉप उड़ान शुरू; पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यूनेस्को की वैश्विक धरोहर सूची
छऊ नृत्य के व्यापक सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक स्तर पर यूनेस्को ने भी स्वीकार किया है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मयूरभंज, पुरुलिया तथा सरायकेला-खरसावां क्षेत्रों का छऊ नृत्य अपनी अनूठी व समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के कारण पूरी दुनिया में विख्यात है।
सिल्ली भी इसी सांस्कृतिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वर्ष 2010 में यूनेस्को ने छऊ नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अपनी प्रतिनिधि सूची में औपचारिक रूप से शामिल किया था। ऐसे में इस अमूल्य धरोहर को संजोने वाले स्थानीय कलाकारों का संरक्षण करना और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करना राज्य की अमूर्त संस्कृति की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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नियमितीकरण की मांग और नया संकट
सिल्ली में तैनात ये छऊ नृत्य कलाकार पिछले 14 वर्षों से लगातार इस पारंपरिक कला के संरक्षण और प्रस्तुति का कार्य निष्ठापूर्वक कर रहे हैं। इन कलाकारों ने 1 अप्रैल 2026 से अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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इसी दौरान राज्य सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिये अनुबंध आधारित नई बहाली प्रक्रिया का प्रस्ताव सामने आया। इस कदम से लंबे समय से सेवा दे रहे कलाकारों के सामने अचानक बेरोजगार होने और सेवा से हटाए जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस संभावित कार्रवाई से अपनी आजीविका बचाने के लिए कलाकारों ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया।
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अदालत में वकीलों की प्रभावी दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता नेहा मेहता और अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने प्रभावी ढंग से रखा। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष जोरदार तर्क दिया कि जो कलाकार इतने वर्षों से इस पारंपरिक लोक कला को जीवित रखने में अपना योगदान दे रहे हैं, उनकी सेवाओं को नियमित किया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के उपरांत अदालत ने आउटसोर्सिंग से होने वाली प्रस्तावित बहाली पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही अदालत ने प्रार्थियों को सुरक्षात्मक राहत देते हुए उन्हें वर्तमान पद से न हटाने का महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
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यूनेस्को की वैश्विक धरोहर सूची
छऊ नृत्य के व्यापक सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक स्तर पर यूनेस्को ने भी स्वीकार किया है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मयूरभंज, पुरुलिया तथा सरायकेला-खरसावां क्षेत्रों का छऊ नृत्य अपनी अनूठी व समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के कारण पूरी दुनिया में विख्यात है।
सिल्ली भी इसी सांस्कृतिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वर्ष 2010 में यूनेस्को ने छऊ नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अपनी प्रतिनिधि सूची में औपचारिक रूप से शामिल किया था। ऐसे में इस अमूल्य धरोहर को संजोने वाले स्थानीय कलाकारों का संरक्षण करना और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करना राज्य की अमूर्त संस्कृति की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।