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झारखंड: हजारीबाग में सरकारी जमीन पर तोड़फोड़ से विवाद, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव समेत कई आरोपी

Mon, 26 Oct 2026 05:53 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी Updated Mon, 26 Oct 2026 05:53 PM IST
सार

हजारीबाग के हुरहुरू में खासमहल जमीन पर बने पुराने सरकारी भवन को जेसीबी से ढहाने, पेड़ काटने और धमकाने के मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हजारीबाग के हुरहुरू क्षेत्र में खासमहल जमीन पर बने पुराने सरकारी भवन को जेसीबी मशीन से ढहाने, पेड़ काटने और लोगों को धमकाने के मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पूनम उपाध्याय के आवेदन पर 23 अक्तूबर को बड़ा बाजार थाना में कांड संख्या 260/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में योगेंद्र साव, जेसीबी ऑपरेटर और अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद पूरे प्रकरण की कानूनी जांच शुरू कर दी है।
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खासमहल भूखंड पर रात में तोड़फोड़
यह विवाद कैंटोनमेंट मौजा की होल्डिंग संख्या 302 की जमीन से जुड़ा हुआ है। अलग-अलग विवरणों में इस विवादित संपत्ति का रकबा 53 और 57 डिसमिल बताया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार शनिवार की देर रात इस भूखंड पर बने पुराने भवन को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। यह ढांचा पहले लघु सिंचाई विभाग के कार्यालय के रूप में प्रयोग होता था, लेकिन फिलहाल खाली पड़ा था। रविवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।
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सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार और एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। शिकायत में यह भी आरोप है कि तोड़फोड़ के दौरान परिसर के पेड़ काटे गए और लोगों को धमकाकर स्थान खाली करने को कहा गया।
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उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह भूमि सरकारी खासमहल संपत्ति है और इसकी लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। जमीन को पुनः सरकार के नियंत्रण में लेने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक न्यायालय ने इस विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।

इसके बावजूद कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर भवन को ध्वस्त किया गया और प्राकृतिक पेड़ों की कटाई की गई। अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि इस घटनाक्रम और अदालती आदेश की अवहेलना की पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च न्यायालय के समक्ष पेश की जाएगी।


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बेटे की शादी के लिए सफाई का दावा
दूसरी ओर, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने अपने पर लगे आरोपों के बीच स्थल पर कार्य कराने को सही बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जमीन के भूस्वामी मुजीबुर रहमान से पावर ऑफ अटॉर्नी ली है। मुजीबुर रहमान और झारखंड सरकार के बीच इस संपत्ति का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। साव का दावा है कि अदालत ने उन्हें जमीन पर काम करने से रोका नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का विवाह होने वाला है, इसलिए जमीन की साफ-सफाई कराई जा रही थी। बहरहाल, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है और अगला पड़ाव हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
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